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शिक्षक हत्याकांड: साक्ष्य जुटाने के लिए क्राइम सीन दोहराया
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मुजफ्फरनगर। 17 मार्च की आधी रात एसएसपी आवास के सामने एसडी इंटर कालेज के सामने खड़े कैंटर में शिक्षक धर्मेंद्र की हत्या किस प्रकार हुई थी, यह जानने के लिए शुक्रवार दोपहर गाजियाबाद से आई एफएसएल (फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) टीम ने भौतिक साक्ष्य जुटाने के लिए क्राइम सीन को दोहराया। ऐसा जनपद में पहली बार हुआ है।
मार्च माह में शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में चंदौली निवासी शिक्षक की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी वाराणसी पुलिस लाइन के आरोपी दीवान को गिरफ्तार कर लिया था। उसके खिलाफ मृतक शिक्षक के भाई जितेंद्र राम ने मुकदमा दर्ज कराया था। शिक्षक को कई गोलियां लगी थी। कैंटर में भी गोली लगी थी। हालांकि पुलिस ने इस मामले में बारीकी से जांच पड़ताल के बाद चार्जशीट लगा दी थी।
पुख्ता सबूत एकत्र करने को अपराध दृश्य का रुपांतरण
शिक्षक हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक हुई थी। इसी के चलते पुलिस आरोपी को सजा दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। शुक्रवार को गाजियाबाद की एफएसएल (फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) टीम के प्रभारी आरएस लोधी ने टीम के साथ भौतिक साक्ष्य जुटाने के लिए अपराध दृश्य का रूपातंरण किया। बाकायदा वहीं कैंटर मौके पर लाया गया, जिसमें शिक्षक की हत्या हुई थी। घटना के समय मौजूद रहे लोगों की तरह ही लोगों को बैठाया गया। किस तरह शिक्षक को गोलियां मारी गई, शिक्षक लहुलूहान हालत में कैंटर में कहां गिरे। कैंटर में आगे बैठे लोग कितनी देर में कैंटर में पीछे पहुंचे। घटनास्थल कालेज के गेट से कितने मीटर पर था। पुलिस कितनी देर में पहुंची। इसका बारीकी से रूपांतरण कर भौतिक साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई। थाना सिविल लाइन पुलिस भी मौके पर मौजूद रही।
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यह था मामला-
जनपद चंदौली के थाना बलुआ के गांव बैराठ निवासी धर्मेंद्र वाराणसी के महगांव के राजकीय हाई स्कूल में सहायक शिक्षक थे। उनकी डयूटी बोर्ड परीक्षा की कॉपी पहुंचाने में लगाई थी। 14 मार्च को वह सहायक शिक्षक संतोष कुमार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जितेंद्र कुमार मौर्या, कृष्ण प्रताप व वाराणसी पुलिस लाइन से दरोगा नागेंद्र चौहान व दीवान चंद्र प्रकाश यादव के साथ बोर्ड की कॉपी लेकर चले थे।
बिजनौर आदि जनपदों में कॉपी उतार कर 17 मार्च की रात बारह बजे मुजफ्फरनगर में एसएसपी कार्यालय के सामने एसडी इंटर कालेज के गेट पर कैंटर में पहुंचे थे। कैंटर खड़ा कर सभी आराम कर रहे थे। कैंटर में शिक्षक धर्मेद्र, दीवान चंद्र प्रकाश, कृष्ण प्रताप व जितेंद्र मौर्या कैंटर में पीछे तथा दरोगा नागेंद्र चौहान, शिक्षक संतोष व चालक साधू यादव व परिचालक आगे बैठे थे।
रात में तंबाकू नहीं देने से नाराज दीवान चंद्र प्रकाश ने शिक्षक धर्मेंद्र को कारबाइन से गोलियां मार कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने कारबाइन बरामद कर आरोपी दीवान को गिरफ्तार कर लिया था।
