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जांच टीम के आगे बैंक मैनेजर ने हाथ खड़े किए
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 06 Sep 2015 12:09 AM IST
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मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन घोटाले में पीएनबी की सुजडू ब्रांच के मैनेजर भी जांच के लपेटे में आ गए हैं। शनिवार को बैंक पहुंची जांच टीम के अधिकारियों के आगे बैंक मैनेजर ने सहयोग करने से हाथ खड़े कर दिए।
प्रोबेशन विभाग से संबंधित बैंक का कोई भी रिकॉर्ड नहीं दिखाया और घोटाले का ठीकरा का बैंक के एक क्लर्क पर फोड़ दिया। टीम ने इस दौरान बैंक के मेन कंप्यूटर की हार्ड डिस्क कब्जे में ले ली है।
विधवा पेंशन का हर साल बंटने वाला करोड़ों रुपया डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी के संयुक्त खाते से जिन 29 नोडल ब्रांचों को भेजा गया, उनमें सुजडू पीएनबी शाखा भी शामिल है। सवा करोड़ रुपया इसी शाखा को जारी किया गया। यह पैसा पीएनबी की 59 शाखाओं को दिया जाना था, लेकिन 22 शाखाओं को पैैसा जारी ही नहीं हुआ।
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ड्राफ्ट के जरिए बैंक से पैैसा निकाला गया। जांच टीम के प्रभारी एवं सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि एक अन्य शाखा में पड़ा सात लाख 65 हजार रुपया भी इसी शाखा में जमा किया गया। बैंक में पदनाम का खाता बंद करने के डीएम के आदेश के बाद उक्त बैंक ने अपने यहां खाता बंद कर दिया था।
शनिवार को जांच टीम बैंक पहुंची तो ब्रांच मैनेजर अजय सिंह ने हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि विधवा पेंशन का रिकॉर्ड लिपिक के पास है और उसका तबादला जानसठ हो चुका है। ड्राफ्ट बनाए जाने वाली पत्रावलियों के बारे में भी मैनेजर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
टीम ने पीएनबी के कंप्यूटर की हार्डडिस्क कब्जे में ले ली। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि बैंक से कितनी विधवा पेंशन के भुगतान की बंदरबांट की गई है, सोमवार तक जांच पूरी कर ली जाएगी। मामले में बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
सभी 29 बैंकों की होगी जांच
जांच टीम प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले की कुल 29 नोडल ब्रांचों में चार करोड़ 25 लाख रुपया जारी किया गया था। इनमें लगभग सभी बैंकों की शाखाएं शामिल हैं। अभी केवल पीएनबी की जांच हो रही है। एसबीआई सहित अन्य सभी बैंक भी शामिल हैं। जिन ब्रांचों में पैसा जारी हुआ उन सबकी जांच होगी।
दफ्तर पर सील होने से कामकाज ठप
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन दफ्तर सील होने से विभाग के समस्त कामकाज ठप हो गए हैं। विधवा पेंशन, बच्चा जेल से लेकर तमाम योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। जो लोग दफ्तर में आ रहे हैं उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
जिला प्रोबेशन कार्यालय में घोटाला उजागर होने के बाद पूरे दफ्तर को सील कर दिया गया है। कर्मचारियों को भी दूसरे दफ्तर में बैठने के लिए कहा गया है। पूरे दफ्तर को सील कर दिए जाने से विभाग के समस्त कामकाज प्रभावित हो गए हैं। विधवा पेंशन के लिए आने वाली महिलाओं को भी बेरंग लौटना पड़ रहा है।
इसी के साथ बच्चा जेल की व्यवस्था और सरकार की अन्य योजनाएं भी शामिल हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि जांच होने के कारण ऑफिस पर सील लगाई गई है। अब सवाल यह है कि अगर जांच में एक महीना लगा तो क्या तब तक कार्यालय पर सील रहेगी।
