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धान के दाम बढ़े, पैदावार घटी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 03 Nov 2016 12:02 AM IST
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धान।
- फोटो : अमर उजाला
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जनपद में इस बार धान की कीमत तो बढ़ी, मगर पैदावार कम हुई। जिस कारण मंडी में धान की आवक भी कम हो रही है। किसानों का कहना है कि धान में अचानक जीवाणु झुलसा रोग लगने से पैदावार आधी रह गई है। रामराज की धान मंडी में भी धान की आवक बेहद कम है।
सरकार ने इस बार धान का सरकारी मूल्य 1470 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया है, जो गत वर्ष से 60 रुपये अधिक है। मुजफ्फरनगर की धान मंडी में धान की आवक जारी है। मगर गत वर्ष के मुकाबले आवक आधी ही है। मंडी के 18 व्यापारियों के यहां रोजाना करीब 600 कुंतल धान की आवक हो रही है, जो गत वर्ष करीब 1500 कुंतल प्रतिदिन थी। मुजफ्फरनगर मंडी धान की कीमत प्रजाति के हिसाब से 1400 से लेकर 2150 रुपये तक है।
धान कारोबारी संजय कुमार के बताया कि देशी धान और सुगंधा धान की कीमत 1400 से लेकर 1700 रुपये तक है, जबकि बासमती धान 11-21 और पूसा-1 की कीमत 2150 रुपये प्रति कुंतल तक है। मंडी में धान लेकर आए संधावली के किसान मोहसिन ने बताया कि इस बार पैदावार काफी कम हुई है, गत वर्ष 12 बीघा में करीब 42 कुंतल धान हुई थी, जो इस बार घट कर मात्र 21 कुंतल ही रह गई है। जब धान पकने को हुई तो तभी रोग लग गया, जिस कारण पैदावार कम हुई।
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खाद्यान्न व्यापार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुच्छल का कहना है कि इस बार धान का कारोबार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। गत वर्ष के मुकाबले दाम अधिक है, मगर पैदावार कम होने से मंडी में आवक आधी रह गई है। गत वर्ष प्रति बीघा 3.5 से लेकर 4 कुंतल पैदावार हुई थी, जब इस बार 1.5 से 2 कुंतल प्रति बीघा रह गई है। धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। एक कुंतल धान से सही चावल 50 प्रतिशत ही निकलता है। क्षेत्रीय किसान विक्की चांदपुर, राकेश, धर्मेंद्र सिसौना, मनीष मलीरा, डॉ देवकुमार त्यागी बड़कली का कहना है कि धान में जीवाणु झुलसा रोग लगने से पैदावार आधी रह गई है।
उधर, रामराज की धान मंडी में भी धान की आवक आधी रह गई है। क्षेत्र के बड़े धान कारोबारी आजाद बंसल ने बताया कि रामराज मंडी में धान कम आ रहा है, दाम अधिक है। गत वर्ष के मुकाबले 1700 वाला धान पूसा 1 इस बार 2200 रुपये, 1800 वाला 11-21, 2250 रुपये, 1500 वाला शर्बती 2000 रुपये में बिक रहा है। मुकीमपुर के किसान जसवीर सिंह मान, ओमप्रकाश, जसपाल शाहपुर, ह्दयलाल लालपुर रहड़वा, राकेश कुमार तारापुर, पुष्पेंद्र कुमार रठौर का कहना है कि इस वर्ष धान में रोग लगने से पैदावार आधी रह गई है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर भी आवक कम
- जिले में मुजफ्फरनगर, खतौली, जानसठ, पुरकाजी, मोरना, चरथावल, शाहपुर, बुढ़ाना में क्रय केंद्र खोले गए हैं। एक अक्तूबर से 31 जनवरी तक केंद्र संचालित होंगे। अभी तक इन क्रय केंद्रों पर बासमती धान की केवल छह हजार कुंतल आवक हुई है, जो काफी कम है। पूरे सीजन में खरीद का लक्ष्य चालीस हजार कुंतल है। इस बार पैदावार कम होने से बाजार में धान की तेजी है, जिस कारण सरकारी क्रय केंद्र पर कम धान आ रहा है। इन क्रय केंद्रों पर अभी तक देशी धान की आवक नहीं हुई है।
-प्रदीप कुमार अग्रवाल (डिप्टी आरएमओ)
रकबा नहीं घटा, रोग से पैदावार घटी
