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अनुभव नहीं, अब पहले टेस्ट करना होगा पास

Thu, 15 Mar 2018 11:37 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/ मुजफ्फरनगर Updated Thu, 15 Mar 2018 11:37 PM IST
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No experience, now must pass first test
demo - फोटो : demo
मुजफ्फरनगर में अल्ट्रासाउंड केंद्र रिनुअल करने में स्वास्थ्य विभाग को सुप्रीम झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुभव के तौर पर एमबीबीएस चिकित्सकों को अल्ट्रासाउंड के मान्य नहीं ठहराया है। रेडियोलॉजिस्ट एसोसिएशन की याचिका पर फैसला देते हुए पीसीपीएनडीटी एक्ट को प्रभावी करने के लिए कहा गया है। अब पीजी चिकित्सक और रेडियोलॉजिस्ट अल्ट्रासाउंड करेंगे। हालांकि पीजी चिकित्सकों को भी छह माह की ट्रेनिंग से गुजरना होगा।
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अभी तक रेडियोलॉजिस्ट, नॉन रेडियोलॉजिस्ट, गायनोलॉजिस्ट के साथ एमबीबीएस चिकित्सक अल्ट्रासाउंड की मशीन पंजीकृत कराकर कार्य कर रहे थे। वर्ष 2014 में गजट जारी होने के बाद फ्रेशर एमबीबीएस को छह माह की ट्रेनिंग करनी करनी थी, जबकि अनुभवी चिकित्सकों एमबीबीएस, नॉन रेडियोलॉजिस्ट, गायनोलॉजिस्ट को एक जनवरी 2017 टेस्ट पास करने की छूट दी गई थी। इसी बीच वर्ष 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑर्डर देकर परीक्षा नहीं देनी होगी। इसको लेकर रेडियोलॉजिस्ट एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में वाद दायर किया। नेशनल पीसीपीएनडीटी के सदस्य वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ सुभाष बालियान ने बताया कि 14 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अल्ट्रासाउंड करने वालों की योग्यता तय की है। अब एमबीबीएस चिकित्सक जो अनुभव के तौर पर काम कर रहे थे, वह मान्य नहीं है। पहले इन्हें रेडियोलॉजी टेस्ट पास करना होगा, उसके बाद ही कार्य कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर आते ही जिले में अल्ट्रासाउंउ केंद्र चलाने वाले चिकित्सकों में हड़कंप मच गया है।
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इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग में भी खलबली मच गई है, क्योंकि विभागीय अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश आने पहले ही दर्जनों अल्ट्रासाउंउ केंद्रों को रिनुअल कर दिया है। जिन पर नॉन रेडियोलॉजिस्ट और एमबीबीएस चिकित्सक तैनात हैं। ऐसे कोर्ट के आदेश आने के बाद रिनुअल लाइसेंस सरेंडर कराने की विभाग के आगे चुनौती खड़ी हो गई है। उधर, सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी नहीं मिला है। आदेश मिलने के बाद ही मामले में विभाग कार्रवाई प्रारंभ करेगा। कोर्ट ने जो आदेश दिया है, उन पर कार्य होगा।
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