{"_id":"599f2a914f1c1b96528b4908","slug":"ram-prakash-s-funeral","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामप्रकाश को नहीं मिल पाया अपनों का कंधा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामप्रकाश को नहीं मिल पाया अपनों का कंधा
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:05 AM IST
विज्ञापन
श्मशान में होता रामप्रकाश का अंतिम संस्कार।
- फोटो : अमर उजाला
कलिंग उत्कल एक्सप्रेस हादसे में मरे रामप्रकाश को अपनों का कंधा नसीब नहीं हो सका। 72 घंटे बीतने के बाद भी उसकी तलाश में कोई नहीं पहुंचा। जीआरपी ने उसका लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया। उसके हाथ पर रामप्रकाश लिखा हुआ था। उसी के आधार पर उसका नाम रामप्रकाश माना जा रहा है।
खतौली में शनिवार को हादसे का शिकार हुई कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में 23 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इस ट्रैक पर 25 साल में दूसरी बार ट्रेन हादसा हुआ। इस बार हादसा इतना भयावह था कि पलभर में 23 यात्री अपनों से जुदा हो गए, जबकि सैकड़ों जख्मी हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। भयावहता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि रेलवे को ट्रैक से मलबा हटाने में 31 घंटे का समय लग गया।
हादसे में 23 लोगों की मौत प्रशासन ने रिकार्ड में दर्ज की है, जिनमें से 22 लोगों की पहचान हो चुकी है, जिनके शवों को परिजनों ने खुद अंतिम संस्कार किया। एक व्यक्ति अज्ञात में दर्ज है, जिसकी पहचान के लिए प्रशासन ने 72 घंटे का समय रखा था। मेडिकल कॉलेज में रखे गए इस शव का समय बीतने के बाद भी कोई वारिस नहीं पहुंच सका। उसके के दाहिने हाथ पर रामप्रकाश गुदा हुआ था, उसकी वेशभूषा साधुओं की है।
विज्ञापन
डीएम के निर्देश पर बृहस्पतिवार को जीआरपी ने उसका अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया। अब सवाल है कि इसे किस्मत कहें या क्रूर सिस्टम, एक जिंदगी अपनों से दूर होकर गुमनामी के साथ दुनिया से विदा हो गई। अंतिम क्षणों में अपनों का कंधा तक नहीं मिल सका। भोपा रोड पर एक ट्रस्ट के सहयोग से जीआरपी ने शव का अंतिम संस्कार किया है। जीआरपी एसओ किशन अवतार ने बताया कि शव की पहचान कराने के लिए अथक प्रयास किए गए, लेकिन समय पूरा होने के बाद कोई भी वारिस नहीं आ सका, जिसके चलते अज्ञात में शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
साधु की तरह दिखता था
मुजफ्फरनगर। जीआरपी एसओ के अनुसार मृतक व्यक्ति की उम्र 50 साल से अधिक है। उसकी वेशभूषा और हुलिया साधु की तरह लगता है। दाहिने हाथ पर रामप्रकाश नाम गुदा हुआ है। इसी के आधार पर उसे हिंदू धर्म से माना गया। हिंदू धर्म के अनुसार ही उसकी अंतिम क्रिया कराई गई। मृतक के कपड़ों आदि को जीआरपी ने सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा है। हालांकि जांच-पड़ताल में मृतक के पास कोई टिकट या अन्य वस्तु बरामद नहीं हो सकी है। नतीजतन उसकी पहचान कराने में जीआरपी और प्रशासन को मुश्किल हुई।
विज्ञापन
खतौली में शनिवार को हादसे का शिकार हुई कलिंग-उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन में 23 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है। इस ट्रैक पर 25 साल में दूसरी बार ट्रेन हादसा हुआ। इस बार हादसा इतना भयावह था कि पलभर में 23 यात्री अपनों से जुदा हो गए, जबकि सैकड़ों जख्मी हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। भयावहता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि रेलवे को ट्रैक से मलबा हटाने में 31 घंटे का समय लग गया।
विज्ञापन
हादसे में 23 लोगों की मौत प्रशासन ने रिकार्ड में दर्ज की है, जिनमें से 22 लोगों की पहचान हो चुकी है, जिनके शवों को परिजनों ने खुद अंतिम संस्कार किया। एक व्यक्ति अज्ञात में दर्ज है, जिसकी पहचान के लिए प्रशासन ने 72 घंटे का समय रखा था। मेडिकल कॉलेज में रखे गए इस शव का समय बीतने के बाद भी कोई वारिस नहीं पहुंच सका। उसके के दाहिने हाथ पर रामप्रकाश गुदा हुआ था, उसकी वेशभूषा साधुओं की है।
विज्ञापन
डीएम के निर्देश पर बृहस्पतिवार को जीआरपी ने उसका अज्ञात में अंतिम संस्कार कर दिया। अब सवाल है कि इसे किस्मत कहें या क्रूर सिस्टम, एक जिंदगी अपनों से दूर होकर गुमनामी के साथ दुनिया से विदा हो गई। अंतिम क्षणों में अपनों का कंधा तक नहीं मिल सका। भोपा रोड पर एक ट्रस्ट के सहयोग से जीआरपी ने शव का अंतिम संस्कार किया है। जीआरपी एसओ किशन अवतार ने बताया कि शव की पहचान कराने के लिए अथक प्रयास किए गए, लेकिन समय पूरा होने के बाद कोई भी वारिस नहीं आ सका, जिसके चलते अज्ञात में शव का अंतिम संस्कार करना पड़ा।
साधु की तरह दिखता था
मुजफ्फरनगर। जीआरपी एसओ के अनुसार मृतक व्यक्ति की उम्र 50 साल से अधिक है। उसकी वेशभूषा और हुलिया साधु की तरह लगता है। दाहिने हाथ पर रामप्रकाश नाम गुदा हुआ है। इसी के आधार पर उसे हिंदू धर्म से माना गया। हिंदू धर्म के अनुसार ही उसकी अंतिम क्रिया कराई गई। मृतक के कपड़ों आदि को जीआरपी ने सबूत के तौर पर सुरक्षित रखा है। हालांकि जांच-पड़ताल में मृतक के पास कोई टिकट या अन्य वस्तु बरामद नहीं हो सकी है। नतीजतन उसकी पहचान कराने में जीआरपी और प्रशासन को मुश्किल हुई।