- जनपद में गत वर्ष 13 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की पैदावार हुई थी, जो इस बार भी लगभग उतनी ही थी। शुरू में धान की बढ़त अच्छी रही, मगर चावल बनने के दौरान अचानक जीवाणु झुलसा रोग (वैक्टीरियल ब्राइट) लगने से पैदावार प्रभावित हुई है। जिले भर में धान की क्राप कटिंग कराई है, जिसका रिजल्ट जल्द आ जाएगा, जिससे पता चल जाएगा कि जिले में इस बार कितने धान की पैदावार होगी।
- रामजतन मिश्रा (जिला कृषि अधिकारी)
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सरकार ने इस बार धान का सरकारी मूल्य 1470 रुपये प्रति कुंतल घोषित किया है, जो गत वर्ष से 60 रुपये अधिक है। मुजफ्फरनगर की धान मंडी में धान की आवक जारी है। मगर गत वर्ष के मुकाबले आवक आधी ही है। मंडी के 18 व्यापारियों के यहां रोजाना करीब 600 कुंतल धान की आवक हो रही है, जो गत वर्ष करीब 1500 कुंतल प्रतिदिन थी। मुजफ्फरनगर मंडी धान की कीमत प्रजाति के हिसाब से 1400 से लेकर 2150 रुपये तक है।
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धान कारोबारी संजय कुमार के बताया कि देशी धान और सुगंधा धान की कीमत 1400 से लेकर 1700 रुपये तक है, जबकि बासमती धान 11-21 और पूसा-1 की कीमत 2150 रुपये प्रति कुंतल तक है। मंडी में धान लेकर आए संधावली के किसान मोहसिन ने बताया कि इस बार पैदावार काफी कम हुई है, गत वर्ष 12 बीघा में करीब 42 कुंतल धान हुई थी, जो इस बार घट कर मात्र 21 कुंतल ही रह गई है। जब धान पकने को हुई तो तभी रोग लग गया, जिस कारण पैदावार कम हुई।
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खाद्यान्न व्यापार संघ के अध्यक्ष जितेंद्र कुच्छल का कहना है कि इस बार धान का कारोबार घाटे का सौदा साबित हो रहा है। गत वर्ष के मुकाबले दाम अधिक है, मगर पैदावार कम होने से मंडी में आवक आधी रह गई है। गत वर्ष प्रति बीघा 3.5 से लेकर 4 कुंतल पैदावार हुई थी, जब इस बार 1.5 से 2 कुंतल प्रति बीघा रह गई है। धान की गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। एक कुंतल धान से सही चावल 50 प्रतिशत ही निकलता है। क्षेत्रीय किसान विक्की चांदपुर, राकेश, धर्मेंद्र सिसौना, मनीष मलीरा, डॉ देवकुमार त्यागी बड़कली का कहना है कि धान में जीवाणु झुलसा रोग लगने से पैदावार आधी रह गई है।
उधर, रामराज की धान मंडी में भी धान की आवक आधी रह गई है। क्षेत्र के बड़े धान कारोबारी आजाद बंसल ने बताया कि रामराज मंडी में धान कम आ रहा है, दाम अधिक है। गत वर्ष के मुकाबले 1700 वाला धान पूसा 1 इस बार 2200 रुपये, 1800 वाला 11-21, 2250 रुपये, 1500 वाला शर्बती 2000 रुपये में बिक रहा है। मुकीमपुर के किसान जसवीर सिंह मान, ओमप्रकाश, जसपाल शाहपुर, ह्दयलाल लालपुर रहड़वा, राकेश कुमार तारापुर, पुष्पेंद्र कुमार रठौर का कहना है कि इस वर्ष धान में रोग लगने से पैदावार आधी रह गई है।
सरकारी क्रय केंद्रों पर भी आवक कम
- जिले में मुजफ्फरनगर, खतौली, जानसठ, पुरकाजी, मोरना, चरथावल, शाहपुर, बुढ़ाना में क्रय केंद्र खोले गए हैं। एक अक्तूबर से 31 जनवरी तक केंद्र संचालित होंगे। अभी तक इन क्रय केंद्रों पर बासमती धान की केवल छह हजार कुंतल आवक हुई है, जो काफी कम है। पूरे सीजन में खरीद का लक्ष्य चालीस हजार कुंतल है। इस बार पैदावार कम होने से बाजार में धान की तेजी है, जिस कारण सरकारी क्रय केंद्र पर कम धान आ रहा है। इन क्रय केंद्रों पर अभी तक देशी धान की आवक नहीं हुई है।
-प्रदीप कुमार अग्रवाल (डिप्टी आरएमओ)
रकबा नहीं घटा, रोग से पैदावार घटी
- जनपद में गत वर्ष 13 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की पैदावार हुई थी, जो इस बार भी लगभग उतनी ही थी। शुरू में धान की बढ़त अच्छी रही, मगर चावल बनने के दौरान अचानक जीवाणु झुलसा रोग (वैक्टीरियल ब्राइट) लगने से पैदावार प्रभावित हुई है। जिले भर में धान की क्राप कटिंग कराई है, जिसका रिजल्ट जल्द आ जाएगा, जिससे पता चल जाएगा कि जिले में इस बार कितने धान की पैदावार होगी।
- रामजतन मिश्रा (जिला कृषि अधिकारी)