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खतौली पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
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खतौली पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
मुजफ्फरनगर। दहेज उत्पीड़न के मामलों में खतौली पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। अधिवक्ता ओमकार सिंह की आत्महत्या से पहले 11 मई 2020 में मेरठ एसएसपी दफ्तर में तैनात पुलिसकर्मी ने भी आत्महत्या की थी। पुलिसकर्मी ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाकर खतौली पुलिस पर उत्पीड़न करने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे।
मेरठ के गंगानगर थाना क्षेत्र के ईशानगर निवासी अधिवक्ता ओमकार सिंह ने तीन दिन पूर्व आत्महत्या कर ली थी। अधिवक्ता व उनके परिजनों के खिलाफ आठ जनवरी 2021 को खतौली कोतवाली में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ था, जो खतौली के मोहल्ला पार्श्वनाथ निवासी उनकी पुत्रवधू स्वाति के पिता राजकुुमार ने दर्ज कराया था। इस मुकदमे में घटना करीब ढाई माह पुरानी दिखाई गई थी। गत 11 फरवरी को भी राजकुमार द्वारा ओमकार सिंह के बेटे लवकुमार समेत दो के खिलाफ मारपीट व तेजाब फेंकने के प्रयास के आरोप में तहरीर दी गई थी। अधिवक्ता की आत्महत्या के पीछे खतौली कोतवाली में दर्ज यह मुकदमा ही बड़ी वजह माना जा रहा है। अधिवक्ता की आत्महत्या के बाद चर्चाओं में रही खतौली कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली इससे पहले भी सवालों के घेरे में आ चुकी है। पिछले वर्ष 11 मई को मेरठ में एसएसपी दफ्तर में कार्यरत पुलिसकर्मी विजय गौड़ ने अपने आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। विजय गौड़ ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ खतौली में ससुराल पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के मामले में किए जा रहे उत्पीड़न को वजह बताया था। विजय गौड़ ने तत्कालीन थाना प्रभारी पर थाने में बुलाकर धमकाने के भी गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला वर्तमान में विभागीय जांच के दायरे में है, लेकिन खतौली कोतवाली पुलिस ने इस मामले से कोई सबक नहीं लिया। नतीजतन अब अधिवक्ता आत्महत्या कांड में एक बार फिर खतौली पुलिस सवालों के घेरे में है।
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मुजफ्फरनगर। दहेज उत्पीड़न के मामलों में खतौली पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। अधिवक्ता ओमकार सिंह की आत्महत्या से पहले 11 मई 2020 में मेरठ एसएसपी दफ्तर में तैनात पुलिसकर्मी ने भी आत्महत्या की थी। पुलिसकर्मी ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाकर खतौली पुलिस पर उत्पीड़न करने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे।
मेरठ के गंगानगर थाना क्षेत्र के ईशानगर निवासी अधिवक्ता ओमकार सिंह ने तीन दिन पूर्व आत्महत्या कर ली थी। अधिवक्ता व उनके परिजनों के खिलाफ आठ जनवरी 2021 को खतौली कोतवाली में दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज हुआ था, जो खतौली के मोहल्ला पार्श्वनाथ निवासी उनकी पुत्रवधू स्वाति के पिता राजकुुमार ने दर्ज कराया था। इस मुकदमे में घटना करीब ढाई माह पुरानी दिखाई गई थी। गत 11 फरवरी को भी राजकुमार द्वारा ओमकार सिंह के बेटे लवकुमार समेत दो के खिलाफ मारपीट व तेजाब फेंकने के प्रयास के आरोप में तहरीर दी गई थी। अधिवक्ता की आत्महत्या के पीछे खतौली कोतवाली में दर्ज यह मुकदमा ही बड़ी वजह माना जा रहा है। अधिवक्ता की आत्महत्या के बाद चर्चाओं में रही खतौली कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली इससे पहले भी सवालों के घेरे में आ चुकी है। पिछले वर्ष 11 मई को मेरठ में एसएसपी दफ्तर में कार्यरत पुलिसकर्मी विजय गौड़ ने अपने आवास में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। विजय गौड़ ने आत्महत्या से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसमें उसने अपने खिलाफ खतौली में ससुराल पक्ष द्वारा दर्ज कराए गए दहेज उत्पीड़न के मामले में किए जा रहे उत्पीड़न को वजह बताया था। विजय गौड़ ने तत्कालीन थाना प्रभारी पर थाने में बुलाकर धमकाने के भी गंभीर आरोप लगाए थे। यह मामला वर्तमान में विभागीय जांच के दायरे में है, लेकिन खतौली कोतवाली पुलिस ने इस मामले से कोई सबक नहीं लिया। नतीजतन अब अधिवक्ता आत्महत्या कांड में एक बार फिर खतौली पुलिस सवालों के घेरे में है।
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