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Muzaffarnagar News: शहीद के नाम पर नहीं बनें कमरे, समाधि की जमीन पर भी कब्जा

Wed, 26 Jul 2023 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jul 2023 12:33 AM IST
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Rooms should not be built in the name of the martyr, the land of the mausoleum is also occupied
गांव फुलत में स्थित फौजी सतीश का समाधि स्थल।
शहीद फौजी सतीश कुमार के परिजनों ने सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी

रतनपुरी। कारगिल युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्टे करने वाले जांबाज सैनिक फुलत निवासी शहीद फौजी सतीश कुमार ने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। परिवार का कहना है कि समाधि स्थल के सामने सरकार की ओर करीब छह बीघा जमीन वाटिका के लिए आवंटित की गई थी, जिस पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। शहादत के समय सरकार ने सतीश के नाम पर जूनियर हाईस्कूल स्कूल एवं गांव में दो कमरों का आवास जैसी कई घोषणा की थी। मगर, हकीकत में कुछ नहीं हुआ।

फुलत निवासी पिता धर्मपाल सिंह और माता नत्थो देवी के घर 15 जून 1974 को जन्मे सतीश कुमार वर्ष 1990 में सेना की 238 इंजीनियर रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। 26 जुलाई 1999 को कारगिल की लड़ाई में प्राणों को मातृभूमि की रक्षा में न्यौछावर कर दिया था। पिता धर्मपाल सिंह का कहना है कि बेटे की शहादत के समय सरकार की ओर से की गई घोषणाएं पूरी नहीं हुई। शहादत के समय फुलत गांव का नाम शहीद फौजी सतीश कुमार के नाम पर रखने, गांव का मुख्य द्वार बनाए जाने आदि जैसी कई घोषणा सरकार द्वारा की गई थी, लेकिन अमल नहीं किया गया।
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फिलहाल धर्मपाल सिंह अपने बेटे श्याम कुमार के साथ कंकरखेड़ा में ही रहते हैं। शहीद फौजी सतीश कुमार की पत्नी विमलेश देवी अपनी दो बेटियों रुपाली और झलक तथा बेटे अतुल के साथ कंकरखेड़ा स्थित मकान में रहती है।
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गंगनहर पटरी पर कब बनेगा मुख्य द्वार

भोपा। गांव बेलड़ा निवासी शहीद अमरेश पाल के नाम से गांव में एक जूनियर हाई स्कूल है। उनकी कृषि भूमि में एक शहीद स्मारक बना हुआ है। शहीद के परिजनों व ग्रामीणों का कहना है कि कारगिल विजय दिवस पर कोई भी अधिकारी, कर्मचारी उनके शहीद स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित नहीं करते। सरकार की घोषणा के बाद भी गंग नहर पटरी पर शहीद अमरेश पाल की याद में मुख्य द्वार नहीं बन सका।



याद रहेगी रिजवान की शहादत

बुढ़ाना। तहसील क्षेत्र के विज्ञाना गांव के किसान अब्दुल खालिक का बेटा रिजवान त्यागी वर्ष 1990 में देश की सेवा करने के लिए सेना में भर्ती हुआ था। कारगिल में दुश्मन के खिलाफ अदम्य साहस से युद्ध लड़ते हुए वे तीन जुलाई को शहीद हो गए। उस समय पत्नी शबनम बानो की गोद में चार साल की बेटी हिना थी।



सरकार ने पूरी की सारी घोषणाएं

बुढ़ाना। इटावा गांव के किसान का बेटा नरेन्द्र राठी कारगिल युद्ध में ऑपरेशन विजय के दौरान शहादत दी थी। वह वर्ष 1987 में मेरठ में भर्ती हुआ था। शहीद का बेटा सुमित राठी बीटेक करने के बाद नोएडा की एक कंपनी में इंजीनियर है। शहीद नरेन्द्र राठी के भाई जयकुमार राठी व ओमसिंह राठी कहते है कि सरकार ने शहादत के समय की सभी घोषणाएं पूरी की हैं।



बचन सिंह ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

पचैंडा कलां निवासी लांस नायक बचन सिंह ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। कारगिल में ऑप्रेशन विजय के तहत उन्होंने देश की रक्षा करते-करते अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
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