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Muzaffarnagar: 'आठ हजार में जोड़ी हड्डी, 10 हजार और नहीं दिए तो दोबारा तोड़ी', जिला अस्पताल के डॉक्टर पर आरोप

Wed, 03 Jun 2026 08:58 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 03 Jun 2026 08:58 PM IST
सार

गांव खांजापुर की रेशमा ने डीएम से मिलकर आरोप लगाया कि जिला अस्पताल के डॉक्टर ने उसकी 13 साल की बेटी के ऑपरेशन के नाम पर रुपये ले लिए। दोबारा रुपये नहीं दिए, तो डॉक्टर ने हड्डी तोड़ दी। वहीं डॉक्टर ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। 

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Muzaffarnagar: District hospital doctor accused of breaking bones
डॉक्टर। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। खांजापुर की रेशमा ने आरोप लगाया कि आर्थोपेडिक सर्जन ने उसकी दिव्यांग बेटी के पैर के ऑप्रेशन के नाम पर आठ हजार रुपये ले लिए। इसके बाद इलाज किया। तीन महीने बाद परेशानी होने पर वह दोबारा डॉक्टर के पास पहुंची तो 10 हजार रुपये की मांग की गई। रुपये नहीं देने पर हड्डी तोड़ दी गई। पीड़िता ने डीएम उमेश मिश्रा से मामले की शिकायत की है।
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कांशीराम कॉलोनी निवासी महिला ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उसने 13 वर्षीय दिव्यांग पुत्री का पैर का ऑपरेशन जिला चिकित्सालय में कराया था। इसके बदले आर्थोपेडिक चिकित्सक को उसने आठ हजार रुपये भी दिए। पैर में समस्या रहने के कारण वह अपनी पुत्री को फिर से चिकित्सक को दिखाने आई थी।
 
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इस दौरान चिकित्सक की ओर से 10 हजार रुपये की मांग की गई। इन्कार करने पर चिकित्सक ने उपचार के नाम पर उसकी पुत्री का पैर मोड़कर उसकी हड्डी तोड़ दी। पीड़िता की मां ने बताया कि चिकित्सक की ओर से पूर्व में ऑपरेशन के नाम पर कुल 25 हजार रुपये की मांग की गई थी। बाद मे आठ हजार रुपये लिए गए।
 
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रॉड डालने को लिये गए रुपये, आरोप बेबुनियाद: डॉ. संजय वर्मा
जिला चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. संजय वर्मा ने बताया कि उनकी ओर से शिकायत की जांच कराई गई है। बताया कि किशोरी के पैर का ऑपरेशन करीब दो माह पहले किया गया था। चिकित्सक की ओर से बाहर से मंगाकर पैर में रॉड डाली गई। जिसकी कीमत आठ हजार रुपये अदा की गई थी। ऑपरेशन के बाद किशोरी को चलाया नहीं गया। जिससे उसका घुटना जाम हो गया। जांच के दौरान घुटना चलाने का प्रयास किया गया तो वह पीड़ा से चिल्लाई।
 

रुपये लेने का आरोप बेबुनियाद : चतुर्वेदी
आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पीके चतुर्वेदी का कहना है कि किशोरी का सही ऑपरेशन किया गया था। तीमारदारों ने लापरवाही की। रुपये लेने का आरोप गलत है। उन्हें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। अधिकारियों को वह अपना पक्ष बता चुके हैं।

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