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Muzaffarnagar News: चरथावल के ऐतिहासिक घाट मेले के लिए तैयारी पूरी
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मुख्य आकर्षण रहता है दंगल, कई प्रांतों से पहुंचते हैं पहलवान
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। कस्बे में सौहार्द के प्रतीक ऐतिहासिक घाट मेले की तैयारी पूरी हो गई है। मेला परिसर में दर्जनों रंग बिरंगे झूले और मिनी सर्कस सज गए है। निवर्तमान चेयरमैन सतेंद्र त्यागी ने बताया आठ मार्च को मेले का मुख्य आकर्षण दंगल रहेगा। इसमें कई प्रांतों के पहलवान दमखम दिखाएंगे।
फाग खेलने के बाद परस्पर गिले शिकवे भूलाने के कस्बे में घाट का मेला लगता है। आठ मार्च से शुरू होकर तीन दिन तक मेला सजता है। तीरग्रान मोहल्ले के एक छोर और मुर्दापट्टी करबला आदि तक विराट रूप में मेला लगता है। चरथावल के अलावा मुस्लिम बहुल गांव कुटेसरा, दधेडू कलां, दधेडू खुर्द, चौकड़ा, पावटी, चौकड़ा, कुल्हेड़ी, निरधना, खुसरोपुर आदि गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है।
खासकर मुस्लिमों में हर परिवारों में मेहमानों का जमावड़ा लग जाता है। दूरदराज से लोग मेले में झूलों और सर्कस का आनंद लेने पहुंचते है। पुलिस ने मेला प्रांगण में एक कैंप बनाया है। मेले में दंगल में प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड से पहलवान जोर आजमाइश करने आते है। शौकीनों को मेले में दंगल देखने का चाव रहता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। कस्बे में सौहार्द के प्रतीक ऐतिहासिक घाट मेले की तैयारी पूरी हो गई है। मेला परिसर में दर्जनों रंग बिरंगे झूले और मिनी सर्कस सज गए है। निवर्तमान चेयरमैन सतेंद्र त्यागी ने बताया आठ मार्च को मेले का मुख्य आकर्षण दंगल रहेगा। इसमें कई प्रांतों के पहलवान दमखम दिखाएंगे।
फाग खेलने के बाद परस्पर गिले शिकवे भूलाने के कस्बे में घाट का मेला लगता है। आठ मार्च से शुरू होकर तीन दिन तक मेला सजता है। तीरग्रान मोहल्ले के एक छोर और मुर्दापट्टी करबला आदि तक विराट रूप में मेला लगता है। चरथावल के अलावा मुस्लिम बहुल गांव कुटेसरा, दधेडू कलां, दधेडू खुर्द, चौकड़ा, पावटी, चौकड़ा, कुल्हेड़ी, निरधना, खुसरोपुर आदि गांवों से भारी भीड़ उमड़ती है।
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खासकर मुस्लिमों में हर परिवारों में मेहमानों का जमावड़ा लग जाता है। दूरदराज से लोग मेले में झूलों और सर्कस का आनंद लेने पहुंचते है। पुलिस ने मेला प्रांगण में एक कैंप बनाया है। मेले में दंगल में प्रदेश के अलावा दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड से पहलवान जोर आजमाइश करने आते है। शौकीनों को मेले में दंगल देखने का चाव रहता है।
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