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Muzaffarnagar News: जादू या झाड़फूंक नहीं, स्किज़ोफ्रेनिया है एक बीमारी
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मुजफ्फरनगर। तनावभरी जीवनशैली में मानसिक रोग तेजी से बढ़ रहे है। इन्हीं में एक स्किज़ोफ्रेनिया (विखंडित मानसिक रोग) भी एक बीमारी है, जिसे आम तौर पर लोग जादू या झाड़फूंक समझ लेते हैं। ऐसे रोगी पर झाड़फूंक होने जैसी बातें प्रचलित हैं।
स्किज़ोफ्रेनिया (विखंडित मानसिक रोग) वाले मरीज को नियमित रूप से इलाज और परिजनों की सहायता, सहानुभूति और समझदारी की आवश्यकता होती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुछ लोग इस तरह के मरीज के लिए केवल झाड़ फूंक जैसी बातें ही करते हैं। देखते-देखते यह बीमारी खतरनाक साबित हो जाती है।जिला चिकित्सालय में भी इस बीमारी के कुछ मरीजों का इलाज जारी है।
मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन ने बताया कि मधुमेह एवं हृदय रोग की तरह ही स्किज़ोफ्रेनिया भी एक रोग है। यह मनुष्य के विचार, अनुभूति एवं व्यवहार पर गंभीर असर करता है। रोगी के लिए तार्किक रूप से सोचना, सामान्य भावनाओं को व्यक्त करना और समाज में उचित व्यवहार करना कठिन हो जाता है। रोगी काल्पनिक विचारों को आंतरिक जिंदगी में जीता है एवं बाहरी दुनिया से अलग-अलग रहता है। रोगी के कामकाज के तरीके एवं एकाग्रता दोनों पर असर पड़ता है।
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ये हैं प्रचलित गलतफहमियां
-स्किज़ोफ्रेनिया का रोगी हिंसक होता है
-शादी कर देने से मरीज की समस्याओं का समाधान हो जाएगा
-स्किज़ोफ्रेनिया खराब पालन पोषण की वजह से होता है
-इस रोगी पर किसी ने झाड़फूंक या जादू कर दिया
-व्यक्ति आलसी व कामचोर है
-इलाज से संबंधित दवाइयां नींद की गोलियां होती है
-स्किज़ोफ्रेनिया मरीजों का इलाज बिना भर्ती संभव नहीं है
रोगी के लक्षण
-शक करना (अपने जीवनसाथी पर शक करना)
-बिना किसी कारण भय लगना
-अपनी दुनिया और विचारों में खोए रहना
-दूसरों को ना सुनाई देने वाली काल्पनिक आवाजें सुनाई देना
-अजीब प्रकार के विचार आना
-गलत मान्यता पर दृढ़ रहना
-बेमतलब की और अर्थहीन बातें करना
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स्किज़ोफ्रेनिया (विखंडित मानसिक रोग) वाले मरीज को नियमित रूप से इलाज और परिजनों की सहायता, सहानुभूति और समझदारी की आवश्यकता होती है। चिकित्सकों का कहना है कि कुछ लोग इस तरह के मरीज के लिए केवल झाड़ फूंक जैसी बातें ही करते हैं। देखते-देखते यह बीमारी खतरनाक साबित हो जाती है।जिला चिकित्सालय में भी इस बीमारी के कुछ मरीजों का इलाज जारी है।
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मनोचिकित्सक डॉ. अर्पण जैन ने बताया कि मधुमेह एवं हृदय रोग की तरह ही स्किज़ोफ्रेनिया भी एक रोग है। यह मनुष्य के विचार, अनुभूति एवं व्यवहार पर गंभीर असर करता है। रोगी के लिए तार्किक रूप से सोचना, सामान्य भावनाओं को व्यक्त करना और समाज में उचित व्यवहार करना कठिन हो जाता है। रोगी काल्पनिक विचारों को आंतरिक जिंदगी में जीता है एवं बाहरी दुनिया से अलग-अलग रहता है। रोगी के कामकाज के तरीके एवं एकाग्रता दोनों पर असर पड़ता है।
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ये हैं प्रचलित गलतफहमियां
-स्किज़ोफ्रेनिया का रोगी हिंसक होता है
-शादी कर देने से मरीज की समस्याओं का समाधान हो जाएगा
-स्किज़ोफ्रेनिया खराब पालन पोषण की वजह से होता है
-इस रोगी पर किसी ने झाड़फूंक या जादू कर दिया
-व्यक्ति आलसी व कामचोर है
-इलाज से संबंधित दवाइयां नींद की गोलियां होती है
-स्किज़ोफ्रेनिया मरीजों का इलाज बिना भर्ती संभव नहीं है
रोगी के लक्षण
-शक करना (अपने जीवनसाथी पर शक करना)
-बिना किसी कारण भय लगना
-अपनी दुनिया और विचारों में खोए रहना
-दूसरों को ना सुनाई देने वाली काल्पनिक आवाजें सुनाई देना
-अजीब प्रकार के विचार आना
-गलत मान्यता पर दृढ़ रहना
-बेमतलब की और अर्थहीन बातें करना