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Muzaffarnagar News: मुनि भव्य भूषण महाराज ने समाधि ली, जैन समाज ने दी विनयांजलि
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खतौली। जैन मुनि भव्य भूषण जी महाराज की समाधि पर श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विनयांजलि दी। इस दौरान जैन समाज के सैंकड़ों लोग मौजूद रहे। जैन समाज के लोग जैन मुनि की डोला यात्रा लेकर कुंद कुंद जैन क्रीड़ा स्थल पर पहुंचे, जहां अंतिम क्रिया की गई।
जैनाचार्य भारत भूषण मुनिराज से दीक्षित उनके परम शिष्य मुनि भव्य भूषण महाराज ने बृहस्पतिवार सुबह बाबा भगीरथ वर्णी की ओर से स्थापित पदम प्रभु दिगंबर जैन मंदिर मोहल्ला कानून गोयान में उत्कृष्ट समाधि पूर्वक अपने नश्वर शरीर का त्याग कर समाधि मरण को प्राप्त किया।
जैन मुनि महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों, अहिंसा, करुणा और तपस्या के प्रसार में समर्पित कर दिया। जैन मुनि को आचार्य भारत भूषण मुनिराज ने 27 नवंबर 2011 को तीर्थ क्षेत्र पर दीक्षा प्रदान की थी। उन्होंने हजारों लोगों के जीवन को सही दिशा दी और उनकी शिक्षाएं युगों-युगों तक मानवता का कल्याण करती रहेंगी, उनका संयम पथ पर अडिग रहना और समता भाव हम सभी के लिए अनुकरणीय है। सभी जैन समाज के सदस्यों ने उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए पुण्यात्मा के मोक्ष की कामना की। महाराज जी का 11 नवंबर को नगर में आगमन हुआ था।ग
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जैनाचार्य भारत भूषण मुनिराज से दीक्षित उनके परम शिष्य मुनि भव्य भूषण महाराज ने बृहस्पतिवार सुबह बाबा भगीरथ वर्णी की ओर से स्थापित पदम प्रभु दिगंबर जैन मंदिर मोहल्ला कानून गोयान में उत्कृष्ट समाधि पूर्वक अपने नश्वर शरीर का त्याग कर समाधि मरण को प्राप्त किया।
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जैन मुनि महाराज ने अपना संपूर्ण जीवन जैन धर्म के सिद्धांतों, अहिंसा, करुणा और तपस्या के प्रसार में समर्पित कर दिया। जैन मुनि को आचार्य भारत भूषण मुनिराज ने 27 नवंबर 2011 को तीर्थ क्षेत्र पर दीक्षा प्रदान की थी। उन्होंने हजारों लोगों के जीवन को सही दिशा दी और उनकी शिक्षाएं युगों-युगों तक मानवता का कल्याण करती रहेंगी, उनका संयम पथ पर अडिग रहना और समता भाव हम सभी के लिए अनुकरणीय है। सभी जैन समाज के सदस्यों ने उनके दिखाए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हुए पुण्यात्मा के मोक्ष की कामना की। महाराज जी का 11 नवंबर को नगर में आगमन हुआ था।ग
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