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गंगनहर बंद होते ही रेत खनन माफिया हुए सक्रिय
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 22 Oct 2016 01:23 AM IST
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गंगनहर की जांच करने पहुंची पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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गंग नहर के बंद होते ही जिले में रेत खनन करने वाले माफिया सक्रिय हो गए है। रेत/बालू की अवैध निकासी पर रोकथाम लगाना पुलिस प्रशासन के साथ कई विभागों के लिए चुनौती होगी। हालांकि इसके लिए विभागीय टीमों का गठन किया गया है, मगर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रेत खनन माफियाओं के आगे कार्रवाई बोनी साबित हो जाती है।
मिट्टी और रेत के खनन पर शासन की रोक है। बावजूद इसके गंग नहर से बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन होता है। रजवाहों, नहरों, माईनरों की सफाई के लिए प्रति वर्ष अपर गंग नहर को हरिद्वार के मायापुर रेग्यूलेटर से एक माह के लिए बंद कर कर दिया जाता है। इसके साथ ही जौली से निकलने वाली अनूप शहर गंग नहर ब्रांच भी बंद हो जाती है। जिले में गंग नहर से करीब एक सौ छोटी बड़ी नहरे, रजवाहे, माइनरों से खेतों की सिंचाई होती है।
इस बार 11 अक्तूबर से 10 नवंबर तक गंग नहर के बंद होने का रोस्टर निर्धारित किया गया है। इन दिनों गंग नहर बंद है और उसका पानी लगातार कम होता जा रहा है। गंग नहर बंद होने का इंतजार पूरे साल रेत खनन माफिया करते है। गंग नहर के बंद होते ही रात-दिन लगातार गंगनहर से रेत का खनन होता है। रेत खनन माफिया अवैध रुप से रेत का खनन कर उसका स्टॉक लगा कर बाद में मोटी कीमत में रेत की बिक्री करते है। गंग नहर के बंद होते ही इन माफियाओं ने अवैध रुप से रेत के खनन की तैयारी कर ली है।
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इन स्थानों पर होता है अवैध खनन
गंग नहर में आसफनगर, लिब्बरहेडी, मंडावली, मोहम्मदपुर, धमात, तुगलकपुर, निरगाजनी, महमूदपुर, नंगला बुजुर्ग, भोपा, जौली, सिखेड़ा, चितौली, सराय रसूलपुर, खतौली, सठेड़ी तथा अनूप शहर ब्रांच गंग नहर में जटवाड़ा, संभलहेड़ा, कुतुबुपुर आदि स्थानो पर रेत का अवैध खनन होता है।
फायरिंग तक की हो चुकी हैं घटनाएं
गंग नहर से रेत खनन को लेकर माफियाओं में टकराव की स्थिति रहती है। गत वर्षों में सिखेड़ा, काटका, चितौड़ा, जौली, नंगला बुजुर्ग में रेत खनन को लेकर रेत खनन माफियाओं में संघर्ष की कई घटनाएं हो चुकी है, जिसमें कई बार फायरिंग की भी घटनाएं हो चुकी है। इन सबसे से प्रशासन को सबक लेना चाहिए।
खनन पर पाबंदी, टीमों का गठन
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एचएन सिंह का कहना है कि गंग नहर से रेत का खनन अवैध है, इस पर पाबंदी है। रेत का खनन होने से गंग नहर की आंतरिक संरचना और बैंकों के खराब हो जाते हैं, जिससे गंग नहर के कटान की स्थिति पैदा होती है। सिंचाई विभाग के जिलेदार, सींचपाल, पत्रलोल, अमीन आदि की करीब एक दर्जन टीमों का गठन किया है। इसके अलावा वन विभाग की टीम भी नियुक्त रहेगी। साथ ही डीएम और एसएसपी को भी इस संबंध में पत्र भेज दिया है। उन्होंने बताया कि रेत का खनन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
