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250 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करा विभाग ने इतिश्री की
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मुजफ्फरनगर। सिंचाई विभाग ने जड़ौदा रजबहे की जमीन पर कब्जा कर उस पर मकान आदि का निर्माण करने वाले लगभग 250 लोगों के खिलाफ नई मंडी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट दर्ज करा विभाग ने अपने कार्य की इतिश्री कर ली। इसके बाद से आज तक न तो विभाग ने ही कुछ किया और न पुलिस ने कोई कार्रवाई की। जो जमीन बची थी उस पर भी कब्जा हो रहा है।
जड़ौदा रजबहे पर बीते 35 साल से लोग लगातार कब्जा करते आ रहे हैं। चार साल पहले विभाग की आंख तब खुली, जब विश्वकर्मा चौक से लेकर एटूजेड तक पूरे रजबहे पर लोगों ने कब्जा कर लिया। अफसरों ने अपने ऊपर कार्रवाई से बचने के लिए रजबहे की जमीन पर कब्जा करने वाले लगभग 250 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। नईमंडी थाने में मुकदमा हुआ। चार साल बीत गए आज तक न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही विभाग की ओर से कोई पैरवी की गई। पैरवी करने वाले जिलेदार राजेश शर्मा प्रकरण में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। एक्सईएन हरि शर्मा तो सिंचाई विभाग की इस कीमती जमीन को लेकर कतई गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि जब रजबहे में पानी बंद हो गया है तो जमीन हमारे किसी काम की नहीं रही। अब जमीन कहीं तो जाएगी ही। आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें यह भी मालूम नहीं है कि रजबहे की भूमि पर शीशम के कीमती पेड़ खड़े हैं। जमीन को बचाने की पैरवी को लेकर विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर मामले को टालने में लगे हैं।
जमीन को बचाने का प्लान नहीं
मुजफ्फरनगर। जड़ौदा रजबहे की बची जमीन को बचाने और नरा माइनर की जमीन को सुरक्षित करने का विभाग का कोई प्लान नहीं है। लगभग 25 प्रतिशत जमीन अभी भी बाकी बची है। विभागीय अधिकारी इस मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं है।
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जड़ौदा रजबहे पर बीते 35 साल से लोग लगातार कब्जा करते आ रहे हैं। चार साल पहले विभाग की आंख तब खुली, जब विश्वकर्मा चौक से लेकर एटूजेड तक पूरे रजबहे पर लोगों ने कब्जा कर लिया। अफसरों ने अपने ऊपर कार्रवाई से बचने के लिए रजबहे की जमीन पर कब्जा करने वाले लगभग 250 लोगों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी। नईमंडी थाने में मुकदमा हुआ। चार साल बीत गए आज तक न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही विभाग की ओर से कोई पैरवी की गई। पैरवी करने वाले जिलेदार राजेश शर्मा प्रकरण में कुछ भी बताने को तैयार नहीं है। एक्सईएन हरि शर्मा तो सिंचाई विभाग की इस कीमती जमीन को लेकर कतई गंभीर नहीं है। उनका कहना है कि जब रजबहे में पानी बंद हो गया है तो जमीन हमारे किसी काम की नहीं रही। अब जमीन कहीं तो जाएगी ही। आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें यह भी मालूम नहीं है कि रजबहे की भूमि पर शीशम के कीमती पेड़ खड़े हैं। जमीन को बचाने की पैरवी को लेकर विभाग के अधिकारी एक-दूसरे पर मामले को टालने में लगे हैं।
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जमीन को बचाने का प्लान नहीं
मुजफ्फरनगर। जड़ौदा रजबहे की बची जमीन को बचाने और नरा माइनर की जमीन को सुरक्षित करने का विभाग का कोई प्लान नहीं है। लगभग 25 प्रतिशत जमीन अभी भी बाकी बची है। विभागीय अधिकारी इस मामले को लेकर कतई गंभीर नहीं है।
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