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कोरोना में बदल गए स्कूल, गेट पर रखे सैनिटाइजर
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केंद्रीय विद्यालय में हाथों को सैनिटाइज करती युवती।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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कोरोना में बदल गए स्कूल, गेट पर रखे सैनिटाइजर
मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण काल के बाद अब नए शैक्षिक सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक अप्रैल से स्कूल खुलेंगे। शिक्षण संस्थाओं के मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखे मिल रहे हैं। कुछ स्कूलों में थर्मल स्कैनिंग जरूरी की गई है।
निजी स्कूलों के प्रबंधक एहतियात के तौर पर इंतजाम में जुटे हैं। सरकारी स्कूलों में भी बदलाव हुए हैं। सरकुलर रोड स्थित केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य बृजपाल सिंह बताते हैं कि मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखवाया गया है। कोरोना संक्रमण काल की तरह कोई प्रतिबंध अब नहीं है लेकिन छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है।
स्कूलों में पूरा हुआ कायाकल्प
कोरोना महामारी को मात देने के बाद खुले परिषदीय विद्यालयों को कायाकल्प हो गया है। जिले के सभी 951 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य 85 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
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बच्चों के लिए तैयार कर रहे माहौल
पेंटिंग विद्यालयों की दीवारों पर बच्चों का मन मोह रही है। कोरोना महामारी से पहले के और अब के स्कूलों में बदलाव दिखाई दे रहा है। क्लास रूम में पहले बच्चे टाट पट्टी पर बैठ रहे थे, अब उन्हें बैठने के लिए बेंच मिल गई है। नगर शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश तिवारी ने बताया कि कोरोना के बाद शुरू में बच्चों की संख्या कम रही, लेकिन अब अच्छी हो गई है। बच्चों को स्कूलों का वातावरण पसंद आ रहा है।
शुद्धता, स्वच्छता पर फोकस
स्कूलों में इस बार छात्र-छात्राओं को सैनिटाइजर का प्रयोग करने की आदत डाली जा रही है, वहीं पर शुद्ध पानी की व्यवस्था की गई है। बीएसए मायाराम का कहना है कि कोरोना के बाद खुले स्कूलों में अब सब कुछ बदला-बदला नजर आएगा। कायाकल्य योजना में स्कूलों का सौंदर्यीकरण हुआ है।
कोरोना काल में ऑनलाइन हुई पढ़ाई
कोरोना संक्रमण काल में सरकारी और निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हुई। व्हाट्सएप ग्रुप के अलावा जूम और गूगल मीट के जरिये ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। परिषदीय स्कूलों की ओर से मोहल्ला क्लास भी चलाई गई।
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मुजफ्फरनगर। कोरोना संक्रमण काल के बाद अब नए शैक्षिक सत्र की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक अप्रैल से स्कूल खुलेंगे। शिक्षण संस्थाओं के मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखे मिल रहे हैं। कुछ स्कूलों में थर्मल स्कैनिंग जरूरी की गई है।
निजी स्कूलों के प्रबंधक एहतियात के तौर पर इंतजाम में जुटे हैं। सरकारी स्कूलों में भी बदलाव हुए हैं। सरकुलर रोड स्थित केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य बृजपाल सिंह बताते हैं कि मुख्य गेट पर सैनिटाइजर रखवाया गया है। कोरोना संक्रमण काल की तरह कोई प्रतिबंध अब नहीं है लेकिन छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जा रहा है।
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स्कूलों में पूरा हुआ कायाकल्प
कोरोना महामारी को मात देने के बाद खुले परिषदीय विद्यालयों को कायाकल्प हो गया है। जिले के सभी 951 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प का कार्य 85 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
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बच्चों के लिए तैयार कर रहे माहौल
पेंटिंग विद्यालयों की दीवारों पर बच्चों का मन मोह रही है। कोरोना महामारी से पहले के और अब के स्कूलों में बदलाव दिखाई दे रहा है। क्लास रूम में पहले बच्चे टाट पट्टी पर बैठ रहे थे, अब उन्हें बैठने के लिए बेंच मिल गई है। नगर शिक्षा अधिकारी ज्योति प्रकाश तिवारी ने बताया कि कोरोना के बाद शुरू में बच्चों की संख्या कम रही, लेकिन अब अच्छी हो गई है। बच्चों को स्कूलों का वातावरण पसंद आ रहा है।
शुद्धता, स्वच्छता पर फोकस
स्कूलों में इस बार छात्र-छात्राओं को सैनिटाइजर का प्रयोग करने की आदत डाली जा रही है, वहीं पर शुद्ध पानी की व्यवस्था की गई है। बीएसए मायाराम का कहना है कि कोरोना के बाद खुले स्कूलों में अब सब कुछ बदला-बदला नजर आएगा। कायाकल्य योजना में स्कूलों का सौंदर्यीकरण हुआ है।
कोरोना काल में ऑनलाइन हुई पढ़ाई
कोरोना संक्रमण काल में सरकारी और निजी स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई हुई। व्हाट्सएप ग्रुप के अलावा जूम और गूगल मीट के जरिये ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। परिषदीय स्कूलों की ओर से मोहल्ला क्लास भी चलाई गई।