अभी तक शुरू नहीं हुआ सफाई कार्य
जेई की हड़ताल के कारण अभी तक जिले में नहरों और माइनरों की सफाई का कार्य शुरू नहीं हुआ है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन एचएन सिंह ने बताया कि जेई के हड़ताल के कारण अभी सफाई अभियान शुरू नहीं हुआ है।
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मिट्टी और रेत के खनन पर शासन की रोक है। बावजूद इसके गंग नहर से बड़े पैमाने पर रेत का अवैध खनन होता है। रजवाहों, नहरों, माईनरों की सफाई के लिए प्रति वर्ष अपर गंग नहर को हरिद्वार के मायापुर रेग्यूलेटर से एक माह के लिए बंद कर कर दिया जाता है। इसके साथ ही जौली से निकलने वाली अनूप शहर गंग नहर ब्रांच भी बंद हो जाती है। जिले में गंग नहर से करीब एक सौ छोटी बड़ी नहरे, रजवाहे, माइनरों से खेतों की सिंचाई होती है।
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इस बार 11 अक्तूबर से 10 नवंबर तक गंग नहर के बंद होने का रोस्टर निर्धारित किया गया है। इन दिनों गंग नहर बंद है और उसका पानी लगातार कम होता जा रहा है। गंग नहर बंद होने का इंतजार पूरे साल रेत खनन माफिया करते है। गंग नहर के बंद होते ही रात-दिन लगातार गंगनहर से रेत का खनन होता है। रेत खनन माफिया अवैध रुप से रेत का खनन कर उसका स्टॉक लगा कर बाद में मोटी कीमत में रेत की बिक्री करते है। गंग नहर के बंद होते ही इन माफियाओं ने अवैध रुप से रेत के खनन की तैयारी कर ली है।
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इन स्थानों पर होता है अवैध खनन
गंग नहर में आसफनगर, लिब्बरहेडी, मंडावली, मोहम्मदपुर, धमात, तुगलकपुर, निरगाजनी, महमूदपुर, नंगला बुजुर्ग, भोपा, जौली, सिखेड़ा, चितौली, सराय रसूलपुर, खतौली, सठेड़ी तथा अनूप शहर ब्रांच गंग नहर में जटवाड़ा, संभलहेड़ा, कुतुबुपुर आदि स्थानो पर रेत का अवैध खनन होता है।
फायरिंग तक की हो चुकी हैं घटनाएं
गंग नहर से रेत खनन को लेकर माफियाओं में टकराव की स्थिति रहती है। गत वर्षों में सिखेड़ा, काटका, चितौड़ा, जौली, नंगला बुजुर्ग में रेत खनन को लेकर रेत खनन माफियाओं में संघर्ष की कई घटनाएं हो चुकी है, जिसमें कई बार फायरिंग की भी घटनाएं हो चुकी है। इन सबसे से प्रशासन को सबक लेना चाहिए।
खनन पर पाबंदी, टीमों का गठन
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता एचएन सिंह का कहना है कि गंग नहर से रेत का खनन अवैध है, इस पर पाबंदी है। रेत का खनन होने से गंग नहर की आंतरिक संरचना और बैंकों के खराब हो जाते हैं, जिससे गंग नहर के कटान की स्थिति पैदा होती है। सिंचाई विभाग के जिलेदार, सींचपाल, पत्रलोल, अमीन आदि की करीब एक दर्जन टीमों का गठन किया है। इसके अलावा वन विभाग की टीम भी नियुक्त रहेगी। साथ ही डीएम और एसएसपी को भी इस संबंध में पत्र भेज दिया है। उन्होंने बताया कि रेत का खनन करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
अभी तक शुरू नहीं हुआ सफाई कार्य
जेई की हड़ताल के कारण अभी तक जिले में नहरों और माइनरों की सफाई का कार्य शुरू नहीं हुआ है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन एचएन सिंह ने बताया कि जेई के हड़ताल के कारण अभी सफाई अभियान शुरू नहीं हुआ है।