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प्राचीन शिव मंदिर में उमड़ता है शिव भक्तों का सैलाब
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भौराकला में स्थित कपूरगढ़ शिव मंदिर।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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भौराकलां। अटूट आस्था, विश्वास और आस्था के पावन चिरौली शिव मंदिर में महा शिवरात्रि को शिव भक्तों का सैलाब नतमस्तक होने के लिए पहुंचता है। मंदिर कमेटी ने तैयारियां शुरू कर दी है। मन्नत पूरी होने पर प्राचीन शिव लिंग पर दूरदराज के श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं।
सिद्धपीठ चिरौली शिव मंदिर की मान्यता दूर तक विख्यात है। यहां महा शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। खासकर फाल्गुन महीने में महा शिवरात्रि के दिनों में मंदिर प्रांगण चहलकदमी बढ़ती है। भोले के भजनों पर आसपास का वातावरण शिवमय रहता है। मंदिर की मान्यता को देखते हुए चरथावल के दिवंगत विधायक विजय कश्यप ने इस मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप में घोषित किया था। मंदिर को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने धनराशि मंजूर की थी।
ऋषि मुनियों की तपोभूमि है पावन मंदिर
मंदिर प्रांगण ऋषि मुनियों की तपोभूमि है। यहां कई बार संतों ने तपस्या की है। करीब आठ साल पूर्व मंदिर का जीर्णोद्घार कराया गया। बिहार के पटना निवासी कलाकार महेंद्र सिंह ने मंदिर प्रांगण में 20 फीट ऊंची शिव पार्वती, वीर बजरंगबली और माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान की भव्य मूर्तियों का निर्माण कर प्रतिष्ठित किया था। जो मंदिर की भव्यता को बढ़ा रहे है।
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कपूरगढ़ शिव मंदिर में जलाभिषेक से होती है मुराद पूरी
कपूरगढ़ गांव में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ आनंद कुटी शिव मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है। यहां जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी होती हैं। प्राचीन मान्यता है हिंडन नदी के किनारे भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि ने भगवान भोलेनाथ की तपस्या कर मंदिर की स्थापना की थी। ऋषि आनन्द बौद्ध ने मन्दिर परिसर में तपस्या मेें लीन रहकर सिद्धि प्राप्त की थी। मान्यता के अनुसार आनंद बौद्ध आश्रम की समाधि पर नियमित पांच रविवार को दीपक जलाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। सिद्ध पीठ मंदिर में फागुन मास की महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास की शिवरात्रि पर श्रद्धालु भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर के महंत जयराम ब्रह्मचारी ने बताया प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों ने सौ बार श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन किया था। इसी कारण सिद्धपीठ मंदिर क्षेत्र में सप्ता कुटी के नाम से भी प्रसिद्ध है।
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सिद्धपीठ चिरौली शिव मंदिर की मान्यता दूर तक विख्यात है। यहां महा शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं का मेला लगता है। खासकर फाल्गुन महीने में महा शिवरात्रि के दिनों में मंदिर प्रांगण चहलकदमी बढ़ती है। भोले के भजनों पर आसपास का वातावरण शिवमय रहता है। मंदिर की मान्यता को देखते हुए चरथावल के दिवंगत विधायक विजय कश्यप ने इस मंदिर को पर्यटक स्थल के रूप में घोषित किया था। मंदिर को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार ने धनराशि मंजूर की थी।
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ऋषि मुनियों की तपोभूमि है पावन मंदिर
मंदिर प्रांगण ऋषि मुनियों की तपोभूमि है। यहां कई बार संतों ने तपस्या की है। करीब आठ साल पूर्व मंदिर का जीर्णोद्घार कराया गया। बिहार के पटना निवासी कलाकार महेंद्र सिंह ने मंदिर प्रांगण में 20 फीट ऊंची शिव पार्वती, वीर बजरंगबली और माता लक्ष्मी और विष्णु भगवान की भव्य मूर्तियों का निर्माण कर प्रतिष्ठित किया था। जो मंदिर की भव्यता को बढ़ा रहे है।
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कपूरगढ़ शिव मंदिर में जलाभिषेक से होती है मुराद पूरी
कपूरगढ़ गांव में स्थित प्राचीन सिद्धपीठ आनंद कुटी शिव मंदिर आस्था और विश्वास का केंद्र है। यहां जलाभिषेक करने से श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी होती हैं। प्राचीन मान्यता है हिंडन नदी के किनारे भगवान परशुराम के पिता महर्षि जमदग्नि ने भगवान भोलेनाथ की तपस्या कर मंदिर की स्थापना की थी। ऋषि आनन्द बौद्ध ने मन्दिर परिसर में तपस्या मेें लीन रहकर सिद्धि प्राप्त की थी। मान्यता के अनुसार आनंद बौद्ध आश्रम की समाधि पर नियमित पांच रविवार को दीपक जलाने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। सिद्ध पीठ मंदिर में फागुन मास की महाशिवरात्रि तथा श्रावण मास की शिवरात्रि पर श्रद्धालु भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। मंदिर के महंत जयराम ब्रह्मचारी ने बताया प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों ने सौ बार श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन किया था। इसी कारण सिद्धपीठ मंदिर क्षेत्र में सप्ता कुटी के नाम से भी प्रसिद्ध है।