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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   Muzaffarnagar: Daughter cremated father Master Harendra Singh, only son had died eight months ago.

Muzaffarnagar: बेटी मनु ने दी पिता मास्टर हरेंद्र सिंह को मुखाग्नि, इकलौते बेटे का आठ माह पहले हो गया था निधन

Tue, 02 Jun 2026 10:34 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Tue, 02 Jun 2026 10:34 PM IST
सार

सिखेड़ा क्षेत्र के बहादुरपुर खेड़ी वीरान में मास्टर हरेंद्र सिंह का निधन हो गया। बेटे की हादसे में मौत हो गई थी तो परिवार में सिर्फ बेटियां ही हैं। अपनी ससुराल से आई मझली बेटी मनु ने समाज के लोगों की सहमति मिलने पर पिता की चिता को मुखाग्नि दी। 

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Muzaffarnagar: Daughter cremated father Master Harendra Singh, only son had died eight months ago.
पिता की चिता को मुखाग्नि देती बेटी मनु। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंसान के जन्म से लेकर अंतिम पड़ाव तक सामाजिक नियम भी साथ चलते हैं। सदियों से चले आ रहे यही नियम अटूट परंपरा है। समाज ने ही मुखाग्नि देने का दायित्व बेटों या परिवार के पुरुषों के हिस्से में रखा। बहादुरपुर खेड़ी वीरान में बुजुर्ग मास्टर हरेंद्र सिंह का निधन हो गया। घर में सिर्फ बेटियां होने के कारण सवाल मुखाग्नि तक पहुंचा। मंझली बेटी मनु ने श्मशान घाट तक जाने का फैसला किया। आंखों में आंसू लिए ग्रामीणों ने हौसला बढ़ाया तो बेटी ने पिता की चिता में आग लगाई। पिता पंचतत्व में विलीन हुए और परंपरा जलकर राख हो गई।
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जानसठ सड़क स्थित बहादुरपुर में बुजुर्ग मास्टर हरेंद्र सिंह अपनी पत्नी के साथ गांव में रह रहे थे। परिवार की तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है। इकलौते बेटे रजत उर्फ बिट्टू का करीब आठ महीने पहले जौली नहर में हुए हादसे में निधन हो गया था। मास्टर हरेंद्र सिंह की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए सैकड़ों ग्रामीण श्मशान घाट पर पहुंचे। इस दौरान माहौल बेहद भावुक था। हर किसी की आंखें नम थीं। मंझली बेटी ससुराल मोघपुर से पिता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची। उसने ग्रामीणों के बीच अपने पिता को मुखाग्नि देने का साहसिक निर्णय लिया। परिवार और गांव के सभी लोगों ने उसके इस निर्णय का सम्मान किया। उन्होंने मनु को मुखाग्नि देने पर सहमति दे दी।
 
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बेटी को ना नहीं कह सका गांव
असल में बुजुर्ग मास्टर हरेंद्र सिंह की विनम्रता के कारण सब उनका सम्मान करते थे। अंतिम यात्रा में भी काफी लोग शामिल हुए। मास्टर दानवीर सिंह ने बताया कि बेटी मनु ने पिता को मुखाग्नि देने की बात कही तो ग्रामीण मना नहीं कर पाए। डबडबाई आंखों से बेटी ने पिता का अंतिम संस्कार किया।
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जब श्मशान घाट पहुंच गई थीं सैकड़ों महिलाएं
किसान मसीहा दिवंगत चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने भी महिलाओं को अंतिम संस्कार के दौरान श्मशान घाट तक लाने की पहल की थी। असल में टिकैत की मां मुख्त्यारी देवी का निधन हुआ। सिसौली स्थित आवास पर सैकड़ों महिलाएं भी खड़ी थीं। अंतिम यात्रा शुरू हुई तो टिकैत की सहमति मिलते ही महिलाएं श्मशान घाट तक गई थीं।

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