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टपकते रैन बसेरों में रात काटने को मजबूर लोग

Tue, 07 Jan 2020 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 12:39 AM IST
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Muzaffarnagar: Rain shelters dripping in rain
जिला चिकित्सालय में रैनबसेरा में कंबल मिलने के इंतजार में बैठा लोग। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
टपकते रैन बसेरों में रात काटने को लोग मजबूर
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मुजफ्फरनगर। सड़कों के किनारे रात बिताने वाले लोगों को ठंड से बचाने के अफसरों के दावे बारिश में धुल गए। टिन के बनाए गए रैन बसेरे बारिश की बूंदों को नहीं रोक पा रहे। भीगते हुए लोगों को ठंड में रात काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
शहर में रेलवे स्टेशन के पास शेल्टर होम के अतिरिक्त साईं धाम के सामने टिन का रैन बसेरा बनाया गया है। इसके अतिरिक्त जिला अस्पताल में दो रैन बसेरे बने हैं। इनमें संयुक्त अस्पताल में तो पक्का भवन है, जबकि महिला अस्पताल में टिन डालकर लोगों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। सोमवार शाम बारिश के दौरान अमर उजाला टीम ने इन रैन बसेरों की स्थिति का जायजा लिया। शाम करीब साढ़े छह बजे महिला अस्पताल पर बने टिन के रैन बसेरे में छपार निवासी सीताराम और उनके परिवार की एक महिला छोटे बच्चे के साथ बैठी थी। उनकी पुत्रवधू की डिलीवरी महिला अस्पताल में हुई है। टिन के इस रैन बसेरे के तीन तरफ दीवार है, एक तरफ तिरपाल लगा है, लेकिन यह हवा और बारिश की बूंद रोकने के लिए पर्याप्त नहीं है। अंदर न तो लिहाफ थे और न ही गद्दे। वहां बैठे परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनके पास अपना बिस्तर है। पास में ही मौजूद गार्ड ने बताया कि सात बजे रैन बसेरे में गद्दे एवं लिहाफ डाले जाएंगे। संयुक्त अस्पताल के रैन बसेरे में फर्श पर फोम बिछी थी। पास में ही एक व्यक्ति लिहाफ ओढ़े लेटा मिला। मौजूद गार्ड ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति यहां रुकता है तो उसे लिहाफ-कंबल उपलब्ध करा दिए जाते हैं। स्टेशन के पास बने शेल्टर होम में 50 लोगों के ठहरने की व्यवस्था है। सात बजे तक यहां 25 लोग पहुंच चुके थे। शेल्टर होम के कर्मचारियों ने बताया कि 50 कंबल पहले से मौजूद थे, जबकि 35 कंबल प्रशासन ने और 17 नगर पालिका ने अलग से उपलब्ध कराए हैं। साईं धाम के सामने टिन डालकर रैन बसेरा बनाया गया है। इसमें कई जगह-जगह पर बारिश का पानी टपक रहा था। यहां रह रहे परिवार ने बताया कि उनके बिस्तर भी भीग गए हैं। टपकते पानी को इकट्ठा करने के लिए जगह-जगह बाल्टियां और डिब्बे रखे हैं। छत पर पन्नी तो डाली गई है लेकिन इससे भी पानी नहीं रुक रहा।
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इन्होंने कहा...
- रैन बसेरे पर पानी रोकने के लिए पन्नी डलवाई गई है। यदि इससे भी पानी नहीं रुक रहा तो और कुछ व्यवस्था कराई जाएगी। रैन बसेरे में पर्याप्त लिहाफ-गद्दे उपलब्ध हैं।
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- विनय कुमार मणि त्रिपाठी, ईओ।
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