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पर्यटन स्थल बनेगें जिले के छह मंदिर

Fri, 15 Jan 2021 11:38 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 15 Jan 2021 11:38 PM IST
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Six temples of the district will become tourist places
संभलेहड़ा का पंचमुखी महादेव मंदिर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
पर्यटन स्थल बनेंगे जिले के छह मंदिर
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मुजफ्फरनगर। श्रीमद्भागवत उद्गम नगरी शुकतीर्थ के बाद अब जिले के छह ऐतिहासिक स्थलों को भी पर्यटन स्थल बनाया जाएगा। इसके लिए पर्यटन विभाग ने विकास का खाका तैयार कर लिया है।
जनपद की सभी छह विधानसभा क्षेत्रों से एक-एक ऐतिहासिक स्थल का चयन किया गया है। इनमें संभलहेड़ा का पंचमुखी महादेव मंदिर, शेरनगर का प्राचीन शिव मंदिर, कुरालसी का मां शाकंभरी देवी मंदिर, मेघा शकरपुर का हरिदास बाबा मंदिर, चरौली का प्राचीन सिद्ध पीठ शिव मंदिर और जानसठ का महाभारत कालीन ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर शामिल है। पर्यटन विभाग ने आस्था के केंद्र इन धर्मस्थलों के सुंदरीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये के विकास कार्य के प्रस्ताव बना कर शासन को भेजे हैं। शासन से मंजूरी मिलने के बाद यहां विकास कार्य शुरू करा दिए जाएंगे।
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विधानसभा : चयनित ऐतिहासिक स्थल
मीरापुर : संभलहेडा का पंचमुखी महादेव मंदिर
सदर : शेरनगर का प्राचीन शिव मंदिर
बुढ़ाना : कुरालसी का मां शाकंभरी देवी मंदिर
पुरकाजी : मेघा शकरपुर का हरिदास बाबा मंदिर
चरथावल : चरौली का प्राचीन सिद्धपीठ शिव मंदिर
खतौली : जानसठ का ज्ञानेश्वर महादेव मंदिर
विश्व का तीसरा पंचमुखी महादेव मंदिर
मुजफ्फरनगर। संभलहेड़ा में बना पंचमुखी महादेव मंदिर मुगलकालीन मंदिर है। संवत 1514 में बने मंदिर में विश्व का तीसरा पंचमुखी शिवलिंग स्थापित है। मुगलकाल से लेकर ब्रिटिश काल तक की कहानी मंदिर की बनावट बयां करती है। मंदिर का निर्माण करीब 550 साल पहले मुगलकाल में मोनी बाबा के सानिध्य में लाला हुकुमत राय ने कराया था। मंदिर में स्थापित पंचमुखी शिवलिंग विश्व में तीन स्थानों पर ही स्थापित है, जिसमें से एक नेपाल के पशुपति नाथ मंदिर और दूसरा मेवाड़ में एक शिव मंदिर में है। इस कारण दूर-दूर से श्रद्धालु संभलहेड़ा मंदिर में पहुंचते हैं। मंदिर निर्माण में प्रयोग की गई कला श्रद्धालुओं के मन में आस्था के साथ पर्यटन का भाव जागृत करती है। शिवरात्रि पर यहां मेला लगता है।
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कुरालसी का मां शाकंभरी देवी मंदिर
मुजफ्फरनगर। बुढ़ाना क्षेत्र के गांव कुरालसी में स्थित चिंतपूर्णी मां शाकंभरी देवी मंदिर सिद्ध पीठ होने के कारण श्रद्धालुुओं की आस्था का प्रतीक है। वर्ष 1960 में गांव के लाला बिसंबर राय ने मंदिर स्थान पर नवरात्रों के दौरान जमीन पर लेटकर अपने शरीर पर मिट्टी व रेत डालकर जौ उगा लिए थे। इसी दौरान ग्रामीणों के बुलावे पर हरिद्वार से भूमानंद महाराज गांव में पहुंचे थे। विशाल शतचंड़ी महायज्ञ का आयोजन हुआ था। विधि विधान के साथ माता के मंदिर की स्थापना हुई थी। मंदिर की स्थापना के बाद से आज तक मंदिर में अखंड ज्योति जलती आ रही है। प्रतिवर्ष दोनों नवरात्रों पर शतचंड़ी महायज्ञ का आयोजन होता है।

पर्यटन स्थल बनेंगे आस्था के केंद्र
- मुजफ्फरनगर जिले के छह ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को पर्यटन के रुप में विकसित किए जाने की योजना है। सभी स्थानों के 50-50 लाख रुपये के विकास के प्रस्ताव बना कर शासन को भेजे गए है। मंजूरी मिलते ही कार्य शुरू कराए जाएंगे। सभी आस्था के केंद्र पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किए जाएंगे। - अंजू चौधरी क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी

कुरालसी का मां शाकंभरी देवी मंदिर।

कुरालसी का मां शाकंभरी देवी मंदिर।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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