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Muzaffarnagar: बेटी का यौन उत्पीड़न करने वाले पिता को कोर्ट ने दी सजा, गिड़गिड़ाते हुए बोला-रहम करो, गरीब हूं

Thu, 21 May 2026 09:38 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 21 May 2026 09:38 PM IST
सार

बुढ़ाना क्षेत्र में छह साल पहले पिता ने किशोरी का यौन उत्पीड़न किया था। मां ने ही रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हालांकि बाद में मां-बेटी मुकर गईं। लेकिन कोर्ट ने एफएसएल रिपोर्ट को आधार मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। 

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Muzaffarnagar: The court punished the father who sexually assaulted his daughter
कोर्ट, सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना कोतवाली क्षेत्र में छह साल पहले नाबालिग बेटी के यौन उत्पीड़न मामले में अदालत ने दोषी पिता साबिर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। वादी मां और पीड़िता पक्षद्रोही हो गई लेकिन एफएसएल रिपोर्ट सजा का आधार बनीं। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 की पीठासीन अधिकारी मंजुला भालोटिया ने फैसले में लिखा कि एक पिता की ओर से नाबालिग पुत्री का शारीरिक और मानसिक शोषण ऐसा कृत्य है जो मानव सभ्यता को कलंकित करता है।
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मुकदमे की वादी मां 15 दिसंबर 2020 को मायके से घर लौटी थीं। नाबालिग बेटी ने जानकारी दी कि पिता ने उसका यौन उत्पीड़न किया है। इसके बाद कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया और आरोपपत्र दाखिल किया। प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/पॉक्सो कोर्ट संख्या-1 में हुई। जिरह के दौरान वादी और पीड़िता पक्षद्रोही हो गई।
 
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ऐसे में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी से कराई गई मेडिकल रिपोर्ट महत्वपूर्ण साबित हुई। अदालत ने मेडिकल तथ्यों को पुष्ट पाते हुए दोषी को आजीवन कारावास और 53 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यह भी स्पष्ट किया गया कि आजीवन कारावास से मतलब शेष प्राकृतिक जीवन काल के लिए है।
 
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जघन्य अपराध...उदारता का स्थान नहीं : अदालत
फैसले में लिखा गया कि दंडादेश पारित करते समय न्यायालय को अपराध की गंभीरता, समाज पर इसके प्रभाव और अपराधी की पृष्ठभूमि के बीच संतुलन स्थापित करना होता है। एक पिता की ओर से अपनी ही नाबालिग पुत्री का शारीरिक और मानसिक शोषण एक ऐसा कृत्य है जो मानव सभ्यता को कलंकित करता है। यह ऐसा अपराध है जो पीड़िता के मस्तिष्क पर जीवन भर के लिए एक अमिट आघात छोड़ जाता है। ऐसे जघन्य अपराधों में उदारता का कोई स्थान नहीं है और दंड ऐसा होना चाहिए जो समाज में एक निवारक संदेश स्थापित करे।
 

दोष सिद्ध होते ही कांपा...भुखमरी का हवाला
अदालत में दोष सिद्ध होते ही साबिर कांपने लगा। अभियुक्त ने कहा कि वह गरीब है। परिवार भुखमरी की कगार पर है। जबकि अभियोजन पक्ष ने कहा कि एक पिता अपनी संतान के लिए रक्षक की जगह भक्षक बन गया।

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