फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Shukitirtha area of Muzaffarnagar

शुकतीर्थ क्षेत्र के हजारों गोवंश तिनका तिनका तलाशने पर मजबूर, चारागाहों पर हो गए कब्जे

Thu, 13 Jun 2019 12:03 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Thu, 13 Jun 2019 12:03 AM IST
विज्ञापन
Shukitirtha area of Muzaffarnagar
शुक्रताल में नदी किनारे टहलता गायों का झुंड। - फोटो : अमर उजाला
भोपा क्षेत्र में चरागाहों के लुप्त हो जाने से गोवंश के जीवन पर संकट गहरा गया है। मोरना विकास खंड क्षेत्र के भोपा, मोरना, ककरौली, शुकतीर्थ सहित आश्रम की हजारों  गोवंश आज खाली पड़े प्लाट आदि में ही एक-एक घास के तिनके से अपने पेट की भूख बुझाने के लिए चरती नजर आती है।
विज्ञापन

करीब 15 वर्ष पहले गंगा खादर क्षेत्र में हजारों बीघा भूमि पर हरी घास नजर आती थी। जगह-जगह झील आदि में पानी भरा देखा जाता था। आज की बात करें तो अधिकांश भूमि पर अब फसल खड़ी है। खेतों में खतरनाक केमिकल का छिड़काव कर हरी घास को सुखा दिया जाता है।
विज्ञापन


इतना ही नहीं यहां वन्य जीव जंतुओं को रोकने के लिए खेतों के इर्दगिर्द करंट छोड़ दिया जाता है। चरागाहों की कई बीघा भूमि अब केवल कागजों में ही नजर आती है।  क्षेत्र के चरवाहों की पीड़ा से शासन प्रशासन अनजान बना बैठा है। भोपा सहित शुक्रतीर्थ खादर क्षेत्र से ककरौली क्षेत्र के चरवाहा हजारों देसी गाय को पालने का कार्य करते आ रहे हैं। सीकरी के चरवाह जीत सिंह के परिवार में लगभग 125, सिकंदरपुर निवासी सतवीर सिंह के परिवार 100 के साथ साथ मदनपाल, सेठू, सहू महाराज, बिरमू, इकबाल के पास भी सैकड़ों गोवंश है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भोकरहेडी़ के अंकित, सुंदर, सुधीर, अतीक, रविदत्त,  इलाहाबास के जगपाल 150,  राजपाल 125, जित्तू, प्रदीप, राजकुमार, दरियाबाद के पहल सिंह, कृष्णपाल, सुंदर, भुआपुर बेदू, धर्मपाल, बिजेंद्र, शुक्रतीर्थ के बीरसिंह, सुक्का, मंगत आदि चरवाहों के पास दो हजार से भी अधिक गाय और गोवंश है। गोवंश पालक प्रतिदिन गायों को सुबह सवेरे  चराने के लिए घर से जंगल की ओर निकल जाते हैं। कुछ लोग अनेकों समस्याओं को झेलते हुए गंगा के खादर क्षेत्र में ही दिन रात रह कर अपने गोवंश को पाल रहे हैं। शुकतीर्थ  के प्रसिद्ध आश्रमों सहित गोशालाओं में भी हजारों गाय है।

गायों का पेट भरने के लिए चारागाह व गंगा खादर क्षेत्र के खाली पड़ी भूमि के न रहने के कारण उनकी गायों आदि को भर पेट घास नहीं मिल पाती है। खेतों तथा खाली पड़े प्लाटों, जंगल के रास्तों  में घास को नष्ट करने के लिए केमिकल युक्त दवाई को छिड़का जाता है। इस घास को खा कर गोवंश गंभीर बीमारी का शिकार तो होते ही है साथ ही अनेकों गायों की जान भी जा चुकी हैं। कुछ स्थानों पर जहां भूमाफिया का कब्जा है। वहीं चरागाह के नाम की भूमि वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र में चली गई है। इसीलिए वन विभाग द्वारा गायों को चराने के लिए मना किया जाता है।


आवारा पशुओं से समस्या गंभीर
भोपा। चरवाहों के सामने गोवंश चराने की बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है।  आवारा पशुओं की भरमार से समस्या और उत्पन्न हो गई हैं। सरकार द्वारा आवारा पशुओं के लिए कांजी हाउस निर्माण योजना चलाई गई हैं। मोरना विकास खंड क्षेत्र में मात्र एक कांजी हाउस भोपा में बनाया गया है, जो बड़ी रकम खर्च के बाद भी अधूरा है। ग्वालों ने प्रशासन से चारागाह की भूमि माफिया से खाली कराने के बाद उसे चारागाहों के लिए छोडे़ जाने की मांग की है। शुकतीर्थ की नई मंडी गोशाला के प्रबंधक राम सहोदर मिश्रा  का कहना है कि गोवंश के चरने के लिए प्राप्त स्थान नहीं होने के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed