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स्वर सम्रागी लता मंगेशकर को संगीत प्रेमियों ने गीतों से दी श्रद्धांजलि
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भायला कलां गांव में गीतों से स्वर सम्रागी लता मंगेशकर को श्रद्धांजलि देते संगीत प्रेमी
- फोटो : DEVBAND
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लता मंगेशकर को संगीत प्रेमियों ने गीतों से दी श्रद्धांजलि
देवबंद। संस्कार भारती के तत्वाधान में रविवार को भायला कलां गांव में स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर की श्रद्धांजलि समागम का आयोजन किया गया। जिसमें संगीत एवं कला प्रेमियों ने लता मंगेशकर को उनके गीतों का गायन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में संस्कार भारती के सहारनपुर विभाग संयोजक डॉ. लोकेश वत्स ने कहा कि लता मंगेशकर वास्तव में हमारे राष्ट्र के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक अनमोल रत्न रही। गीत संगीत के क्षेत्र में कला प्रेमियों के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है। लेकिन लता जी अपने गीतों के माध्यम से सदैव अमर रहेंगी। कोषाध्यक्ष स्तुति शर्मा ने कहा कि लता मंगेशकर ने भारतीय गायन क्षेत्र को जो अनमोल गीत दिए हैं वह गीत अतुलनीय है। लता दीदी जैसा न कोई हुआ है और न कोई होगा। मुख्य अतिथि रघुनाथ पंडित ने कहा लता मंगेशकर की आवाज में जो सादगी व गहराई थी, वह अन्य किसी आवाज में नहीं दिखती। विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता विजेंद्र कुमार ने कहा कि लता मंगेशकर ने गीत गायन को पूजा की तरह साधना की। आज के गायकों को उनके जीवन व गायन शैली से शिक्षा लेनी चाहिए। संचालन मुकुल गुप्ता ने किया। इस मौके पर आयुष त्यागी, वीरेंद्र प्रताप सिंह, मोहित कश्यप, मन्नु शर्मा, अर्श, सोनिया, राधा, मो. अब्दुल्ला व आशु आदि रहे।
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देवबंद। संस्कार भारती के तत्वाधान में रविवार को भायला कलां गांव में स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर की श्रद्धांजलि समागम का आयोजन किया गया। जिसमें संगीत एवं कला प्रेमियों ने लता मंगेशकर को उनके गीतों का गायन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में संस्कार भारती के सहारनपुर विभाग संयोजक डॉ. लोकेश वत्स ने कहा कि लता मंगेशकर वास्तव में हमारे राष्ट्र के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक अनमोल रत्न रही। गीत संगीत के क्षेत्र में कला प्रेमियों के लिए उनका जाना अपूरणीय क्षति है। लेकिन लता जी अपने गीतों के माध्यम से सदैव अमर रहेंगी। कोषाध्यक्ष स्तुति शर्मा ने कहा कि लता मंगेशकर ने भारतीय गायन क्षेत्र को जो अनमोल गीत दिए हैं वह गीत अतुलनीय है। लता दीदी जैसा न कोई हुआ है और न कोई होगा। मुख्य अतिथि रघुनाथ पंडित ने कहा लता मंगेशकर की आवाज में जो सादगी व गहराई थी, वह अन्य किसी आवाज में नहीं दिखती। विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता विजेंद्र कुमार ने कहा कि लता मंगेशकर ने गीत गायन को पूजा की तरह साधना की। आज के गायकों को उनके जीवन व गायन शैली से शिक्षा लेनी चाहिए। संचालन मुकुल गुप्ता ने किया। इस मौके पर आयुष त्यागी, वीरेंद्र प्रताप सिंह, मोहित कश्यप, मन्नु शर्मा, अर्श, सोनिया, राधा, मो. अब्दुल्ला व आशु आदि रहे।
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