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गूढ़ है श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता : गजेंद्र कामर्थी
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संवाद न्यूज एजेंसी
मोरना। कथा व्यास पंडित गजेंद्र कामर्थी ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की गूढ़ मित्रता का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं सदैव सुखद अनुभव कराती हैं।
हनुमतधाम में कथा के विश्राम दिवस पर कामर्थी ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा के अटूट प्रेम और मित्रता का बखान किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार धन-वैभव में अंतर होने के बावजूद, दोनों के बीच का स्नेह असीम था। सुदामा का निःस्वार्थ प्रेम और श्रीकृष्ण का अपने भक्त के प्रति वात्सल्य, इस मित्रता को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करता है। कथावाचक ने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वह भी अपने जीवन में ऐसे ही सच्चे और निश्छल संबंध बनाएं।
शुकतीर्थ की पावन भूमि पर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने को परम सौभाग्य बताया। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे कथा से मिली सीख को अपने जीवन में उतारें और एक बुराई को छोड़ने का संकल्प लेकर यहां से जाएं। यह संकल्प न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा देगा।
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भागवत कथा के अंतिम दिन हनुमत धाम आश्रम में 11 कुण्डीय हवन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ हवन कुंड में आहुतियां डालकर सुख-समृद्धि की कामना की। हवन के उपरांत, एक विशाल भंडारा हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया।
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मोरना। कथा व्यास पंडित गजेंद्र कामर्थी ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की गूढ़ मित्रता का वर्णन करते हुए श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं सदैव सुखद अनुभव कराती हैं।
हनुमतधाम में कथा के विश्राम दिवस पर कामर्थी ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा के अटूट प्रेम और मित्रता का बखान किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार धन-वैभव में अंतर होने के बावजूद, दोनों के बीच का स्नेह असीम था। सुदामा का निःस्वार्थ प्रेम और श्रीकृष्ण का अपने भक्त के प्रति वात्सल्य, इस मित्रता को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करता है। कथावाचक ने श्रोताओं को प्रेरित किया कि वह भी अपने जीवन में ऐसे ही सच्चे और निश्छल संबंध बनाएं।
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शुकतीर्थ की पावन भूमि पर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने को परम सौभाग्य बताया। उन्होंने श्रोताओं से आग्रह किया कि वे कथा से मिली सीख को अपने जीवन में उतारें और एक बुराई को छोड़ने का संकल्प लेकर यहां से जाएं। यह संकल्प न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा देगा।
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भागवत कथा के अंतिम दिन हनुमत धाम आश्रम में 11 कुण्डीय हवन का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ हवन कुंड में आहुतियां डालकर सुख-समृद्धि की कामना की। हवन के उपरांत, एक विशाल भंडारा हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ कमाया।