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प्रियंका के दौरे से वेस्ट यूपी में चढ़ा सियासी पारा
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मुजफ्फरनगर के खालापार में पीड़िता रुकैया परवीन से घटना की जानकारी लेतीं प्रियंका गांधी।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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प्रियंका के दौरे से वेस्ट यूपी में चढ़ा सियासी पारा
मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून पर हुए उपद्रव के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता से वेस्ट यूपी का सियासी पारा चढ़ने लगा है। उपद्रव के दूसरे दिन ही वह बिजनौर के नहटौर में पहुंच गईं थी। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी के साथ मेरठ का रुख किया और अब अचानक ही मुजफ्फरनगर आ गईं। पार्टी महासचिव सक्रियता जहां कांग्रेसियों में जोश भर रही है वहीं सत्ता और अन्य विपक्षी दलों के लिए चुनौती भी है। सियासी हल्कों में इसे कांग्रेस के लिए बंजर हो रही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन को दोबारा हरा-भरा करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
20 दिसंबर को हुए उपद्रव में पुलिस फायरिंग में मारे गए और घायल हुए लोगों के घर पहुंच रही है। पुलिस के उपद्रवियों पर कार्रवाई के नाम पर लोगों के घरों में तोड़फोड़ करने और पुलिस उत्पीड़न के मुद्दे को कांग्रेस खूब हवा दे रही है। खुद पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं। निर्दोषों पर कार्रवाई को लेकर वह सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रहीं। 22 दिसंबर को बिजनौर के नहटौर पहुंच गईं थीं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मारे गए अनस और सुलेमान के परिजनों के साथ अन्य घायलों से मुलाकात की थी। 24 दिसंबर को पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मेरठ का रुख किया तो उन्हें रोक दिया गया था। इसके बाद प्रियंका लखनऊ चली गईं लेकिन सीएए बवाल पर उन्होंने वहां भी तीखे तेवर अपनाए रखे। शुक्रवार को अचानक मुजफ्फरनगर पहुंचकर उन्होंने जता दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को शांत नहीं होने देना चाहती। घटना के 15वें दिन उनके यहां पहुंचने से कांग्रेस नेताओं में जबर्दस्त उत्साह दिखा। हालांकि केवल चुनिंदा कांग्रेस नेताओं को ही उनके यहां आने की जानकारी थी लेकिन जैसे-जैसे पता लगता रहा, शहर के कांग्रेस कार्यकर्ता खालापार पहुंचते रहे। पार्टी महासचिव की सक्रियता ने कांग्रेस नेताओं में नया जोश भरा है। जबकि सत्ता और विपक्ष के अन्य दलों के लिए चुनौती खड़ी की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक का कहना है कि कांग्रेस का पूरा स्टैंड जनता के साथ है। प्रियंका के गुपचुप शहर में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिखावे पर विश्वास नहीं करती। पहले से प्रचार होता तो भीड़ बहुत ज्यादा हो जाती और पार्टी महासचिव का यहां आने का उद्देश्य शायद पूरा नहीं होता। प्रशासन के प्रियंका के रोकने की आशंका पर उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम करता है और हम अपना काम कर रहे हैं।
राजस्थान के सवाल को टाल गईं प्रियंका
मुजफ्फरनगर। राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत को लेकर पूछे गए सवाल को प्रियंका गांधी टाल गईं। उनसे जब पूछा गया कि वह राजस्थान जाकर मृतक बच्चों के परिजनों से क्यों नहीं मिल रहीं तो उन्होंने इस सवाल को अनसुना कर दिया।
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रालोद अध्यक्ष भी कर चुके हैं पीड़ितों से मुलाकात
मुजफ्फरनगर। सीएए बवाल के बाद 26 दिसंबर को रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी मुजफ्फरनगर आए थे। इससे एक दिन पहले शहर में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए उन्हें रोकते हुए गंग नहर से ही लौटा दिया गया था। वह भी अगले दिन अल सुबह बिना किसी को सूचना दिए खालापार पहुंच गए थे। मृतक नूरा के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की थी। साथ ही हाजी अनवार के घर पर भी गए थे। उन्होंने अन्य लोगों से भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी।
आने से पहले जुटा ली थी पूरी जानकारी
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस महासचिव ने मुजफ्फरनगर आने से पहले पूरी जानकारी जुटा ली थी। उन्होंने दो दिन पहले कांग्रेस नेताओं के माध्यम से मौलाना असद रजा से फोन पर बात की थी। बताया जाता है कि प्रियंका दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जुबैर खान के साथ चली थी। रास्ते में उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी पंकज मलिक एवं प्रदेश सचिव इमरान मसूद भी हो गए। इनका काफिला सीधे मौलाना असद रजा के आवास पर रुका। यहां पहुंचने से पहले ही उन्होंने यह खाका तैयार कर लिया था कि कितनी देर कहां पर रुकना है और किस-किस से मिलना है। इसीलिए बवाल के अन्य पीड़ितों को पहले से ही मौलाना के आवास पर बुला लिया गया था। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, जिला प्रभारी सत्य सत्यम सैनी, विधायक नरेश सैनी, जिलाध्यक्ष हरेंद्र त्यागी, विरेंद्र गुड्डू, प्रदेश सचिव गुफरान काजमी, नगर अध्यक्ष जुनैद रऊफ, सतीश शर्मा, साद सिद्दीकी, सलीम मलिक आदि व्यवस्थाओं में लगे हुए थे।
