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6.5 प्रतिशत आ रही गन्ने की रिकवरी, बारिश बनी वजह

Fri, 08 Oct 2021 01:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 08 Oct 2021 01:21 AM IST
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Sugarcane recovery approaching 6.5 percent, rain became the reason
जनपद में मंसूरपुर क्षेत्र में गन्ने की फसल। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
मुजफ्फरनगर। सितंबर माह और अक्तूबर में लगातार बारिश से गन्ने की फसल पानी हो गई है। चीनी मिलों की लेबोरेट्री की जांच में रिकवरी मात्र 6.5 प्रतिशत आई है। यदि बारिश जारी रही तो अक्तूबर में चीनी मिलों में पेराई शुरू कराना चुनौती बन जाएगा।
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गन्ने की फसल का पानी से गहरा संबंध है। समय पर पानी न मिले तो फसल सूख जाती है, और सितंबर-अक्तूबर में पानी ज्यादा आ जाए तो रिकवरी कम हो जाती है। प्रदेश सरकार और गन्ना विभाग की 25 अक्तूबर से चीनी मिलों में पेराई कराने की तैयारी है। इस बीच बारिश विभाग और सरकार के लिए खतरा बनी है। लगातार बारिश के चलते गन्ने की रिकवरी कम होती जा रही है। हालत यह है कि एक अक्तूबर से चीनी मिलों की लेबोरेट्री में जो जांच चल रही है, उसमें रिकवरी बढ़ नहीं पा रही है। निरंतर बारिश से यह लगातार साढे़ छह प्रतिशत पर टिकी है। बारिश बंद होगी तो रिकवरी बढ़ेगी।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी का कहना है कि खतौली, मंसूरपुर और टिकौला चीनी मिल लगातार रिकवरी की जांच कर रही है। बारिश ने रिकवरी का खेल बिगाड़ दिया है। बारिश रुक जाए तो अक्तूबर के अंत रिकवरी नौ-दस प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। यदि बारिश नहीं रुकती है तो रिकवरी में सुधार नहीं हो पाएगा। हम प्रयास में लगे हैं कि 25 अक्तूबर तक चीनी मिलों में पेराई शुरू हो जाए।
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कोल्हू में गुड़ निकल रहा आठ से नौ किलो
मुजफ्फरनगर। गुड़ मंडी में एक अक्तूबर से गुड़ की आवक शुरू हो गई है। कोल्हू संचालकों के सामने भी इस बार रिकवरी का संकट है। सामान्य रूप से जहां एक क्विंटल गन्ने में 13-14 किलो गुड़ निकल जाता है, वहीं इस समय केवल आठ से नौ किलो ही निकल पा रहा है। कोल्हू संचालक मुस्तफाबाद निवासी सुरेश कश्यप का कहना है कि गन्ने में इतना पानी है कि बिना चीनी डाले गुड़ तैयार नहीं हो पा रहा है। बाजार में गुड़ के दाम 3500 से चार हजार तक ही मिल पा रहे हैं, जबकि चीनी ही 3700 रुपये क्विंटल है। बारिश होती रही तो गुड़ बनाना मुश्किल हो जाएगा।
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