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कमरे में अंगीठी से निकाला मौत का धुआं
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मुजफ्फरनगर : दधेडू में दम घुटने से हुई भाई-बहन की मौत पर विलाप करती महिलाएं
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
कमरे में अंगीठी से निकाला मौत का धुआं
चरथावल। दधेड़ू कलां के राजेंद्र के घर मौत का सन्नाटा पसरा है। घर का आंगन जिन बच्चों की खिलखिलाहट से महकता था, अब उनकी याद में आंसू बह रहे हैं। ठंड बढ़ी तो मौत दो दिन पहले चुपके से घर में दाखिल हो गई। दो दिन से ही बालपन में ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलाना शुरू किया। पहली रात जिंदगी भारी पड़ी, लेकिन दूसरी रात बच्चों का दम घुट गया।
दधेडू कलां में बीच आबादी में बसा राजेंद्र-कुसुम दंपती परिवार रहता है। मध्यम परिवार से जुड़े दोनों दूध और मावा बेचकर आजीविका चलाते है। दंपती के तीन संतानों में बड़ा पुत्र अमन, दूसरी पुत्री नेहा और तीसरा बेटा अंश थे। नेहा मुजफ्फरनगर में कक्षा 11 की छात्रा थी। अंश कक्षा सात का विद्यार्थी गांव के स्कूल में था। बहन नेहा खुद पढ़ने के अलावा छोटे भाई अंश को पढ़ाती थी। चचेरे भाई सचिन ने बताया नेहा पढ़ाई के साथ घर के तमाम कार्य में निपुण थी। दो दिन से ही उन्होंने ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलानी शुरू की थी। किसी को क्या मालूम था कि भाई-बहन (नेहा-अंश) अगली सुबह कभी नहीं देख पाएंगे। हादसे ने परिवार कर कहर टूट गया। दो बच्चों के गम में रो-रोकर मां कुसुम और पिता की आंसू सूख गए। हर कोई दिलासा देने घर पहुंच रहा है। पुरकाजी के भाजपा प्रत्याशी और एमएलए प्रमोद उटवाल ने पीड़ित परिजनों के बीच जाकर दिलासा दी। नायब तहसीलदार राजकुमार ने परिवार की आर्थिक स्थिति और हादसे की जानकारी संकलित की।
दो चिताएं जलीं तो छलक उठे आंसू
दधेड़ू में गम का माहौल है। राजेंद्र के परिवार को ढांढस बंधाने के लिए क्षेत्र के लोग पहुंचे। जिसने सुना वही दुख बांटने पहुंच गया। एक साथ दो चिताएं जली, तो हर किसी की आंखें छलक उठीं।
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बंद कमरे में अंगीठी या अलाव नहीं जलाएं
ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कोयले की अंगीठी या अलाव नहीं जलाना चाहिए। इनके जलने से बंद कमरे में यह कार्बनडाईऑक्साइड छोड़कर वातावरण को प्रदूषित करते हैं। जिससे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। जहरीला वातावरण हो जाने के कारण जान का खतरा बढ़ जाता है। दधेडू कलां में हुआ दर्दनाक हादसा बंद कमरे में अंगीठी जलाने का परिणाम है। इस तरह की घटनाओं से कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं - डॉ. महक सिंह, केंद्र प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरथावल
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चरथावल। दधेड़ू कलां के राजेंद्र के घर मौत का सन्नाटा पसरा है। घर का आंगन जिन बच्चों की खिलखिलाहट से महकता था, अब उनकी याद में आंसू बह रहे हैं। ठंड बढ़ी तो मौत दो दिन पहले चुपके से घर में दाखिल हो गई। दो दिन से ही बालपन में ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलाना शुरू किया। पहली रात जिंदगी भारी पड़ी, लेकिन दूसरी रात बच्चों का दम घुट गया।
दधेडू कलां में बीच आबादी में बसा राजेंद्र-कुसुम दंपती परिवार रहता है। मध्यम परिवार से जुड़े दोनों दूध और मावा बेचकर आजीविका चलाते है। दंपती के तीन संतानों में बड़ा पुत्र अमन, दूसरी पुत्री नेहा और तीसरा बेटा अंश थे। नेहा मुजफ्फरनगर में कक्षा 11 की छात्रा थी। अंश कक्षा सात का विद्यार्थी गांव के स्कूल में था। बहन नेहा खुद पढ़ने के अलावा छोटे भाई अंश को पढ़ाती थी। चचेरे भाई सचिन ने बताया नेहा पढ़ाई के साथ घर के तमाम कार्य में निपुण थी। दो दिन से ही उन्होंने ठंड से बचने के लिए कोयले की अंगीठी जलानी शुरू की थी। किसी को क्या मालूम था कि भाई-बहन (नेहा-अंश) अगली सुबह कभी नहीं देख पाएंगे। हादसे ने परिवार कर कहर टूट गया। दो बच्चों के गम में रो-रोकर मां कुसुम और पिता की आंसू सूख गए। हर कोई दिलासा देने घर पहुंच रहा है। पुरकाजी के भाजपा प्रत्याशी और एमएलए प्रमोद उटवाल ने पीड़ित परिजनों के बीच जाकर दिलासा दी। नायब तहसीलदार राजकुमार ने परिवार की आर्थिक स्थिति और हादसे की जानकारी संकलित की।
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दो चिताएं जलीं तो छलक उठे आंसू
दधेड़ू में गम का माहौल है। राजेंद्र के परिवार को ढांढस बंधाने के लिए क्षेत्र के लोग पहुंचे। जिसने सुना वही दुख बांटने पहुंच गया। एक साथ दो चिताएं जली, तो हर किसी की आंखें छलक उठीं।
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बंद कमरे में अंगीठी या अलाव नहीं जलाएं
ठंड से बचने के लिए बंद कमरे में कोयले की अंगीठी या अलाव नहीं जलाना चाहिए। इनके जलने से बंद कमरे में यह कार्बनडाईऑक्साइड छोड़कर वातावरण को प्रदूषित करते हैं। जिससे ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। जहरीला वातावरण हो जाने के कारण जान का खतरा बढ़ जाता है। दधेडू कलां में हुआ दर्दनाक हादसा बंद कमरे में अंगीठी जलाने का परिणाम है। इस तरह की घटनाओं से कई परिवार बर्बाद हो चुके हैं - डॉ. महक सिंह, केंद्र प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरथावल