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कांपती रात में भी नहीं जले अलाव
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कांपती रात में भी नहीं जले अलाव
मुजफ्फरनगर। बर्फीली हवा से सबसे ठंडे दिन और कांपती रात में भी शहर में अधिकतर जगह अलाव जलते नजर नहीं आए। जहां लकड़ी डाली गई थी, वह भी रात नौ बजे तक जल गई। रैन बसेरों में लोगों की संख्या कम दिखी, जबकि दुकानों और अन्य स्थानों पर ही लोग रात गुजारते हुए नजर आए।
शहर में नुमाइश मैदान से लेकर जिला अस्पताल तक कई जगह दुकानों के आसपास ही सोकर रात गुजारते हुए नजर आए। नुमाइश में पहुंचे कई दुकानदारों ने भी दुकानों को ही ठिकाना बनाया। नगर पालिका के आश्रय ग्रह में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निशुल्क व्यवस्था की गई है, इसके बावजूद शहर में कई जगह लोग खुले में ही रात बिता रहे हैं। रेलवे स्टेशन के पास भी लोग खुले में ही रात बिताते दिखे। साईंधाम मंदिर और जानसठ पुल के नीचे भी लोग रात बिताते हुए नजर आए।
दो लोगों की हो चुकी है मौत
शहर में अब तक दो लोगों की सड़क पर ही मौत हो चुकी है। एक सप्ताह पूर्व शिवचौक पर एक भिखारी मृत मिला था। जिला अस्पताल में चार दिन पहले सड़क से उठाकर भर्ती कराए गए एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई थी।
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मुजफ्फरनगर। बर्फीली हवा से सबसे ठंडे दिन और कांपती रात में भी शहर में अधिकतर जगह अलाव जलते नजर नहीं आए। जहां लकड़ी डाली गई थी, वह भी रात नौ बजे तक जल गई। रैन बसेरों में लोगों की संख्या कम दिखी, जबकि दुकानों और अन्य स्थानों पर ही लोग रात गुजारते हुए नजर आए।
शहर में नुमाइश मैदान से लेकर जिला अस्पताल तक कई जगह दुकानों के आसपास ही सोकर रात गुजारते हुए नजर आए। नुमाइश में पहुंचे कई दुकानदारों ने भी दुकानों को ही ठिकाना बनाया। नगर पालिका के आश्रय ग्रह में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए निशुल्क व्यवस्था की गई है, इसके बावजूद शहर में कई जगह लोग खुले में ही रात बिता रहे हैं। रेलवे स्टेशन के पास भी लोग खुले में ही रात बिताते दिखे। साईंधाम मंदिर और जानसठ पुल के नीचे भी लोग रात बिताते हुए नजर आए।
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दो लोगों की हो चुकी है मौत
शहर में अब तक दो लोगों की सड़क पर ही मौत हो चुकी है। एक सप्ताह पूर्व शिवचौक पर एक भिखारी मृत मिला था। जिला अस्पताल में चार दिन पहले सड़क से उठाकर भर्ती कराए गए एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई थी।
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