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Muzaffarnagar: एक करोड़ के नशीले कैप्सूल्स के साथ तीन पकड़े, नशेड़ियों को नौ रुपये का कैप्सूल बेचते थे 50 में
Wed, 20 May 2026 08:43 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Wed, 20 May 2026 08:43 PM IST
सार
मुजफ्फरनगर पुलिस ने खालापार थाना क्षेत्र में एक गोदाम से ये कैप्सूल बरामद किए। गिरोह के सरगना खतौली निवासी अश्वनी शर्मा समेत तीन आरोपी गिरफ्तार किए है। कुल 11.66 लाख कैप्सूल जब्त किए गए हैं।
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पकड़े गए आरोपी और बरामद माल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर भारत में खपाने के लिए छिपाए गए एक करोड़ रुपये के नशीले प्रतिबंधित 11 लाख 66 हजार 400 स्पासमोर कैप्सूल खालापार थाना क्षेत्र के सुजडू में बनाए गए गोदाम से पुलिस ने बरामद कर लिए। गिरोह के सरगना खतौली निवासी अश्वनी शर्मा समेत तीन आरोपी पकड़े गए। गोरखपुर से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से कैप्सूल मंगाए गए थे। ट्रांसपोर्ट से कैप्सूल भेजने वाले सहित दो आरोपियों की तलाश है। तस्करी में प्रयुक्त कार सीज की गई है। सूखे नशे की लत वाले लोगों को नौ रुपये कीमत का यह कैप्शूल 40 से 50 रुपये में बेचा जाता था। एक साल में यह गिरोह लगभग पांच करोड़ के कैप्सूल बेच चुका है।
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एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों को बताया कि खालापार पुलिस ने गहरा बाग वाले रास्ते पर चेकिंग के दौरान संदिग्ध कार को रोककर खतौली के जैन नगर मोहल्ला निवासी अश्वनी शर्मा और दयालपुरम निवासी विनोद कुमार से पूछताछ की। कार में दो कार्टून (पेटी) रखी मिली।
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सख्ती से पूछने पर कार्टून में ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड एवं डाइक्लोमाइन हाइड्रोक्लोराइड साल्ट से निर्मित स्पासमोर नशीले प्रतिबंधित कैप्सूल का खुलासा किया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर सुजड़ू के पास एक खंडहरनुमा गोदाम में छापा मारकर वहां से 52 कार्टून में नशीले कैप्सूल की बड़ी खेप बरामद की। कुल 54 कार्टून में 11 लाख 66400 कैप्सूल मिले।
मौके से गांधी कॉलोनी मुजफ्फरनगर निवासी यशपाल ग्रोवर को पकड़ा गया। गिरोह ने उसे निगरानी के लिए छोड़ा था। आरोपी अश्वनी की खतौली में किताबों की दुकान है। विनोद मेडिकल स्टोर का संचालन करता है। यशपाल ग्रोवर एमआर था लेकिन हाल ही में उसने नौकरी छोड़ी है।
कुछ देर पहले उनका साथी थाना भोपा के कस्बा भोकरहेड़ी निवासी अश्वनी सहरावत भी गोदाम से गया था। यह गोदाम उसी का था। पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर चालान कर दिया। इस पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। अश्वनी सहरावत व शशांक की तलाश है। यह कैप्सूल डॉक्टर की सलाह ही खरीदे व बेचे जा सकते हैं। पुलिस अधीक्षक सिटी अमृत जैन मौजूद रहे।
पहले पकड़े जा चुके गिरोह के छह सदस्य
एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा की मौजूदगी में नशीले कैप्सूल कब्जे में लिए गए। पूछताछ में आरोपी अश्वनी शर्मा ने बताया कि उसके छह साथी 10 मई की रात में खालापार पुलिस ने 40 लाख रुपये के ऐसे ही कैप्सूल बरामद कर पकड़े थे। इस मामले में वह वांछित चल रहा था। 14 अगस्त 2025 से पुलिस अब तक अलग-अलग मामलों में 32 करोड़ के मादक पदार्थ बरामद कर 80 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है।
एएसपी सिद्धार्थ के. मिश्रा की मौजूदगी में नशीले कैप्सूल कब्जे में लिए गए। पूछताछ में आरोपी अश्वनी शर्मा ने बताया कि उसके छह साथी 10 मई की रात में खालापार पुलिस ने 40 लाख रुपये के ऐसे ही कैप्सूल बरामद कर पकड़े थे। इस मामले में वह वांछित चल रहा था। 14 अगस्त 2025 से पुलिस अब तक अलग-अलग मामलों में 32 करोड़ के मादक पदार्थ बरामद कर 80 करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है।
धोखाधड़ी कर बनाई थी फर्म
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जमुना विहार कॉलोनी निवासी सागर के पेपर लोन दिलाने के नाम पर आरएस इंटरप्राइजेज नाम से फर्म रजिस्टर्ड कराकर यह धंधा चला रखा था। उसी फर्म के नाम से बिल तैयार कराकर गोरखपुर निवासी शशांक नाम के व्यक्ति से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से माल मंगाते थे। मांग के अनुसार माल भेजते थे। उन्होंने मंगलवार सुबह ही गोरखपुर से नशीली दवाइयों की खेप खतौली में ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगाई थी, जिसे सुजड़ू के पास गोदाम में छिपाया था।
आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जमुना विहार कॉलोनी निवासी सागर के पेपर लोन दिलाने के नाम पर आरएस इंटरप्राइजेज नाम से फर्म रजिस्टर्ड कराकर यह धंधा चला रखा था। उसी फर्म के नाम से बिल तैयार कराकर गोरखपुर निवासी शशांक नाम के व्यक्ति से ट्रांसपोर्ट के माध्यम से माल मंगाते थे। मांग के अनुसार माल भेजते थे। उन्होंने मंगलवार सुबह ही गोरखपुर से नशीली दवाइयों की खेप खतौली में ट्रांसपोर्ट के माध्यम से मंगाई थी, जिसे सुजड़ू के पास गोदाम में छिपाया था।
तीन राज्यों में फैला नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, हरियाणा, उत्तराखंड व यूपी में इस गिरोह का बड़ा नेटवर्क है। तीनों राज्यों के कैप्सूल की सप्लाई मांग के अनुसार की जाती थी। अच्छी कमाई कर पैसा बांटते थे। नोएडा, गाजियाबाद, सहारनपुर, मेरठ के साथ ही शामली जनपद में कैप्सूल की बड़ी खेप को बेचा जा रहा था।
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