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मम्मी ! पैसे देकर मुझे छुड़ा लो 

Fri, 17 Feb 2017 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Fri, 17 Feb 2017 12:24 AM IST
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Mummy ! Take me with money freed
पुलिस से नोकझोंक करते भाजपा नेता। - फोटो : अमर उजाला
मुफलिसी से जूझती जिंदगी और दबंगई की दहशत ने एक बेटी को जीवन की सांसे खुद ही तोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। कई साल पहले शामली से यह परिवार जीवन-यापन के लिए शहर आया था। पिता और भाई पर छाए खतरे से महिमा इतनी आहत हुई कि सिस्टम में कोई सुनवाई नहीं होने पर उसने खुदकुशी का कदम उठा लिया।  
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बीते दस दिनों से अंकित विहार का यह परिवार सो नहीं पाया। पिता देव प्रकाश धीमान और भाई अक्षय के गायब होने से घबराई मां-बेटी ने हर चौखट पर गुहार लगाई। क्या राजनेता और क्या अफसर, सब सुनकर टालते रहे। किराए के घर में ऊपरी मंजिल पर एक कमरे में यह परिवार गुजर-बसर कर रहा है। अच्छी तनख्वाह के फेर में पिता ने दूर ललितपुर में मछली ठेके की कंपनी में नौकरी कर ली थी। काम चलने पर बेटे अक्षय को भी वहीं बुला लिया था।
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महिमा की मां संजो देवी एक नर्सिंगहोम में नौकरी कर परिवार चलाने का सहारा बनी हुई थी। घर में बड़ी बेटी मीनाक्षी की शादी सहारनपुर के रामपुर मनिहारन में हो चुकी है। घर में मां संजो छोटी बेटी महिमा और छोटा भाई अमित रहते हैं। ग्रेजुएशन की छात्रा महिमा पढ़-लिखकर परिवार का सहारा बनना चाहती थी। अचानक यह घटना हो गई। कई दिन तक पिता और भाई के बारे में जानकारी नहीं मिलने पर मां-बेटी अवसाद में थीं।
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संजो देवी का कहना है कि अक्षय ने बंधक बनाए जाने के बाद फोन पर कहा था कि यह लोग हमें मार डालेंगे, कुछ पैसों का इंतजाम कर मुझे बचा लो। हम साढ़े चार लाख रुपये कहां से देते। दबंगों से गुहार लगाई थी कि पैसों के बदले मजदूरी करा लो, लेकिन मेरे पति और बेटे को छोड़ दो। महिमा की मौत के बाद उसके साथ पढ़ने वाली सहेली भी बेहोश हो गई। मासूम छोटे भाई के भी आंसू नहीं रुक पाए। बताते चलें कि संजो देवी ने बंधकों की रिहाई न होने पर मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर लखनऊ में आत्मदाह की चेतावनी दी थी।       

पिता के चेहरे पर चोट के निशान      
मुजफ्फरनगर। दबंगों से छूटने के बाद सामने आए देव प्रकाश के चेहरे पर मारपीट के निशान हैं। उसके गले पर भी गहरा घाव है। पूछने पर भी वह कुछ बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। जब महिमा ने आत्महत्या की, उस समय मां संजो देवी अपने छोटे बेटे के साथ कहीं गई हुई थीं। दबंग मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसों का भी लालच देने की कोशिश कर रहे हैं। 

 मामले को दबाने में जुटे दबंग      
मुजफ्फरनगर। मृतका के पिता देव प्रकाश के कई घंटे तक घर नहीं पहुंचने पर पुलिस कार्रवाई रुकी रही। पुलिस अफसरों से सवाल किया गया तो कोई जवाब नहीं मिला कि मृतका का पिता कहां है। तीन घंटे के अंतराल के बाद वह घर पहुंचा, तब मृतका के शव का पंचनामा भरा गया। इसी बीच आरोपी भी पीड़िता के घर पहुंच गए और मामले को दबाने का प्रयास किया।    

सियासी पार्टियों के नुमाइंदे पहुंचे      
मुजफ्फरनगर। पिता और पुत्र को बंधक बनाए जाने का मामला सुर्खियों में आने के बाद बेटी के आत्महत्या करने से मामला तूल पकड़ता दिखाई दिया। सभी सियासी पार्टियों के नुमाइंदे अंकित विहार पहुंच गए। भाजपा विधायक कपिलदेव अग्रवाल, पूर्व नगराध्यक्ष जगदीश पांचाल, बसपा विधायक अनिल कुमार, राकेश शर्मा, पूर्व मंत्री दीपक कुमार आदि ने पहुंचकर मामले की जानकारी ली।    

केस की सीबीआई से जांच हो : हरेंद्र 
मुजफ्फरनगर। राज्यसभा के पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने महिमा आत्महत्या प्रकरण और दबंगों के पिता-पुत्र को बंधक बनाने की सीबीआई जांच कराने की मांग की है। मलिक का आरोप है कि पीड़िता महिमा ने उन्हें फोन कर सफेदपोशों से पिता-पुत्र को रिहा कराने की गुहार लगाई थी। मछली के कारोबार में एक मंत्री और उसके गुर्गे शामिल हैं। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी ने भी भाई की रिहाई नहीं होने पर आहत बहन के आत्महत्या को विवश होने की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।       

आरोपों के घेरे में मंत्री बालियान
मुजफ्फरनगर। छात्रा महिमा की मां संजो देवी ने एसएसपी को प्रार्थना पत्र देकर केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के आदमियों पर पति और बेटे को बंधक बनाए जाने के आरोप लगाए थे। प्रार्थना पत्र में पीड़िता ने पचेंडा के युधिष्ठिर पहलवान का नाम भी लिया था। साथ ही आरोप लगाया था कि पुलिस की मिलीभगत से मछली के धंधे से जुड़े ठेकेदारों ने उसके पति और बेटे को बंधक बनाया हुआ है। घर आकर बार-बार धमकी दी जा रही है।


साढ़े चार लाख रुपये का इंतजाम होने के बाद ही उन्हें रिहा किए जाने की बात कही गई थी। एसएसपी ने ये प्रार्थना पत्र कार्रवाई के लिए नई मंडी पुलिस के पास भेज दिया था। इसके बाद संजो का पति देवप्रकाश नई मंडी थाने पहुंचे और संजो का प्रार्थनापत्र वापस ले लिया। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान के निजी सचिव नवीन चौधरी ने कहा कि इस मामले से मंत्री का कोई लेना-देना नहीं है। मंत्री जी के न ठेके हैं और न ही आरोपियों से कोई ताल्लुक है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। पीड़ित परिवार से मंत्री कभी मिले नहीं हैं और न ही उन्हें जानते हैं। कुछ लोग बेहवजह गलतबयानी कर रहे हैं। 
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