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पुस्तक विक्रेताओं के चेहरे की मुस्कान गायब

Sun, 30 May 2021 12:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 May 2021 12:45 AM IST
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Smiles on booksellers' faces disappear
पुस्तक विक्रेताओं के चेहरे की मुस्कान गायब
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मुजफ्फरनगर। कोरोना की दूसरी लहर में पुस्तक और स्टेशनरी विक्रेताओं का करोड़ों का कारोबार प्रभावित है। पिछले साल भी कोरोना काल में व्यवसाय ठप रहा। इस बार नए शैक्षिक सत्र में बेहतर कारोबार की उम्मीद लेकर थोक और रिटेल के दुकानदारों ने कई करोड़ का माल स्टॉक किया था। सत्र शुरू होते ही अप्रैल में स्कूल-कॉलेज बंद हो गए। कोरोना कर्फ्यू ने दुकानदारों के चेहरे की मुस्कान गायब कर दी। शासन के आदेश पर ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हो गई हैं।
शहर के झांसी रानी स्थित संगल बुक स्टोर के संचालक शक्ति संगल ने बताया कि इंटर कॉलेजों में शिक्षकों द्वारा हिंदी मीडियम की पुस्तकें द्वारा देरी से फाइनल की गई। पांच अप्रैल को विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की किताबें लाने को कहा गया। नौ अप्रैल को कॉलेज बंद कर दिए गए। सीबीएसई, माध्यमिक और सरस्वती विद्या मंदिर से जुड़ी किताबों का थोक व्यवसाय होने से बड़ा स्टॉक मार्च में कर लिया था। कक्षा नौ से 12 तक ऑनलाइन कक्षाएं शुरू हुई, पर दुकानें नहीं खोलने की अनुमति से कारोबार ठप है।
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साउथ सिविल लाइन में थोक और रिटेल पुस्तक विक्रेता रघुवर दयाल एंड संस के राजीव अग्रवाल बताते हैं कि उनके यहां सीबीएसई की पुस्तकों की जिले की एजेंसी है। शहर के अलावा कस्बों में किताब और स्टेशनरी आपूर्ति करते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई के बावजूद दुकानें नहीं खुलने से छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षक भी किताबें ढूंढ रहे है। पिछले सत्र के बाइ इस साल भी कारोबार प्रभावित हो रहा है।
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-साउथ सिविल लाइंस में जैन स्टेशनर्स के यहां विद्या प्रकाशन की एजेंसी है। दुकानदार आदित्य जैन बताते हैं कि यह सीजन भी कोरोना की लहर में डूब गया। कोरोना कर्फ्यू में मई का पूरा महीना घर बैठे हो गया। 10 दिन से बच्चों की वर्चुअल पढ़ाई शुरू हो गई। प्रशासन द्वारा दुकान खोलने की अनुमति नहीं है। थोक और रिटेल का काम ठप हो गया।
-प्रेमपुरी स्थित वीर बुक स्टोर के संचालक अभय गर्ग कहते हैं कि शामली जनपद में किताबों की दुकान खुलने की मंजूरी है। यहां बंद दुकानों के चलते बच्चे कहां खरीदे किताब और स्टेशनरी। जनवरी में प्रकाशकों पर किताबों मंगाने के लिए एडवांस रुपये भेजने पड़ते है बैंक लिमिट का ब्याज बेवजह चढ़ रहा है। यूपी बोर्ड ने कक्षा 10 और 12 की इंग्लिश की किताबों का कोई टेंडर नहीं निकाला और ना ही पाठयक्रम निर्धारित हुआ। इनके अलावा सीबीएसई और माध्यमिक बोर्ड का पूरा कोर्स उपलब्ध है।
दिल्ली स्टेशनर्स के यश अरोरा का मंतव्य है गांव-कस्बों के रिटेलर फोन करते हैं कब खुलेगी दुकान? सीएम योगी द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई शुरू करने का आदेश है। सब दुकानें बंद हैं। ऐसे में पुस्तक और स्टेशनरी का सामान कहां से खरीदें और बच्चे कैसे करें पढ़ाई? यही सवाल बच्चे और अभिभावक कर रहे हैं। थोक दुकानदार स्टेशनरी खरीद लेते हैं। इस बार कोरोना की मार ने कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

वर्जन-
स्टेशनरी और किताबों की दुकानें अभी बंद है। रविवार तक नया शासनादेश आ सकता है। यदि कोरोना कर्फ्यू बढ़ा तोभी इन दुकानों को कुछ समय खोलने की अनुमति दी जाएगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो सके।
- अमित सिंह, एडीएम प्रशासन
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