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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   The smell of water of Hindon spreads far and wide when the wind blows at night.

रात में हवा चलने पर दूर-दूर तक फैल जाती है हिंडन के पानी की दुर्गंध

Sun, 01 Aug 2021 11:40 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 01 Aug 2021 11:40 PM IST
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The smell of water of Hindon spreads far and wide when the wind blows at night.
चंधेड़ी गांव के किनारे से गुजरती हिंडन नदी का दृश्य। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
रात में हवा चलने पर दूर-दूर तक फैल जाती है हिंडन के पानी की दुर्गंध
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बुढ़ाना (मुजफ्फरनगर)। काली नदी के मैली होने के कारण वातावरण भी प्रदूषित होने लगा है। रात में हवा चलने पर इसकी दुर्गंध दूर-दूर तक फैलने से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। हिंडन नदी जनपद में बुड्ढ़ाखेड़ा से होती हुई बुढ़ाना क्षेत्र के कई गांवों से बहती हुई मेरठ जनपद के पिठलोकर गांव से गुजर जाती है। मुजफ्फरनगर जनपद के गांव रियावली नंगला, अटाली व मेरठ जनपद के गांव पिठलोकर के पास हिंडन नदी व काली नदी का संगम हो जाता है। काली नदी का गंदा पानी भी हिंडन नदी में मिल जाता है। काली नदी का दूषित पानी भी हिंड़न नदी के पानी को प्रदूषित कर रहा है।
निर्मल हिंडन को प्रदूषित करने में औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ काली नदी की भी अहम भूमिका है। ग्रामीणों का कहना है कि सहारनपुर से निकली हिंडन नदी को किसी जलस्रोत से जोड़ दिया जाए तो हिंडन नदी का पानी शुद्ध हो जाएगा। रात के समय हवा चलने पर हिंडन नदी के दूषित पानी से निकलने वाली दुर्गंध दूर-दूर तक फैल जाती है। इस नदी के किनारे बसे गांव वालों का कहना है कि घर के बाहर अथवा छत पर बैठना मुश्किल हो जाता है। दूषित पानी में मच्छरों की भरमार हैं। दूषित पानी में पैदा होने वाले मच्छर गांवों में बीमारी फैला रहे हैं।
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हिंडन नदी के पानी को शुद्ध करने के लिए भारी बरसात में किसानों की जमीन के कटाव तथा नदी के बहाव को रोकने के लिए हिंडन नदी किनारे वृक्ष लगाने की सरकार की सभी योजनाएं नाकाम हुई हैं। वर्ष 2019 में प्रशासन द्वारा अटाली गांव में नदी के किनारे किसानों की छह हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया था। इस जमीन पर तत्कालीन कमिश्नर ने रुद्राक्ष का पौधा लगाकर हिंडन वाटिका का उद्घाटन किया था। हालांकि आगे चलकर सारी योजनाएं कागजों पर सिमट कर रह गई।
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नदी किनारे बसे गांव उमरपुर निवासी पूर्व प्रधान चौ. अतहर हसन का कहना है कि रात के समय हवा चलने पर नदी के पानी से दुर्गंध आती है। मकान की छत पर अथवा आंगन में बैठना मुश्किल हो जाता है।
पशुओं के अवशेष डालने पर लगे रोक
गांव वैल्ली निवासी संयम पवांर का कहना है कि हिंडन नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए मृत पशुओं के अवशेष डालने पर रोक लगनी चाहिए।
गांव बिटावदा निवासी ग्राम प्रधान मनोज सहरावत का कहना है कि हमारे क्षेत्र के गांव रियावली, नंगला व अटाली के जंगल में काली नदी का इस नदी में संगम हो जाता है। काली नदी का पानी भी हिंडन नदी के पानी को प्रदूषित कर रहा है। हिंडन नदी के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए काली नदी के पानी को भी शोधित करना होगा।

नदी किनारे गांवों को पेयजल हो गया जहरीला
गांव चंधेड़ी निवासी प्रधान पुरुषोत्तम का कहना है कि नदी के किनारे पर बसे सभी गांवों का पीने का पानी जहरीला हो गया है। इस पानी से कपड़े अथवा बर्तन भी साफ नही किए जा सकते।
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