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बेटे का सेहरा सजाने में लगी थी मां धनवती 

Thu, 21 Jul 2016 12:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 21 Jul 2016 12:28 AM IST
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Preparation was getting married
बेटे की शहादत को नमन करते पिता। - फोटो : अमर उजाला
शहीद सिपाही हरविंद्र पंवार की मां धनवती अपने सपूत का सेहरा सजाने की तैयारी में थी। तीन बेटों में वह सबसे छोटा था। छह साल पहले सीआरपीएफ में भर्ती हुए लाडले का रिश्ता मेरठ के फलावदा क्षेत्र के गांव नैडू में तय किया था।
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खेती बाडी से जुड़े घर में पिता भीष्म सिंह और मां धनवती ने कड़ी मेहनत कर अपनी सामर्थ्य से बेटों को शिक्षा दिलाई। 27 बीघा भूमि के किसान परिवार को मेहनत का फल भी मिला। तीनों बेटों को नौकरी भी मिल गई। बड़ा भाई सुंदर शहीद छोटे भाई की अंतेष्टि में नहीं पहुंच पाया, जबकि यमुना नगर रेलवे  पुलिस बल में तैनात मंझले भाई हरेंद्र ने चिता को मुखाग्नि दी। जवान भाई की मौत पर उसका दर्द ग्रामीणों को रुला गया।
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मवाना के भिडवारा गांव में शहीद की ननिहाल है। नाते रिश्तेदारों और महिलाओं के कु्रंदन से माहौल गमगीन रहा। जैसे ही बटालियन के सिपाहियों ने ट्रक से शहीद हरविंद्र का शव उतार कर घर में रखा तो मां धनवती दौड़ कर ताबूत से लिपट गई। सीआरपीएफ के जवानों ने ताबूत खोल कर शहीद बेटे का चेहरा दिखाया।
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मां की ममता देख हर आंख नम हो गई। मां बोली-बेटे खुशी-खुशी तेरी शादी की तैयारी में लगी थी, मगर तेरी शहादत की खबर आई। तुझ से जुड़े सब सपने बिखर गए। पिता भीष्म सिंह ने पुत्र के पार्थिव शरीर को हाथ जोड़ कर नमन किया। इंटर के बाद सीआरपीएफ में सिपाही चुने गए हरविंद्र का रिश्ता तय कर दिया गया था, जिसके सिर जल्द ही सेहरा सजना था। 

मां को मिलेगी शहीद बेटे की पेंशन
सीआरपीएफ रामपुर के डीआईजी जगजीत सिंह ने कहा कि बिहार के औरंगाबाद-गया में हुई नक्सली मुठभेड़ में शहीद सिपाही हरविंद्र पंवार की पेंशन मां धनवती को दी जाएगी। शहीद दस जवानों में यूपी के दो जवानों ने बलिदान दिया है। नक्सली प्रभावित इलाकों में तैनात सीआरपीएफ के जवानों का अलग से बीमा होता है। शहीद जवानों को प्रदान किया जाने वाला फंड, बीमा और अन्य सभी देय आश्रितों को दिया जाएगा।


आरआरएफ के कमांडेंट राजेश कुमार, सहायक कमांडेंट संजीव कुमार, प्रदीप कुमार, कांस्टेबल सतीश, अनिल कुमार, एनएस राठौर, हरवीर सिंह, दिनेश बालियान आदि जवान भी गांव पहुंचे। पानीपत के बतौली निवासी सिपाही संदीप कुमार शहीद के शव के साथ गया से आया था। उसने ग्रामीणों को ग्यारह घंटे चली मुठभेड़ की जानकारी दी। कैसे नक्सलियों ने घात लगा कर हमला किया और सड़क में माइंस बिछा रखी थी। संदीप ने अपने साथी हरविंद्र की शहादत पर गर्व जताया। 
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