वर्जन
बड़े अपराधों में पुलिस इस तरह की कार्रवाई करती है ताकि सबूतों को पुख्ता रूप से कोर्ट में पेश कर आरोपी को सजा दिलाई जा सके।- व्योम बिंदल, सीओ सिटी, आइपीएस।
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मार्च माह में शहर के सिविल लाइन क्षेत्र में चंदौली निवासी शिक्षक की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने आरोपी वाराणसी पुलिस लाइन के आरोपी दीवान को गिरफ्तार कर लिया था। उसके खिलाफ मृतक शिक्षक के भाई जितेंद्र राम ने मुकदमा दर्ज कराया था। शिक्षक को कई गोलियां लगी थी। कैंटर में भी गोली लगी थी। हालांकि पुलिस ने इस मामले में बारीकी से जांच पड़ताल के बाद चार्जशीट लगा दी थी।
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पुख्ता सबूत एकत्र करने को अपराध दृश्य का रुपांतरण
शिक्षक हत्याकांड की गूंज लखनऊ तक हुई थी। इसी के चलते पुलिस आरोपी को सजा दिलाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। शुक्रवार को गाजियाबाद की एफएसएल (फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला) टीम के प्रभारी आरएस लोधी ने टीम के साथ भौतिक साक्ष्य जुटाने के लिए अपराध दृश्य का रूपातंरण किया। बाकायदा वहीं कैंटर मौके पर लाया गया, जिसमें शिक्षक की हत्या हुई थी। घटना के समय मौजूद रहे लोगों की तरह ही लोगों को बैठाया गया। किस तरह शिक्षक को गोलियां मारी गई, शिक्षक लहुलूहान हालत में कैंटर में कहां गिरे। कैंटर में आगे बैठे लोग कितनी देर में कैंटर में पीछे पहुंचे। घटनास्थल कालेज के गेट से कितने मीटर पर था। पुलिस कितनी देर में पहुंची। इसका बारीकी से रूपांतरण कर भौतिक साक्ष्य जुटाने की कोशिश की गई। थाना सिविल लाइन पुलिस भी मौके पर मौजूद रही।
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यह था मामला-
जनपद चंदौली के थाना बलुआ के गांव बैराठ निवासी धर्मेंद्र वाराणसी के महगांव के राजकीय हाई स्कूल में सहायक शिक्षक थे। उनकी डयूटी बोर्ड परीक्षा की कॉपी पहुंचाने में लगाई थी। 14 मार्च को वह सहायक शिक्षक संतोष कुमार, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जितेंद्र कुमार मौर्या, कृष्ण प्रताप व वाराणसी पुलिस लाइन से दरोगा नागेंद्र चौहान व दीवान चंद्र प्रकाश यादव के साथ बोर्ड की कॉपी लेकर चले थे।
बिजनौर आदि जनपदों में कॉपी उतार कर 17 मार्च की रात बारह बजे मुजफ्फरनगर में एसएसपी कार्यालय के सामने एसडी इंटर कालेज के गेट पर कैंटर में पहुंचे थे। कैंटर खड़ा कर सभी आराम कर रहे थे। कैंटर में शिक्षक धर्मेद्र, दीवान चंद्र प्रकाश, कृष्ण प्रताप व जितेंद्र मौर्या कैंटर में पीछे तथा दरोगा नागेंद्र चौहान, शिक्षक संतोष व चालक साधू यादव व परिचालक आगे बैठे थे।
रात में तंबाकू नहीं देने से नाराज दीवान चंद्र प्रकाश ने शिक्षक धर्मेंद्र को कारबाइन से गोलियां मार कर हत्या कर दी थी। पुलिस ने कारबाइन बरामद कर आरोपी दीवान को गिरफ्तार कर लिया था।
वर्जन
बड़े अपराधों में पुलिस इस तरह की कार्रवाई करती है ताकि सबूतों को पुख्ता रूप से कोर्ट में पेश कर आरोपी को सजा दिलाई जा सके।- व्योम बिंदल, सीओ सिटी, आइपीएस।