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शुकतीर्थ से रेस्क्यू दस बच्चे त्रिपुरा, मिजोरम रवाना
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मुजफ्फरनगर। दस माह तक बाल कल्याण समिति की देखरेख में रहे मिजोरम और त्रिपुरा के दस बच्चों को पुलिस सुरक्षा में उनके घर के लिए रवाना कर दिया गया है। जिला प्रशासन अपने खर्च पर इन बच्चों को उनके घर पहुंचा रहा है।
जुलाई माह 2020 में चाइल्ड लाईन को मिली सूचना के बाद शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से दस बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इनमें चार बालक त्रिपुरा और छह मिजोरम के थे जो यहां शिक्षा के लिए आए थे। बच्चों ने मठ संचालक पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, मेडिकल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई थी। संचालक को हाल ही इस प्रकरण में हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी मुशफेकीन ने बताया कि शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से मुक्त कराए गए सभी दस बच्चे अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं। गौड़ीय मठ संचालक और उसके शिष्य पर बच्चों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में चार बच्चों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई थी। न्यायालय में बच्चों के बयान हो चुके हैं। ये बच्चे तभी से बाल कल्याण समिति की देखरेख में थे।
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न्यायिक प्रक्रिया में अब बच्चों की आवश्यकता नहीं है। गौड़ीय मठ संचालक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कुछ समय पूर्व ही जमानत मिली है। प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि सरकारी खर्च पर सभी दस बच्चों को उनके घर पहुंचाने के आदेश बाल कल्याण समिति ने किये थे। इनमें चार बच्चे नॉर्थ त्रिपुरा और छह मिजोरम के हैं। एक ट्रेवलर बस से पुलिस की सुरक्षा में इन बच्चों को भेजा गया है।
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जुलाई माह 2020 में चाइल्ड लाईन को मिली सूचना के बाद शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से दस बच्चों को रेस्क्यू किया गया था। इनमें चार बालक त्रिपुरा और छह मिजोरम के थे जो यहां शिक्षा के लिए आए थे। बच्चों ने मठ संचालक पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, मेडिकल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई थी। संचालक को हाल ही इस प्रकरण में हाईकोर्ट से जमानत मिली है।
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जिला प्रोबेशन अधिकारी मुशफेकीन ने बताया कि शुकतीर्थ के गौड़ीय मठ से मुक्त कराए गए सभी दस बच्चे अपने घर के लिए रवाना हो गए हैं। गौड़ीय मठ संचालक और उसके शिष्य पर बच्चों ने यौन शोषण का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था। मेडिकल रिपोर्ट में चार बच्चों के साथ यौन शोषण की पुष्टि हुई थी। न्यायालय में बच्चों के बयान हो चुके हैं। ये बच्चे तभी से बाल कल्याण समिति की देखरेख में थे।
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न्यायिक प्रक्रिया में अब बच्चों की आवश्यकता नहीं है। गौड़ीय मठ संचालक को इलाहाबाद हाईकोर्ट से कुछ समय पूर्व ही जमानत मिली है। प्रोबेशन अधिकारी ने बताया कि सरकारी खर्च पर सभी दस बच्चों को उनके घर पहुंचाने के आदेश बाल कल्याण समिति ने किये थे। इनमें चार बच्चे नॉर्थ त्रिपुरा और छह मिजोरम के हैं। एक ट्रेवलर बस से पुलिस की सुरक्षा में इन बच्चों को भेजा गया है।