जिला प्रशासन को उन कागजों या कमरे को सील करना चाहिए था, जिनमें घोटाले से संबंधित सबूत हैं। ऐसे में पूरे कार्यालय में सील लगा देने से कर्मचारियों और जनता दोनों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
महबूब के साथी भी जांच के घेरे में
मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन घोटाले के मुख्य सूत्रधार महबूब के गबन में भागीदार बने रिश्तेदार और मित्रों के खातों की कुंडली भी खंगाली जाएगी। 18.88 लाख की रकम जिन खातों में ट्रांसफर होनी थी, उन तीन महिलाओं के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
सरकारी बजट की बंदरबांट के खेल में कौन-कौन लोग शामिल हैं, उसकी तफ्तीश में नए खुलासे होने तय हैं। शहर के प्रकाश चौक स्थित एक कंप्यूटर सेंटर को जांच के घेरे में लिया गया है।
प्रोबेशन विभाग के कनिष्ठ लिपिक के हाथों दो दशक से विधवा पेंशन की धनराशि का जिम्मा है। सरकारी बजट को फर्जी विधवाओं के आंकड़े दर्शाकर हड़पने के खेल में लिपिक महबूब ने वफादारों की लंबी कड़ियां बना ली थीं। विधवाओं को दिया जाने वाला बजट रिश्तेदारों और मित्रों के खातों के जरिये भी हड़पा गया है।
जांच टीम खातों की तफ्तीश कर भुगतान का जरिया बने खातों को खंगालने में जुट गई है। लिपिक का भंडाफोड़ जिस 18 लाख 88 हजार के ड्राफ्ट से हुआ, उससे जुड़ी तीन महिला खातेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।
आरोपी खातेदार महिलाओं के लिपिक से क्या संबंध हैं और कब से विधवा पेंशन का बजट उनके खाते में भेजा जा रहा था, इसकी गहनता से पड़ताल हो रही है। जांच के घेरे में शहर के प्रकाश चौक पर स्थित नाज कंप्यूटर केंद्र भी है। जांच प्रभारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि कंप्यूटर संचालक के खाते में भी विधवा पेंशन के दस लाख 88 हजार ट्रांसफर कराए गए हैं।
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प्रोबेशन विभाग से संबंधित बैंक का कोई भी रिकॉर्ड नहीं दिखाया और घोटाले का ठीकरा का बैंक के एक क्लर्क पर फोड़ दिया। टीम ने इस दौरान बैंक के मेन कंप्यूटर की हार्ड डिस्क कब्जे में ले ली है।
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विधवा पेंशन का हर साल बंटने वाला करोड़ों रुपया डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी के संयुक्त खाते से जिन 29 नोडल ब्रांचों को भेजा गया, उनमें सुजडू पीएनबी शाखा भी शामिल है। सवा करोड़ रुपया इसी शाखा को जारी किया गया। यह पैसा पीएनबी की 59 शाखाओं को दिया जाना था, लेकिन 22 शाखाओं को पैैसा जारी ही नहीं हुआ।
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ड्राफ्ट के जरिए बैंक से पैैसा निकाला गया। जांच टीम के प्रभारी एवं सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि एक अन्य शाखा में पड़ा सात लाख 65 हजार रुपया भी इसी शाखा में जमा किया गया। बैंक में पदनाम का खाता बंद करने के डीएम के आदेश के बाद उक्त बैंक ने अपने यहां खाता बंद कर दिया था।
शनिवार को जांच टीम बैंक पहुंची तो ब्रांच मैनेजर अजय सिंह ने हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना था कि विधवा पेंशन का रिकॉर्ड लिपिक के पास है और उसका तबादला जानसठ हो चुका है। ड्राफ्ट बनाए जाने वाली पत्रावलियों के बारे में भी मैनेजर कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
