{"_id":"5dc06ef18ebc3e93bc19c1dc","slug":"siddhachakra-vidhan-jain-samaj-khatauli-khatauli-news-mrt4519245159","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिद्धचक्र विधान में प्रभु की आराधना की गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिद्धचक्र विधान में प्रभु की आराधना की गई
विज्ञापन
सिद्धचक्र विधान में प्रभु की आराधना की गई
खतौली। सिद्धचक्र विधान के छठे दिन जिनेंद्र भगवान की पूजा अर्चना विधि विधान पूर्वक की गई।
होली चौक स्थित उत्सव पांडाल में सोमवार की सुबह पीत वस्त्रों में सुसज्जित भक्तों ने विज्ञानमति माता जी ससंघ का मंगल प्रवेश कराया। पांडाल में विराजमान जिनेंद्र भगवान की प्रतिमाओं को श्रावकों ने भक्तिभाव से अभिषेक कर पूजन किया। अष्ट द्रव्य से विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए। सोमवार दोपहर में चार्तुमास निष्ठापन के साथ कलश समारोह आयोजित किया गया। चातुर्मास का मुख्य मंगल कलश जैन मंडी स्थित विनोद जैन ठेकेदार के निवास पर ले जाया गया। उत्सव पांडाल से उक्त कार्यक्रम के लिए एक शोभायात्रा आयोजित की गई। शोभायात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा होली चौक स्थित पांडाल से प्रारंभ होकर इंदिरा मूर्ति, चौपला से गुजरकर जैन मंडी पहुंची। भक्तों को भी उनके चातुर्मास कलश प्रदान किए गए।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विज्ञानमति माताजी ससंघ ने बताया कि आत्म निरीक्षण से व्यक्ति का अज्ञानरूपी अहंकार मिट जाता है। मधुर वाणी का प्रयोग करने वाले जीवन में उन्नति करते हैं। धर्माचरण करने वाले व्यक्ति महान होते हैं, श्रेष्ठ वही है जो किसी के प्रति बैर एवं द्वेष की भावना नहीं रखें। संसार में वही सुखी जीवन बिता सकता है, जो संतोष को धारण करें। इस अवसर पर विजय, राजीव, रवि, विनोद, सिद्धार्थ, प्रदीप, सुशील, आदीश प्रवक्ता, राजीव लोहिया, विनीत, अतुल, अशोक, हंस कुमार, अमित, नीरज, सपना, नीलम, दीक्षा, डा. ज्योति, रेखा, रेणु, बबीता, दर्शिता आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
खतौली। सिद्धचक्र विधान के छठे दिन जिनेंद्र भगवान की पूजा अर्चना विधि विधान पूर्वक की गई।
होली चौक स्थित उत्सव पांडाल में सोमवार की सुबह पीत वस्त्रों में सुसज्जित भक्तों ने विज्ञानमति माता जी ससंघ का मंगल प्रवेश कराया। पांडाल में विराजमान जिनेंद्र भगवान की प्रतिमाओं को श्रावकों ने भक्तिभाव से अभिषेक कर पूजन किया। अष्ट द्रव्य से विधान के अर्घ्य समर्पित किए गए। सोमवार दोपहर में चार्तुमास निष्ठापन के साथ कलश समारोह आयोजित किया गया। चातुर्मास का मुख्य मंगल कलश जैन मंडी स्थित विनोद जैन ठेकेदार के निवास पर ले जाया गया। उत्सव पांडाल से उक्त कार्यक्रम के लिए एक शोभायात्रा आयोजित की गई। शोभायात्रा में काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा होली चौक स्थित पांडाल से प्रारंभ होकर इंदिरा मूर्ति, चौपला से गुजरकर जैन मंडी पहुंची। भक्तों को भी उनके चातुर्मास कलश प्रदान किए गए।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा में विज्ञानमति माताजी ससंघ ने बताया कि आत्म निरीक्षण से व्यक्ति का अज्ञानरूपी अहंकार मिट जाता है। मधुर वाणी का प्रयोग करने वाले जीवन में उन्नति करते हैं। धर्माचरण करने वाले व्यक्ति महान होते हैं, श्रेष्ठ वही है जो किसी के प्रति बैर एवं द्वेष की भावना नहीं रखें। संसार में वही सुखी जीवन बिता सकता है, जो संतोष को धारण करें। इस अवसर पर विजय, राजीव, रवि, विनोद, सिद्धार्थ, प्रदीप, सुशील, आदीश प्रवक्ता, राजीव लोहिया, विनीत, अतुल, अशोक, हंस कुमार, अमित, नीरज, सपना, नीलम, दीक्षा, डा. ज्योति, रेखा, रेणु, बबीता, दर्शिता आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन