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महापंचायत में गन्ना, बिजली, पुलिस, अधिग्रहण का मुद्दा गूंजा
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भाकियू की किसान पंचायत में मंचासीन चौधरी नरेश टिकैत और अन्य नेतागण।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
महापंचायत में गन्ना और भूमि अधिग्रहण का मुद्दा गूंजा
मुजफ्फरनगर। किसान महापंचायत में बिजली बिलों की समस्या, गन्ना भुगतान, पुलिस उत्पीड़न और भूमि अधिग्रहण का मुद्दा गूंजा। अधिकतम वक्ताओं ने इन्हीं मुद्दों को फोकस रखा। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी छाया रहा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्मचारी और अफसर निरंकुश हो गए हैं, जो कि आम जनता का शोषण करने में लगे हैं।
महापंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत सिस्टम से पूरी तरह आहत दिखाई दिए। राकेश टिकैत ने तो यहां तक कह दिया कि अफसर प्रदेश के सीएम की भी नहीं सुनते हैं। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने तहसीलों में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। मंडल महासचिव राजू अहलावत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में किसानों का शोषण हो रहा है और कोई अफसर सुनने को तैयार नहीं है। वर्ष 2010 में भैंसी गांव में किसानों को रेलवे ने 1080 के हिसाब से मुआवजा दिया और अब 778 के हिसाब से दे रही है। कहीं पर 150 रुपये मीटर तक दिया जा रहा है। जिले के प्रतिनिधि किसानों को अफसरों के हाथों लुटवाने का काम कर रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। प्रदेश सचिव ओमपाल मलिक, जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान, संजय चौधरी, श्यामवीर सिंह, रणवीर सिंह ने दफ्तरों में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। पुरकाजी चेयरमैन जहीर फारूकी, अमृत पाल सिंह, सरदार मंजीत सिंह, गजेंद्र अहलावत ने भी विचार रखे। संचालन धर्मेंद्र मलिक ने किया।
पीएम और सीएम के नाम दिया ज्ञापन
मुजफ्फरनगर। भाकियू ने प्रशासन को पीएम और सीएम के नाम 13 सूत्री ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन में पंजाब की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने पर कानून बनाने की मांग की गई। गन्ना मूल्य बढ़ाकर 450 रुपये क्विंटल करने, गन्ना भुगतान तत्काल कराने, गन्ना आयुक्त के ब्याज माफ करने के अधिकार समाप्त करने, नलकूप के कनेक्शन का नियमितीतकरण करने, किसानों की बिजली बिल की दरे कम करने, किसान सम्मान निधि बढ़ाने सहित 13 मांगे रखी गई।
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डीएम और एसएसपी का नहीं आना अखरा
मुजफ्फरनगर। भाकियू की महापंचायत के दौरान सभी को यह उम्मीद थी कि डीएम सेल्वा कुमारी जे और एसएसपी अभिषेक यादव पंचायत के बीच में आएंगे और किसानों की समस्या का निराकरण करेंगे। इन दोनों का नहीं आना किसानों को काफी अखरता रहा।
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मुजफ्फरनगर। किसान महापंचायत में बिजली बिलों की समस्या, गन्ना भुगतान, पुलिस उत्पीड़न और भूमि अधिग्रहण का मुद्दा गूंजा। अधिकतम वक्ताओं ने इन्हीं मुद्दों को फोकस रखा। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी छाया रहा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कर्मचारी और अफसर निरंकुश हो गए हैं, जो कि आम जनता का शोषण करने में लगे हैं।
महापंचायत में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत सिस्टम से पूरी तरह आहत दिखाई दिए। राकेश टिकैत ने तो यहां तक कह दिया कि अफसर प्रदेश के सीएम की भी नहीं सुनते हैं। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने तहसीलों में बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। मंडल महासचिव राजू अहलावत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में किसानों का शोषण हो रहा है और कोई अफसर सुनने को तैयार नहीं है। वर्ष 2010 में भैंसी गांव में किसानों को रेलवे ने 1080 के हिसाब से मुआवजा दिया और अब 778 के हिसाब से दे रही है। कहीं पर 150 रुपये मीटर तक दिया जा रहा है। जिले के प्रतिनिधि किसानों को अफसरों के हाथों लुटवाने का काम कर रहे हैं, इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। प्रदेश सचिव ओमपाल मलिक, जिलाध्यक्ष धीरज लाटियान, संजय चौधरी, श्यामवीर सिंह, रणवीर सिंह ने दफ्तरों में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए। पुरकाजी चेयरमैन जहीर फारूकी, अमृत पाल सिंह, सरदार मंजीत सिंह, गजेंद्र अहलावत ने भी विचार रखे। संचालन धर्मेंद्र मलिक ने किया।
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पीएम और सीएम के नाम दिया ज्ञापन
मुजफ्फरनगर। भाकियू ने प्रशासन को पीएम और सीएम के नाम 13 सूत्री ज्ञापन भी दिया। ज्ञापन में पंजाब की तरह न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद करने पर कानून बनाने की मांग की गई। गन्ना मूल्य बढ़ाकर 450 रुपये क्विंटल करने, गन्ना भुगतान तत्काल कराने, गन्ना आयुक्त के ब्याज माफ करने के अधिकार समाप्त करने, नलकूप के कनेक्शन का नियमितीतकरण करने, किसानों की बिजली बिल की दरे कम करने, किसान सम्मान निधि बढ़ाने सहित 13 मांगे रखी गई।
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डीएम और एसएसपी का नहीं आना अखरा
मुजफ्फरनगर। भाकियू की महापंचायत के दौरान सभी को यह उम्मीद थी कि डीएम सेल्वा कुमारी जे और एसएसपी अभिषेक यादव पंचायत के बीच में आएंगे और किसानों की समस्या का निराकरण करेंगे। इन दोनों का नहीं आना किसानों को काफी अखरता रहा।