{"_id":"579513194f1c1b2d32c4baf9","slug":"on-the-roof-of-the-train-trip","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे से खाली नहीं ट्रेन की छत पर यात्रा करना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे से खाली नहीं ट्रेन की छत पर यात्रा करना
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 25 Jul 2016 12:42 AM IST
विज्ञापन
ट्रेन की छत पर यात्रा करते कांवड़िए।
- फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार से गंगाजल लेकर ट्रेनों में छतों पर बैठकर आने वाले कांवड़ियों को इस बार अधिक सावधानी की जरूरत है। जिला प्रशासन और रेलवे की ओर से शिवभक्तों को चेताया है कि वे ट्रेनों की छतों पर ज्यादा जोखिम का सफर करने से बचें। इससे जिंदगी मुश्किल में पड़ सकती है। दरअसल, इस बार पूरी लाइन का विद्युतीकरण हो चुका है। हाईटेंशन लाइनें ट्रेन की छत के नजदीक से गुजरती हैं।
हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा जाने वाले शिवभक्त पैदल मार्ग के साथ ट्रेनों से भी जाते हैं। दिल्ली-देहरादून हाईवे बंद होने से ट्रेनों पर अधिक भार आ जाता है। आम आदमी भी सहारनपुर से लेकर दिल्ली के बीच ट्रेेनों का ही उपयोग करता है। ट्रेनों में प्रतिवर्ष मारामारी की स्थिति रहती है। प्रतिवर्ष हजारों भोले ट्रेनों की छतों पर ही बैठकर यात्रा करते रहे हैं।
इस बार रेलवे लाईन का विद्युतीकरण हो चुका है। विद्युत लाइनें छत से करीब से गुजर रही हैं। छत पर किसी भी हालत में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। अभी तक कई युवक धोखे के चलते मौत का शिकार हो चुके हैं। सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ और जीआरपी को निर्देशित किया गया है कि वह किसी भी शिवभक्त को ट्रेन की छत पर न चढ़ने दें।
विज्ञापन
प्रशासन ने यह प्रयास किया है कि अधिक से अधिक लोगों को यह बताया जाए कि रेलवे को विद्युतीकरण हो चुका है, अब छत पर कतई न चढ़े। उधर, उत्तर रेलवे बोर्ड के सदस्य कमलकांत कश्यप ने मांग की है कि रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कांवड़ यात्रा के दौरान एक एंबुलेंस और एक डॉक्टर की व्यवस्था रहनी चाहिए।
विज्ञापन
हरिद्वार से गंगाजल लेकर दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा जाने वाले शिवभक्त पैदल मार्ग के साथ ट्रेनों से भी जाते हैं। दिल्ली-देहरादून हाईवे बंद होने से ट्रेनों पर अधिक भार आ जाता है। आम आदमी भी सहारनपुर से लेकर दिल्ली के बीच ट्रेेनों का ही उपयोग करता है। ट्रेनों में प्रतिवर्ष मारामारी की स्थिति रहती है। प्रतिवर्ष हजारों भोले ट्रेनों की छतों पर ही बैठकर यात्रा करते रहे हैं।
विज्ञापन
इस बार रेलवे लाईन का विद्युतीकरण हो चुका है। विद्युत लाइनें छत से करीब से गुजर रही हैं। छत पर किसी भी हालत में यात्रा करना खतरे से खाली नहीं है। अभी तक कई युवक धोखे के चलते मौत का शिकार हो चुके हैं। सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर तैनात आरपीएफ और जीआरपी को निर्देशित किया गया है कि वह किसी भी शिवभक्त को ट्रेन की छत पर न चढ़ने दें।
विज्ञापन
प्रशासन ने यह प्रयास किया है कि अधिक से अधिक लोगों को यह बताया जाए कि रेलवे को विद्युतीकरण हो चुका है, अब छत पर कतई न चढ़े। उधर, उत्तर रेलवे बोर्ड के सदस्य कमलकांत कश्यप ने मांग की है कि रेलवे स्टेशन पर आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए कांवड़ यात्रा के दौरान एक एंबुलेंस और एक डॉक्टर की व्यवस्था रहनी चाहिए।