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शिक्षा ऋषि का जीवन राष्ट्र के लिए वंदनीय : ओमानंद
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 22 Jun 2018 12:15 AM IST
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स्वामी कल्याणदेव की प्रतिमा का पूजन करते संत।
- फोटो : अमर उजाला
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मोरना में तीन सदी के युगदृष्टा वीतराग स्वामी कल्याण देव की जयंती पर संत के समाधि मंदिर में विशेष पूजा अर्चना की गई। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि शिक्षा ऋषि की जीवन समाज और राष्ट्र के लिए वंदनीय है।
शुकदेव आश्रम शुक्रताल में पद्मभूषण, पद्मश्री वीतराग स्वामी कल्याणदेव को शत-शत नमन किया गया। आचार्यों और पुरोहितों ने वेद मंत्रों से यज्ञ किया तथा शुकदेव मंदिर में पूजा अर्चना की। समाधि मंदिर में कर्मयोगी संत को पुष्पांजलि अर्पित की गई। शुकदेव संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारियों ने वेदपाठ किया। महान संत की दिव्य प्रतिमा पर आरती की गई।
पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गुरुदेव ने नि:स्वार्थ भाव से जन कल्याण में जीवन की आहुति दी। दीन दुखियों, गरीबों, किसानों और मजदूरों को शिक्षा से जोड़ने के लिए देश के ग्रामीण अंचल में सैकड़ों विद्यालय खुलवाए। उनकी सरलता, सादगी, त्याग और तप राष्ट्र के लिए अनुकरणीय है।
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वीतराग संत ने ऋषि परंपरा के गौरव को गौरवान्वित किया। वृंदावन से पधारे कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने कहा कि स्वामी कल्याण देव की विनम्रता, दृढ़ता और सेवाभाव आदर्श है। पंजाब से आए कथा व्यास चुन्नीलाल शांडिल्य ने कहा कि पौराणिक शुकतीर्थ को भारत के तीर्थ मानचित्र पर स्थापित करने का श्रेय संत विभूति को है।
सुमन कृष्ण शास्त्री, प्रदीप अधिकारी, जीवन शास्त्री, हर्षमणि ने चरण पादुका अभिषेक संपन्न कराया। नरेश अग्रवाल, सुरेंद्र अग्रवाल, प्रमेंद्र रावत, पुनीत कटारिया, अजय कुमार शर्मा, विजय शर्मा, आचार्य श्याम आदि मौजूद रहे।
परमार्थ में जीवन अर्पण से मिलेंगे प्रभु :श्याम सुंदर
शुक्रताल। डोगरे भागवत भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने कहा कि परमार्थ में जीवन अर्पण से ही प्रभु की कृपा मिलती है। सद्कर्मों से ही व्यक्ति महान बनता है।
शुकदेव आश्रम में देश के कई प्रांतों से आए भागवत भक्तों के मध्य उन्होंने कहा कि तन, मन और धन से समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सतत प्रयत्नशील रहे। भागवत जीवन को मोक्षगामी बनाती है। भक्ति गीतों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। कृष्ण की लीलाओं की प्रस्तुति की गई।
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शुकदेव आश्रम शुक्रताल में पद्मभूषण, पद्मश्री वीतराग स्वामी कल्याणदेव को शत-शत नमन किया गया। आचार्यों और पुरोहितों ने वेद मंत्रों से यज्ञ किया तथा शुकदेव मंदिर में पूजा अर्चना की। समाधि मंदिर में कर्मयोगी संत को पुष्पांजलि अर्पित की गई। शुकदेव संस्कृत विद्यालय के ब्रह्मचारियों ने वेदपाठ किया। महान संत की दिव्य प्रतिमा पर आरती की गई।
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पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि गुरुदेव ने नि:स्वार्थ भाव से जन कल्याण में जीवन की आहुति दी। दीन दुखियों, गरीबों, किसानों और मजदूरों को शिक्षा से जोड़ने के लिए देश के ग्रामीण अंचल में सैकड़ों विद्यालय खुलवाए। उनकी सरलता, सादगी, त्याग और तप राष्ट्र के लिए अनुकरणीय है।
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वीतराग संत ने ऋषि परंपरा के गौरव को गौरवान्वित किया। वृंदावन से पधारे कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने कहा कि स्वामी कल्याण देव की विनम्रता, दृढ़ता और सेवाभाव आदर्श है। पंजाब से आए कथा व्यास चुन्नीलाल शांडिल्य ने कहा कि पौराणिक शुकतीर्थ को भारत के तीर्थ मानचित्र पर स्थापित करने का श्रेय संत विभूति को है।
सुमन कृष्ण शास्त्री, प्रदीप अधिकारी, जीवन शास्त्री, हर्षमणि ने चरण पादुका अभिषेक संपन्न कराया। नरेश अग्रवाल, सुरेंद्र अग्रवाल, प्रमेंद्र रावत, पुनीत कटारिया, अजय कुमार शर्मा, विजय शर्मा, आचार्य श्याम आदि मौजूद रहे।
परमार्थ में जीवन अर्पण से मिलेंगे प्रभु :श्याम सुंदर
शुक्रताल। डोगरे भागवत भवन में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास डॉ श्याम सुंदर पाराशर ने कहा कि परमार्थ में जीवन अर्पण से ही प्रभु की कृपा मिलती है। सद्कर्मों से ही व्यक्ति महान बनता है।
शुकदेव आश्रम में देश के कई प्रांतों से आए भागवत भक्तों के मध्य उन्होंने कहा कि तन, मन और धन से समस्त प्राणियों के कल्याण के लिए सतत प्रयत्नशील रहे। भागवत जीवन को मोक्षगामी बनाती है। भक्ति गीतों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य किया। कृष्ण की लीलाओं की प्रस्तुति की गई।