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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Muzaffarnagar: District hospital refused to operate on an AIDS patient, the poor patient kept waiting

Muzaffarnagar: जिला अस्पताल ने किया HIV पीड़ित के ऑपरेशन से इनकार, नम आंखों से इधर-उधर ताकता रहा बेचारा मरीज

Thu, 12 Jun 2025 09:38 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 12 Jun 2025 09:38 PM IST
सार

जिला अस्पताल में एचआईवी पॉजिटिव मरीज की पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन होना था। उसके ऑपरेशन की तैयारी भी गई थी, मगर ऐन वक्त पर डॉक्टरों ने उसे मेरठ मेडिकल काॅलेज रेफर कर दिया। 

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Muzaffarnagar: District hospital refused to operate on an AIDS patient, the poor patient kept waiting
एचआईवी संक्रमण - फोटो : Freepik.com

विस्तार

स्वामी कल्याण देव जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने एचआईवी पीड़ित का पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन करने से मना कर दिया। काफी देर तक वह बेचारगी वाली नजरों से इधर-उधर देखता रहा। स्टाफ के कई लोगों को उसकी हालत पर तरस भी आ गया। अस्पताल में संक्रमित मरीज के ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं होने की बात कहते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

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जिला अस्पताल में करीब 15 वर्ष से एआरटी सेंटर का संचालन किया जा रहा है, जहां अब तक एचआईवी पॉजिटिव पाए गए तीन हजार से अधिक मरीजों का पंजीकरण कर उपचार दिया जाता रहा है। मरीजों को नियमित तौर से दवा खाने के प्रति जागरूक करने सहित काउंसिलिंग के माध्यम से उन्हें समाज में सिर उठाकर जीने के लिए भी प्रेरित किया जाता है। एआरटी सेंटर से उपचार पा रहे एचआईवी पॉजिटिव एक मरीज को पिछले दिनों पेट और छाती के आसपास दर्द महसूस हुआ था।

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सेंटर प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. मुजीबुर्रहमान की ओर से मरीज का अल्ट्रासाउंड कराया गया, जिसकी रिपोर्ट में मरीज की पित्त की थैली में पथरी बताई गई। जिला अस्पताल में उसके ऑपरेशन की कवायद शुरू हुई, लेकिन अचानक उसे मेडिकल कॉलेज मेरठ रेफर कर दिया गया।

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लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन की नहीं है व्यवस्था : डॉ. पंकज अग्रवाल
जिला अस्पताल के सर्जन पूर्व सीएमएस डॉ. पंकज अग्रवाल का कहना है कि एचआईवी पॉजिटिव मरीज के ऑपरेशन में काफी सावधानी बरतनी होती है। ऑपरेशन के बाद टांके लगाते समय सुई भी चुभने का खतरा रहा है, जबकि जिला अस्पताल में पित्त की थैली के लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन की सुविधा नहीं है। ओपन ऑपरेशन में खून अधिक निकलता है, एचआईवी पॉजिटिव होने के कारण ऐसे मरीज के लिए ऑपरेशन रिस्की हो जाता है। इसलिए ऐसे रोगी के लिए लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन अधिक सुरक्षित माना जाता है।

एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के होते रहे हैं ऑपरेशन : डॉ. संजय वर्मा
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. संजय वर्मा का कहना है कि जिला अस्पताल में पूर्व में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के ऑपरेशन होते रहे हैं। मौजूदा केस के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। हालांकि संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे मरीजों के ऑपरेशन में अतिरिक्त सुरक्षा बरती जाती है।


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