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मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून पर हुए उपद्रव के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की सक्रियता से वेस्ट यूपी का सियासी पारा चढ़ने लगा है। उपद्रव के दूसरे दिन ही वह बिजनौर के नहटौर में पहुंच गईं थी। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी के साथ मेरठ का रुख किया और अब अचानक ही मुजफ्फरनगर आ गईं। पार्टी महासचिव सक्रियता जहां कांग्रेसियों में जोश भर रही है वहीं सत्ता और अन्य विपक्षी दलों के लिए चुनौती भी है। सियासी हल्कों में इसे कांग्रेस के लिए बंजर हो रही पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन को दोबारा हरा-भरा करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।
20 दिसंबर को हुए उपद्रव में पुलिस फायरिंग में मारे गए और घायल हुए लोगों के घर पहुंच रही है। पुलिस के उपद्रवियों पर कार्रवाई के नाम पर लोगों के घरों में तोड़फोड़ करने और पुलिस उत्पीड़न के मुद्दे को कांग्रेस खूब हवा दे रही है। खुद पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी इस मुद्दे को लेकर मुखर हैं। निर्दोषों पर कार्रवाई को लेकर वह सरकार पर हमले का कोई मौका नहीं छोड़ रहीं। 22 दिसंबर को बिजनौर के नहटौर पहुंच गईं थीं। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान मारे गए अनस और सुलेमान के परिजनों के साथ अन्य घायलों से मुलाकात की थी। 24 दिसंबर को पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ मेरठ का रुख किया तो उन्हें रोक दिया गया था। इसके बाद प्रियंका लखनऊ चली गईं लेकिन सीएए बवाल पर उन्होंने वहां भी तीखे तेवर अपनाए रखे। शुक्रवार को अचानक मुजफ्फरनगर पहुंचकर उन्होंने जता दिया कि कांग्रेस इस मुद्दे को शांत नहीं होने देना चाहती। घटना के 15वें दिन उनके यहां पहुंचने से कांग्रेस नेताओं में जबर्दस्त उत्साह दिखा। हालांकि केवल चुनिंदा कांग्रेस नेताओं को ही उनके यहां आने की जानकारी थी लेकिन जैसे-जैसे पता लगता रहा, शहर के कांग्रेस कार्यकर्ता खालापार पहुंचते रहे। पार्टी महासचिव की सक्रियता ने कांग्रेस नेताओं में नया जोश भरा है। जबकि सत्ता और विपक्ष के अन्य दलों के लिए चुनौती खड़ी की है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक का कहना है कि कांग्रेस का पूरा स्टैंड जनता के साथ है। प्रियंका के गुपचुप शहर में आने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस दिखावे पर विश्वास नहीं करती। पहले से प्रचार होता तो भीड़ बहुत ज्यादा हो जाती और पार्टी महासचिव का यहां आने का उद्देश्य शायद पूरा नहीं होता। प्रशासन के प्रियंका के रोकने की आशंका पर उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना काम करता है और हम अपना काम कर रहे हैं।
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राजस्थान के सवाल को टाल गईं प्रियंका
मुजफ्फरनगर। राजस्थान के कोटा में बच्चों की मौत को लेकर पूछे गए सवाल को प्रियंका गांधी टाल गईं। उनसे जब पूछा गया कि वह राजस्थान जाकर मृतक बच्चों के परिजनों से क्यों नहीं मिल रहीं तो उन्होंने इस सवाल को अनसुना कर दिया।
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रालोद अध्यक्ष भी कर चुके हैं पीड़ितों से मुलाकात
मुजफ्फरनगर। सीएए बवाल के बाद 26 दिसंबर को रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी मुजफ्फरनगर आए थे। इससे एक दिन पहले शहर में धारा 144 लागू होने का हवाला देते हुए उन्हें रोकते हुए गंग नहर से ही लौटा दिया गया था। वह भी अगले दिन अल सुबह बिना किसी को सूचना दिए खालापार पहुंच गए थे। मृतक नूरा के घर पहुंचकर परिजनों से मुलाकात की थी। साथ ही हाजी अनवार के घर पर भी गए थे। उन्होंने अन्य लोगों से भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली थी।
आने से पहले जुटा ली थी पूरी जानकारी
मुजफ्फरनगर। कांग्रेस महासचिव ने मुजफ्फरनगर आने से पहले पूरी जानकारी जुटा ली थी। उन्होंने दो दिन पहले कांग्रेस नेताओं के माध्यम से मौलाना असद रजा से फोन पर बात की थी। बताया जाता है कि प्रियंका दिल्ली से पार्टी के राष्ट्रीय सचिव जुबैर खान के साथ चली थी। रास्ते में उनके साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी पंकज मलिक एवं प्रदेश सचिव इमरान मसूद भी हो गए। इनका काफिला सीधे मौलाना असद रजा के आवास पर रुका। यहां पहुंचने से पहले ही उन्होंने यह खाका तैयार कर लिया था कि कितनी देर कहां पर रुकना है और किस-किस से मिलना है। इसीलिए बवाल के अन्य पीड़ितों को पहले से ही मौलाना के आवास पर बुला लिया गया था। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, जिला प्रभारी सत्य सत्यम सैनी, विधायक नरेश सैनी, जिलाध्यक्ष हरेंद्र त्यागी, विरेंद्र गुड्डू, प्रदेश सचिव गुफरान काजमी, नगर अध्यक्ष जुनैद रऊफ, सतीश शर्मा, साद सिद्दीकी, सलीम मलिक आदि व्यवस्थाओं में लगे हुए थे।