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सुबह के समय झमाझम बारिश, दोपहर में उमस से लोग हुए पसीने-पसीने
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 02 Jul 2018 12:26 AM IST
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शहर के शिवचौक पर बारिश के बाद हुआ जलभराव।
- फोटो : अमर उजाला
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रविवार सुबह हुई तेज बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है। दिन में धूप के साथ बादल भी छाए रहे। उमसभरी गर्मी से लोग दिनभर परेशान रहे। बादल छाए रहने से बारिश का मौसम बना रहा। लगातार चार दिन से 24 घंटे में एक बार हो रही बारिश से ऐसा लगता है कि मानसून ने दस्तक दे दी है।
पिछले एक पखवाडे़ से भीषण गर्मी के कारण लोगों को मानसूनी राहत का इंतजार बना हुआ है, लेकिन हवा का रुख बादलों को ठहरने और जमकर बरसने नहीं दे रहा है। मानसून तो आ गया है, लेकिन हवाओं के रुख में लगातार आ रहे बदलाव से वह सक्रिय नहीं हो पा रहा है। नतीजतन बादल ठहर नहीं पा रहे हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और कभी भी बादल ठहरकर झमाझम बरस सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून आने के साथ ही बादल ठहरकर बरसने के लिए हवा का स्थिर होना भी जरूरी है, लेकिन उत्तराखंड से सटे उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में हवाओं का रुख लगातार बदल रहा है।
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कभी पश्चिम तो कभी पूरब। कई बार तो हर घंटे में ही हवाओं का रुख बदल जा रहा है। ऐसे में कहीं-कहीं तो बारिश हो रही है और कहीं बादल उमड़-घुमड़कर निकल जा रहे हैं। बीते चार दिन से बादलों के आने और रुक-रुकर बरसने की प्रक्रिया जारी है। सुबह के समय तेज बारिश ने जहां कुछ देर के लिए लोगों को राहत दी।
वहीं, दोपहर होते ही उमस ने लोगों को पसीने से तरबतर कर दिया। बारिश के कारण गली मोहल्लों और बाजारों में गंदगी और सिल्ट के कारण आवागमन भी प्रभावित नजर आया। कई स्थानों पर जलभराव देखने को मिला। शहर में कई स्थानों पर जल निगम के द्वारा डाली जा रही सीवर लाइन के कारण सड़क खुदाई बारिश के बाद लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई।
कीचड़ और जलभराव से मुख्य मार्ग भी प्रभावित रहा। नावल्टी चौराहे से अस्पताल चौराहे तक और अस्पताल से घास मंडी से निकलना दूभर बना रहा। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे। बारिश का मौसम बना रहा, लेकिन बारिश नहीं हुई।
नुमाइश में चौतरफा पानी
मुजफ्फरनगर। वर्षा से नुमाइश में चौतरफा पानी ही पानी नजर आया। जिला प्रशासन ने मशीनों से पानी को खींचने का काम किया। आकाश में बादल छाए रहने से दुकानदारों में डर बना रहा। नुमाइश अभी तीन जुलाई तक चलनी है।
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पिछले एक पखवाडे़ से भीषण गर्मी के कारण लोगों को मानसूनी राहत का इंतजार बना हुआ है, लेकिन हवा का रुख बादलों को ठहरने और जमकर बरसने नहीं दे रहा है। मानसून तो आ गया है, लेकिन हवाओं के रुख में लगातार आ रहे बदलाव से वह सक्रिय नहीं हो पा रहा है। नतीजतन बादल ठहर नहीं पा रहे हैं।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सामान्य प्रक्रिया है और कभी भी बादल ठहरकर झमाझम बरस सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून आने के साथ ही बादल ठहरकर बरसने के लिए हवा का स्थिर होना भी जरूरी है, लेकिन उत्तराखंड से सटे उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में हवाओं का रुख लगातार बदल रहा है।
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कभी पश्चिम तो कभी पूरब। कई बार तो हर घंटे में ही हवाओं का रुख बदल जा रहा है। ऐसे में कहीं-कहीं तो बारिश हो रही है और कहीं बादल उमड़-घुमड़कर निकल जा रहे हैं। बीते चार दिन से बादलों के आने और रुक-रुकर बरसने की प्रक्रिया जारी है। सुबह के समय तेज बारिश ने जहां कुछ देर के लिए लोगों को राहत दी।
वहीं, दोपहर होते ही उमस ने लोगों को पसीने से तरबतर कर दिया। बारिश के कारण गली मोहल्लों और बाजारों में गंदगी और सिल्ट के कारण आवागमन भी प्रभावित नजर आया। कई स्थानों पर जलभराव देखने को मिला। शहर में कई स्थानों पर जल निगम के द्वारा डाली जा रही सीवर लाइन के कारण सड़क खुदाई बारिश के बाद लोगों के लिए जी का जंजाल बन गई।
कीचड़ और जलभराव से मुख्य मार्ग भी प्रभावित रहा। नावल्टी चौराहे से अस्पताल चौराहे तक और अस्पताल से घास मंडी से निकलना दूभर बना रहा। दिनभर आकाश में बादल छाए रहे। बारिश का मौसम बना रहा, लेकिन बारिश नहीं हुई।
नुमाइश में चौतरफा पानी
मुजफ्फरनगर। वर्षा से नुमाइश में चौतरफा पानी ही पानी नजर आया। जिला प्रशासन ने मशीनों से पानी को खींचने का काम किया। आकाश में बादल छाए रहने से दुकानदारों में डर बना रहा। नुमाइश अभी तीन जुलाई तक चलनी है।