{"_id":"6186cf5ab2d67d430f40d3b6","slug":"relief-sure-but-the-goal-of-saving-children-is-far-away-muzaffarnagar-news-mrt563774923","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहत जरूर, लेकिन बच्चों को बचाने का लक्ष्य दूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहत जरूर, लेकिन बच्चों को बचाने का लक्ष्य दूर
विज्ञापन
राहत जरूर, लेकिन बच्चों को बचाने का लक्ष्य दूर
मुजफ्फरनगर। शिशु मृत्य दर में सुधार के लिए निर्धारित लक्ष्य से स्वास्थ्य विभाग दूर है। हालांकि पिछले साल के सापेक्ष सुधार हुआ है। कोरोना काल ने विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। संभावित तीसरी लहर से बच्चों को खतरा भी सता रहा है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य शिशु मृत्यु दर को कम से कम करना है।
प्रत्येक वर्ष सात नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए लगाए जाने वाले टीकों का सुरक्षा चक्र भी कहीं न कहीं प्रभावित हुआ है। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विभाग टीकाकरण के अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। जिले में वर्तमान में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार बच्चों पर 51 है। सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि पिछले दो सालों में शिशु मृत्यु दर 60 पर थी, लेकिन इस बार सुधार हुआ है। वर्तमान में सुधार के चलते यह आंकड़ा 51 पर पहुंच गया है।
तीन महीने बाधित रहा टीकाकरण
कोरोना संक्रमण के कारण टीकाकरण अप्रैल से लेकर जून तक बाधित रहा। लोग घरों से नहीं निकले, जिस कारण एक साल तक के बच्चों का टीकाकरण चक्र टूट गया था। हालांकि इसके बाद जुलाई माह से नियमित टीकाकरण शुरू कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
संस्थागत प्रसव को दे रहे बढ़ावा
शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि संस्थागत प्रसव से बच्चे और उनकी माता सुरक्षित रहती हैं। लोगों को जागरूकता दिखाते हुए घर पर प्रसव के बजाए संस्थागत प्रसव कराने चाहिए।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। शिशु मृत्य दर में सुधार के लिए निर्धारित लक्ष्य से स्वास्थ्य विभाग दूर है। हालांकि पिछले साल के सापेक्ष सुधार हुआ है। कोरोना काल ने विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। संभावित तीसरी लहर से बच्चों को खतरा भी सता रहा है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य शिशु मृत्यु दर को कम से कम करना है।
प्रत्येक वर्ष सात नवंबर को शिशु सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। कोरोना काल में बच्चों को बीमारियों से बचाव के लिए लगाए जाने वाले टीकों का सुरक्षा चक्र भी कहीं न कहीं प्रभावित हुआ है। शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए विभाग टीकाकरण के अलावा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने का प्रयास करता है। जिले में वर्तमान में शिशु मृत्यु दर प्रति हजार बच्चों पर 51 है। सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि पिछले दो सालों में शिशु मृत्यु दर 60 पर थी, लेकिन इस बार सुधार हुआ है। वर्तमान में सुधार के चलते यह आंकड़ा 51 पर पहुंच गया है।
विज्ञापन
तीन महीने बाधित रहा टीकाकरण
कोरोना संक्रमण के कारण टीकाकरण अप्रैल से लेकर जून तक बाधित रहा। लोग घरों से नहीं निकले, जिस कारण एक साल तक के बच्चों का टीकाकरण चक्र टूट गया था। हालांकि इसके बाद जुलाई माह से नियमित टीकाकरण शुरू कर दिए गए हैं।
विज्ञापन
संस्थागत प्रसव को दे रहे बढ़ावा
शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहे हैं। सीएमओ डॉ. एमएस फौजदार का कहना है कि संस्थागत प्रसव से बच्चे और उनकी माता सुरक्षित रहती हैं। लोगों को जागरूकता दिखाते हुए घर पर प्रसव के बजाए संस्थागत प्रसव कराने चाहिए।