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डिजिटल शिक्षा की राह नहीं दिखा पाए प्रोजेक्टर
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प्रोजेक्टर... पुरकाजी पूर्व माध्यमिक विद्यालय में प्रोजेक्टर से पढ़ाई करते छात्र।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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डिजिटल शिक्षा की राह नहीं दिखा पाए प्रोजेक्टर
मुजफ्फरनगर। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को डिजिटल शिक्षा देने की राह दम तोड़ती नजर आ रही है। बेहतर शिक्षा के लिए स्कूलों में भेजे गए प्रोजेक्टर कई स्कूलों में बक्सों से बाहर ही नहीं निकले। कहीं पर चालू किए गए तो अफसरों ने बीआरसी पर मंगा लिए। छात्र-छात्राओं को इन प्रोजेक्टर से शिक्षा पाने का मौका कभी-कभार ही मिल पाता है।
मल्टी सेक्टोरियल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट प्लान (एमएसडीपी) के तहत साइबर ग्राम योजना के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों को 32 प्रोजेक्टर दिए थे। इन प्रोजेक्टर के माध्यम से परिषदीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं को शिक्षा दी जानी थी। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि ज्यादातर प्रोजेक्टर या तो बक्सों में बंद रखे हैं या फिर उन्हें ब्लॉक संसाधन केंद्र पर मंगा लिया गया है। यहां पर प्रोजेक्टर का इस्तेमाल ट्रेनिंग आदि कार्यों के लिए किया जा रहा है। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए खर्च किए गए लाखों रुपयों का कोई लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।
इन स्कूलों को गए थे प्रोजेक्टर
जानसठ ब्लॉक के जटवड़ा, बघरा ब्लॉक के छतैला, तावली, सांझक एवं खतौला, सदर ब्लॉक के कम्हेड़ा, सिखेड़ा, असदनगर, गढ़ी सरवट, बझेड़ी, शेरपुर, नियामतपुर, बागोवाली, सूजड़ू, पुरकाजी, कासमपुर के अतिरिक्त चरथावल और शाहपुर ब्लॉक के चार-चार तथा बुढ़ाना ब्लॉक के 11 विद्यालयों को प्रोजेक्टर दिए गए थे।
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केस एक: पुरकाजी स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल को दिया गया प्रोजेक्टर करीब एक माह से बीआरसी पर है। प्रधानाचार्या मीनाक्षी का कहना है कि शीतकालीन अवकाश के पूर्व ट्रेनिंग के लिए प्रोजेक्टर बीआरसी पर गया था। अभी वहां से वापस नहीं आया, जबकि स्कूली छात्रों का कहना है कि कभी-कभार ही प्रोजेक्टर का संचालन होता है।
केस दो: पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरकाजी में तीन बार चोरी हो चुकी है। कुछ दिन पूर्व भी चोरी हुई थी। मुख्य अध्यापक मुकेश शर्मा का कहना है कि चोरी के दौरान चोरों ने बिजली कनेक्शन काट दिया था। बिजली नहीं आने के कारण कुछ दिन प्रोजेक्टर का संचालन नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि बच्चों को प्रोजेक्टर से शिक्षा दी जाती है।
केस तीन: जानसठ ब्लॉक के गांव जटवाड़ा के प्राथमिक विद्यालय को दिया गया प्रोजेक्टर भी बीआरसी पर है। स्कूल कक्ष में केवल स्क्रीन लग हुई है। मुख्य अध्यापिका शमा परवीन ने बताया कि करीब डेढ़ माह पहले प्रोजेक्टर को ट्रेनिंग कार्यक्रम के चलते बीआरसी पर मंगा लिया गया था।
स्कूलों में प्रोजेक्टर का संचालन नहीं होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलों को प्रोजेक्टर दिए गए हैं, वहां उनका संचालन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा - रामसागर पति त्रिपाठी, बीएसए।
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मुजफ्फरनगर। शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हीलाहवाली के कारण परिषदीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं को डिजिटल शिक्षा देने की राह दम तोड़ती नजर आ रही है। बेहतर शिक्षा के लिए स्कूलों में भेजे गए प्रोजेक्टर कई स्कूलों में बक्सों से बाहर ही नहीं निकले। कहीं पर चालू किए गए तो अफसरों ने बीआरसी पर मंगा लिए। छात्र-छात्राओं को इन प्रोजेक्टर से शिक्षा पाने का मौका कभी-कभार ही मिल पाता है।
मल्टी सेक्टोरियल डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट प्लान (एमएसडीपी) के तहत साइबर ग्राम योजना के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों को 32 प्रोजेक्टर दिए थे। इन प्रोजेक्टर के माध्यम से परिषदीय स्कूलों में छात्र-छात्राओं को शिक्षा दी जानी थी। अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि ज्यादातर प्रोजेक्टर या तो बक्सों में बंद रखे हैं या फिर उन्हें ब्लॉक संसाधन केंद्र पर मंगा लिया गया है। यहां पर प्रोजेक्टर का इस्तेमाल ट्रेनिंग आदि कार्यों के लिए किया जा रहा है। बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए खर्च किए गए लाखों रुपयों का कोई लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है।
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इन स्कूलों को गए थे प्रोजेक्टर
जानसठ ब्लॉक के जटवड़ा, बघरा ब्लॉक के छतैला, तावली, सांझक एवं खतौला, सदर ब्लॉक के कम्हेड़ा, सिखेड़ा, असदनगर, गढ़ी सरवट, बझेड़ी, शेरपुर, नियामतपुर, बागोवाली, सूजड़ू, पुरकाजी, कासमपुर के अतिरिक्त चरथावल और शाहपुर ब्लॉक के चार-चार तथा बुढ़ाना ब्लॉक के 11 विद्यालयों को प्रोजेक्टर दिए गए थे।
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केस एक: पुरकाजी स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल को दिया गया प्रोजेक्टर करीब एक माह से बीआरसी पर है। प्रधानाचार्या मीनाक्षी का कहना है कि शीतकालीन अवकाश के पूर्व ट्रेनिंग के लिए प्रोजेक्टर बीआरसी पर गया था। अभी वहां से वापस नहीं आया, जबकि स्कूली छात्रों का कहना है कि कभी-कभार ही प्रोजेक्टर का संचालन होता है।
केस दो: पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुरकाजी में तीन बार चोरी हो चुकी है। कुछ दिन पूर्व भी चोरी हुई थी। मुख्य अध्यापक मुकेश शर्मा का कहना है कि चोरी के दौरान चोरों ने बिजली कनेक्शन काट दिया था। बिजली नहीं आने के कारण कुछ दिन प्रोजेक्टर का संचालन नहीं हो सका। उन्होंने बताया कि बच्चों को प्रोजेक्टर से शिक्षा दी जाती है।
केस तीन: जानसठ ब्लॉक के गांव जटवाड़ा के प्राथमिक विद्यालय को दिया गया प्रोजेक्टर भी बीआरसी पर है। स्कूल कक्ष में केवल स्क्रीन लग हुई है। मुख्य अध्यापिका शमा परवीन ने बताया कि करीब डेढ़ माह पहले प्रोजेक्टर को ट्रेनिंग कार्यक्रम के चलते बीआरसी पर मंगा लिया गया था।
स्कूलों में प्रोजेक्टर का संचालन नहीं होने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में जानकारी कर कार्रवाई की जाएगी। जिन स्कूलों को प्रोजेक्टर दिए गए हैं, वहां उनका संचालन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा - रामसागर पति त्रिपाठी, बीएसए।