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अनिल की सपा में एंट्री बढाएगी उमा की परेशानी
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सपा का सिरदर्द बढ़ा सकती है नेताओं की खींचतान
मुजफ्फरनगर। पूर्व विधायक अनिल कुमार की सपा में एंट्री से पूर्व मंत्री उमा किरण खेमे में हलचल बढ़ गई है। जिले में एक ही सुरक्षित सीट है, जिस पर दोनों नेता अपना दावा करते हैं। अभी तक अलग अलग पार्टी में रहते हुए आमने सामने चुनाव भी लड़ते रहे हैं। लाजिमी है कि दोनों नेताओं के बीच आगामी चुनाव के लिए टिकट को लेकर खींचतान होगी, जो सपा का सिरदर्द भी बढ़ा सकती है।
जिले की एक मात्र सुरक्षित सीट पुरकाजी पर मुख्य रूप से तीन नेताओं में जंग रहती है। इनमें पूर्व विधायक अनिल कुमार, पूर्व मंत्री उमा किरण और पूर्व मंत्री दीपक कुमार शामिल है। दीपक कुमार कांग्रेस में हैं। अब से पहले चरथावल सीट सुरक्षित थी। चरथावल में 2002 में उमा किरण बसपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं। उसके बाद वह बसपा के विद्रोही विधायकों के साथ सपा में चली गई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें प्रदेश में राज्य मंत्री भी बनाया।
2007 के विधानसभा चुनाव में चरथावल विधानसभा से उमा किरण सपा और अनिल कुमार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े। उसमें अनिल कुमार विजयी रहे। 2012 में पुरकाजी विधानसभा सीट सुरक्षित हो गई। अनिल कुमार बसपा से और उमा किरण ने सपा के टिकट पर भाग्य आजमाया। अनिल ने उमा किरण को शिकस्त दी। 2017 के चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन में यह सीट कांग्रेस पर चली गई, इसके बाद भी उमा किरण ने नामांकन कर दिया। हालांकि चुनाव त्रिकोणीय हुआ, जिसमें भाजपा के प्रमोद ऊटवाल चुनाव जीत गए। कांग्रेस के दीपक कुमार और बसपा के अनिल कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा।
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जिला पंचायत के चुनाव में भी अनिल कुमार की पत्नी और उमा किरण में सीधा मुकाबला हुआ। यहां उमा किरण भारी पड़ीं। अनिल कुमार ने हाल ही में सपा ज्वाइन की है। अनिल कुमार के सपा में शामिल हो जाने से चर्चा गरम है। चुनाव में अनिल कुमार अथवा उमा किरण में से किसी एक को टिकट मिलेगा, अनिल कुमार पार्टी में भी किसी उम्मीद के साथ ही शामिल हुए होंगे। ऐसे में दिलचस्प यह होगा कि सपा इन दोनों नेताओं के बीच तालमेल किस तरह बना बाते हैं या फिर खींचतान रहेगी। क्योंकि गत दो फरवरी को सपा कार्यालय पर हुए अनिल कुमार के स्वागत कार्यक्रम में भी उमा किरण शामिल नहीं हुई थीं, जो इन दोनों के बीच खींचतान को दर्शाता है।
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मुजफ्फरनगर। पूर्व विधायक अनिल कुमार की सपा में एंट्री से पूर्व मंत्री उमा किरण खेमे में हलचल बढ़ गई है। जिले में एक ही सुरक्षित सीट है, जिस पर दोनों नेता अपना दावा करते हैं। अभी तक अलग अलग पार्टी में रहते हुए आमने सामने चुनाव भी लड़ते रहे हैं। लाजिमी है कि दोनों नेताओं के बीच आगामी चुनाव के लिए टिकट को लेकर खींचतान होगी, जो सपा का सिरदर्द भी बढ़ा सकती है।
जिले की एक मात्र सुरक्षित सीट पुरकाजी पर मुख्य रूप से तीन नेताओं में जंग रहती है। इनमें पूर्व विधायक अनिल कुमार, पूर्व मंत्री उमा किरण और पूर्व मंत्री दीपक कुमार शामिल है। दीपक कुमार कांग्रेस में हैं। अब से पहले चरथावल सीट सुरक्षित थी। चरथावल में 2002 में उमा किरण बसपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं। उसके बाद वह बसपा के विद्रोही विधायकों के साथ सपा में चली गई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने उन्हें प्रदेश में राज्य मंत्री भी बनाया।
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2007 के विधानसभा चुनाव में चरथावल विधानसभा से उमा किरण सपा और अनिल कुमार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े। उसमें अनिल कुमार विजयी रहे। 2012 में पुरकाजी विधानसभा सीट सुरक्षित हो गई। अनिल कुमार बसपा से और उमा किरण ने सपा के टिकट पर भाग्य आजमाया। अनिल ने उमा किरण को शिकस्त दी। 2017 के चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन में यह सीट कांग्रेस पर चली गई, इसके बाद भी उमा किरण ने नामांकन कर दिया। हालांकि चुनाव त्रिकोणीय हुआ, जिसमें भाजपा के प्रमोद ऊटवाल चुनाव जीत गए। कांग्रेस के दीपक कुमार और बसपा के अनिल कुमार को हार का मुंह देखना पड़ा।
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जिला पंचायत के चुनाव में भी अनिल कुमार की पत्नी और उमा किरण में सीधा मुकाबला हुआ। यहां उमा किरण भारी पड़ीं। अनिल कुमार ने हाल ही में सपा ज्वाइन की है। अनिल कुमार के सपा में शामिल हो जाने से चर्चा गरम है। चुनाव में अनिल कुमार अथवा उमा किरण में से किसी एक को टिकट मिलेगा, अनिल कुमार पार्टी में भी किसी उम्मीद के साथ ही शामिल हुए होंगे। ऐसे में दिलचस्प यह होगा कि सपा इन दोनों नेताओं के बीच तालमेल किस तरह बना बाते हैं या फिर खींचतान रहेगी। क्योंकि गत दो फरवरी को सपा कार्यालय पर हुए अनिल कुमार के स्वागत कार्यक्रम में भी उमा किरण शामिल नहीं हुई थीं, जो इन दोनों के बीच खींचतान को दर्शाता है।