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विधायक संगीत सोम को मिली राहत, मुकदमा खत्म
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सरधना विधायक संगीत सोम को मिली राहत
मुजफ्फरनगर। मेरठ जिले के सरधना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संगीत सोम को कवाल कांड की फर्जी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने के मामले में विशेष सत्र न्यायालय से राहत मिल गई है। मुकदमे के वादी सुबोध कुमार सिंह की मौत व साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने वर्ष 2017 में लगाई गई एफआर को मंजूरी देते हुए मुकदमे को खत्म कर दिया है। विधायक को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था।
जानसठ कोतवाली क्षेत्र के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को मजरा मलिकपुरा के फुफेरे भाइयों सचिन व गौरव की हत्या कर दी गई थी। घटना में दूसरे पक्ष की शाहनवाज की भी मौत हुई थी। उसी दौरान सोशल मीडिया पर दो युवकों की बर्बरतापूर्वक की गई हत्या की एक वीडियो क्लिप वायरल हुई, जिसे सचिन-गौरव की हत्या की वीडियो बनाकर प्रचारित किया गया। इसे शुभम नाम की फेसबुक आईडी से सरधना विधायक संगीत सोम को शेयर किया गया, जिसे विधायक ने लाइक भी किया। इस फर्जी वायरल वीडियो से जनाक्रोश बढ़ता गया और यह दंगे की बड़ी वजह बनी। वहीं, वायरल वीडियो मामले से संगीत सोम का नाम जुड़ते ही सियासत गरमा गई। शासन के आदेश पर तत्कालीन रामलीला टिल्ला चौकी प्रभारी एसआई सुबोध कुमार सिंह ने शहर कोतवाली में अपराध संख्या 1118/2013 धारा 153-ए, 420, 120-बी आईपीसी एवं 66-ए आईटी एक्ट में अभियोग पंजीकृत कर दिया। इसके बाद संगीत सोम को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए उन पर रासुका लगा दी गई।
दंगे की जांच कर रही एसआईसी ने कथित वीडियो की जांच शुरू करते हुए फेसबुक मुख्यालय के साथ ही इंटरपोल से भी सहयोग लिया गया, लेकिन यह वीडियो क्लिप किस शुभम के फेसबुक अकाउंट से शेयर किया गया, इसका पता नहीं चला। उधर, करीब डेढ़ साल तक जेल में बंद रहे विधायक संगीत सोम को लखनऊ में एडवाइजरी बोर्ड ने रासुका निरस्त कर राहत दी, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। इस मामले की सुनवाई एमपी एमएलए विशेष कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-पांच में विशेष न्यायाधीश रामसुध सिंह के समक्ष हुई, जिसमें विवेचना के दौरान साक्ष्य न मिलने पर वर्ष 2017 में मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। इसी दौरान वर्ष 2018 में मुकदमे के वादी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की बुलंदशहर के स्याना थाना प्रभारी रहते हुए दंगे के दौरान गोली लगने से मौत हो गई। वादी की मौत, साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन के विरोध न करने पर विशेष सत्र न्यायाधीश ने वर्ष 2017 में लगाई गई एफआर स्वीकार करते हुए मुकदमे को खत्म कर दिया है।
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मुजफ्फरनगर। मेरठ जिले के सरधना विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक संगीत सोम को कवाल कांड की फर्जी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने के मामले में विशेष सत्र न्यायालय से राहत मिल गई है। मुकदमे के वादी सुबोध कुमार सिंह की मौत व साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने वर्ष 2017 में लगाई गई एफआर को मंजूरी देते हुए मुकदमे को खत्म कर दिया है। विधायक को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था।
जानसठ कोतवाली क्षेत्र के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को मजरा मलिकपुरा के फुफेरे भाइयों सचिन व गौरव की हत्या कर दी गई थी। घटना में दूसरे पक्ष की शाहनवाज की भी मौत हुई थी। उसी दौरान सोशल मीडिया पर दो युवकों की बर्बरतापूर्वक की गई हत्या की एक वीडियो क्लिप वायरल हुई, जिसे सचिन-गौरव की हत्या की वीडियो बनाकर प्रचारित किया गया। इसे शुभम नाम की फेसबुक आईडी से सरधना विधायक संगीत सोम को शेयर किया गया, जिसे विधायक ने लाइक भी किया। इस फर्जी वायरल वीडियो से जनाक्रोश बढ़ता गया और यह दंगे की बड़ी वजह बनी। वहीं, वायरल वीडियो मामले से संगीत सोम का नाम जुड़ते ही सियासत गरमा गई। शासन के आदेश पर तत्कालीन रामलीला टिल्ला चौकी प्रभारी एसआई सुबोध कुमार सिंह ने शहर कोतवाली में अपराध संख्या 1118/2013 धारा 153-ए, 420, 120-बी आईपीसी एवं 66-ए आईटी एक्ट में अभियोग पंजीकृत कर दिया। इसके बाद संगीत सोम को गिरफ्तार कर जेल भेजते हुए उन पर रासुका लगा दी गई।
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दंगे की जांच कर रही एसआईसी ने कथित वीडियो की जांच शुरू करते हुए फेसबुक मुख्यालय के साथ ही इंटरपोल से भी सहयोग लिया गया, लेकिन यह वीडियो क्लिप किस शुभम के फेसबुक अकाउंट से शेयर किया गया, इसका पता नहीं चला। उधर, करीब डेढ़ साल तक जेल में बंद रहे विधायक संगीत सोम को लखनऊ में एडवाइजरी बोर्ड ने रासुका निरस्त कर राहत दी, जिसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया गया। इस मामले की सुनवाई एमपी एमएलए विशेष कोर्ट अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-पांच में विशेष न्यायाधीश रामसुध सिंह के समक्ष हुई, जिसमें विवेचना के दौरान साक्ष्य न मिलने पर वर्ष 2017 में मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। इसी दौरान वर्ष 2018 में मुकदमे के वादी इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की बुलंदशहर के स्याना थाना प्रभारी रहते हुए दंगे के दौरान गोली लगने से मौत हो गई। वादी की मौत, साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन के विरोध न करने पर विशेष सत्र न्यायाधीश ने वर्ष 2017 में लगाई गई एफआर स्वीकार करते हुए मुकदमे को खत्म कर दिया है।
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