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हैदरपुर में दिखाई दिया पलाश फिश ईगल
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आशीष लोया।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। पक्षियों की दुर्लभ प्रजातियों में सुमार किए जाने वाला पलाश फिश ईगल हैदरपुर वेटलैंड पर दिखाई दिया है। तालाबों का पानी सूखने पर बाज के लिए यहां शिकार करना आसान हो गया है। बड़ा आकार होने के कारण यह पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिल चुकी है। वन्य जीव विशेषज्ञ आशीष लोया ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है, जिससे वेटलैंड के कई तालाबों का पानी सूख रहा है। ऐसे में शिकारी पक्षी भी हैदरपुर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे खास और दुर्लभ पलाश फिश ईगल देखा गया है। दुनियाभर में इस बाज की कम ही संख्या बची है, जिस कारण इसके संरक्षण का काम भी चल रहा है। बाज 84 सेमी तक लंबा होता है। यही नहीं इसके पंखों का फैलाव करीब 215 सेमी तक होत जाता है। मादा का वजन करीब तीन और नर का वजन करीब सात किलो का होता है। शिकार की तलाश में यह तालाबों के किनारे डेरा जमाकर रहता है। गर्मी के दिनों में जिन तालाबों का पानी सूखता रहता है, उनके किनारे यह बाज दिखता है। हैदरपुर में पिछले साल भी यह दिखाई दिया था।
प्रदूषण से विलुप्त हो रही यह प्रजाति
आशीष लोया ने बताया कि पलाश फिश ईगल की दुनियाभर में संख्या सिर्फ ढाई हजार ही बची है। प्रदूषण के अलावा शिकार की कम होती संख्या के कारण प्रजाति पर संकट है।
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हैदरपुर वेटलैंड को रामसर स्थल के रूप में मान्यता मिल चुकी है। वन्य जीव विशेषज्ञ आशीष लोया ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू हो रहा है, जिससे वेटलैंड के कई तालाबों का पानी सूख रहा है। ऐसे में शिकारी पक्षी भी हैदरपुर पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे खास और दुर्लभ पलाश फिश ईगल देखा गया है। दुनियाभर में इस बाज की कम ही संख्या बची है, जिस कारण इसके संरक्षण का काम भी चल रहा है। बाज 84 सेमी तक लंबा होता है। यही नहीं इसके पंखों का फैलाव करीब 215 सेमी तक होत जाता है। मादा का वजन करीब तीन और नर का वजन करीब सात किलो का होता है। शिकार की तलाश में यह तालाबों के किनारे डेरा जमाकर रहता है। गर्मी के दिनों में जिन तालाबों का पानी सूखता रहता है, उनके किनारे यह बाज दिखता है। हैदरपुर में पिछले साल भी यह दिखाई दिया था।
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प्रदूषण से विलुप्त हो रही यह प्रजाति
आशीष लोया ने बताया कि पलाश फिश ईगल की दुनियाभर में संख्या सिर्फ ढाई हजार ही बची है। प्रदूषण के अलावा शिकार की कम होती संख्या के कारण प्रजाति पर संकट है।

प्लाश फिश ईगल।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

हैदरपुर वैटलैड में सूखे तालाब।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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