टीम ने पीएनबी के कंप्यूटर की हार्डडिस्क कब्जे में ले ली। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि बैंक से कितनी विधवा पेंशन के भुगतान की बंदरबांट की गई है, सोमवार तक जांच पूरी कर ली जाएगी। मामले में बैंककर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
सभी 29 बैंकों की होगी जांच
जांच टीम प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि जिले की कुल 29 नोडल ब्रांचों में चार करोड़ 25 लाख रुपया जारी किया गया था। इनमें लगभग सभी बैंकों की शाखाएं शामिल हैं। अभी केवल पीएनबी की जांच हो रही है। एसबीआई सहित अन्य सभी बैंक भी शामिल हैं। जिन ब्रांचों में पैसा जारी हुआ उन सबकी जांच होगी।
दफ्तर पर सील होने से कामकाज ठप
मुजफ्फरनगर। जिला प्रोबेशन दफ्तर सील होने से विभाग के समस्त कामकाज ठप हो गए हैं। विधवा पेंशन, बच्चा जेल से लेकर तमाम योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। जो लोग दफ्तर में आ रहे हैं उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
जिला प्रोबेशन कार्यालय में घोटाला उजागर होने के बाद पूरे दफ्तर को सील कर दिया गया है। कर्मचारियों को भी दूसरे दफ्तर में बैठने के लिए कहा गया है। पूरे दफ्तर को सील कर दिए जाने से विभाग के समस्त कामकाज प्रभावित हो गए हैं। विधवा पेंशन के लिए आने वाली महिलाओं को भी बेरंग लौटना पड़ रहा है।
इसी के साथ बच्चा जेल की व्यवस्था और सरकार की अन्य योजनाएं भी शामिल हैं। जिला प्रोबेशन अधिकारी ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि जांच होने के कारण ऑफिस पर सील लगाई गई है। अब सवाल यह है कि अगर जांच में एक महीना लगा तो क्या तब तक कार्यालय पर सील रहेगी।
जिला प्रशासन को उन कागजों या कमरे को सील करना चाहिए था, जिनमें घोटाले से संबंधित सबूत हैं। ऐसे में पूरे कार्यालय में सील लगा देने से कर्मचारियों और जनता दोनों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है।
महबूब के साथी भी जांच के घेरे में
मुजफ्फरनगर। विधवा पेंशन घोटाले के मुख्य सूत्रधार महबूब के गबन में भागीदार बने रिश्तेदार और मित्रों के खातों की कुंडली भी खंगाली जाएगी। 18.88 लाख की रकम जिन खातों में ट्रांसफर होनी थी, उन तीन महिलाओं के खिलाफ पहले ही मुकदमा दर्ज कराया जा चुका है।
सरकारी बजट की बंदरबांट के खेल में कौन-कौन लोग शामिल हैं, उसकी तफ्तीश में नए खुलासे होने तय हैं। शहर के प्रकाश चौक स्थित एक कंप्यूटर सेंटर को जांच के घेरे में लिया गया है।
प्रोबेशन विभाग के कनिष्ठ लिपिक के हाथों दो दशक से विधवा पेंशन की धनराशि का जिम्मा है। सरकारी बजट को फर्जी विधवाओं के आंकड़े दर्शाकर हड़पने के खेल में लिपिक महबूब ने वफादारों की लंबी कड़ियां बना ली थीं। विधवाओं को दिया जाने वाला बजट रिश्तेदारों और मित्रों के खातों के जरिये भी हड़पा गया है।
जांच टीम खातों की तफ्तीश कर भुगतान का जरिया बने खातों को खंगालने में जुट गई है। लिपिक का भंडाफोड़ जिस 18 लाख 88 हजार के ड्राफ्ट से हुआ, उससे जुड़ी तीन महिला खातेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है।
आरोपी खातेदार महिलाओं के लिपिक से क्या संबंध हैं और कब से विधवा पेंशन का बजट उनके खाते में भेजा जा रहा था, इसकी गहनता से पड़ताल हो रही है। जांच के घेरे में शहर के प्रकाश चौक पर स्थित नाज कंप्यूटर केंद्र भी है। जांच प्रभारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि कंप्यूटर संचालक के खाते में भी विधवा पेंशन के दस लाख 88 हजार ट्रांसफर कराए गए हैं।