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सांसद बालियान, विधायक मलिक का कोर्ट में सरेंडर 

Sat, 20 Jan 2018 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Sat, 20 Jan 2018 12:00 AM IST
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MP surrenders in Muzaffarnagar court
कोर्ट में ‌समर्पण करने जाते सांसद संजीव बालियान। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कवाल कांड को लेकर नंगला मंदौड़ में हुई महापंचायत में भड़काऊ भाषण देने के मामले में गैर जमानती वारंट जारी होने पर शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान, बुढ़ाना के भाजपा विधायक उमेश मलिक और पूर्व ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र सिंह ने अदालत में सरेंडर कर दिया।
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कोर्ट ने उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया। बाद में दोनों की ओर से 30-30 हजार रुपये के निजी मुचलके दाखिल करने पर कोर्ट ने वारंट निरस्त किए। अदालत ने दोनों पर आरोप तय करने के लिए 29 जनवरी की तारीख नियत की है। 
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साढ़े चार साल पूर्व हुए कवाल कांड को लेकर 31 अगस्त 2013 को नंगला मंदौड़ में महापंचायत हुई थी। जिसमें भाजपाइयों समेत अन्य लोगों द्वारा भड़काऊ भाषण पर पुलिस की ओर से सिखेड़ा थाने पर मुकदमे दर्ज किए गए थे। जो वर्तमान में कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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सिखेड़ा थाने पर दर्ज अपराध संख्या 173/13 के मुकदमे में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा सांसद डॉ संजीव बालियान, बुढ़ाना से बीजेपी विधायक उमेश मलिक भी आरोपी हैं। इस मुकदमे में तारीख पर कोर्ट में पेश नहीं होने पर अदालत से इनके खिलाफ गत 15 दिसंबर को गैर जमानती वारंट जारी किए थे।

कोर्ट ने 19 जनवरी की तारीख निर्धारित की थी। शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक ने एसीजेएम द्वितीय मधु गुप्ता की कोर्ट में सरेंडर किया, उन्हें न्यायिक हिरासत में लिया गया।

उनके अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह की ओर से एनबीडब्ल्यू निरस्त करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दोनों के 30-30 हजार रुपये के निजी मुचलके दाखिल कराते हुए वारंट निरस्त कर दिए। अदालत ने दोनों पर आरोप निर्धारण के लिए 29 जनवरी की तारीख नियत की है।

तीन अन्य ने भी सरेंडर किया 
मुजफ्फरनगर। नंगला मंदौड़ की महापंचायत के संबंध में ही सिखेड़ा थाने पर दर्ज अपराध संख्या 178/13 में अदालत ने अन्य आरोपियों के खिलाफ भी गैर जमानती वारंट जारी किए थे। जिसमें शुक्रवार को पूर्व ब्लॉक प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन और भैंसी के पूर्व प्रधान जयप्रकाश शास्त्री ने भी अदालत में सरेंडर किया। इनके द्वारा भी व्यक्तिगत मुचलके जमा कराए जाने पर अदालत ने वारंट निरस्त किए। अदालत ने इस मामले को सेशन सुपुर्द करने के लिए 22 जनवरी की तारीख लगाई है। 

सोम, राणा, भारतेंद्र और साध्वी प्राची नहीं हुए पेश 
वरिष्ठ अधिवक्ता चंद्रवीर सिंह ने बताया कि नंगला मंदौड़ की 31अगस्त 2013 और सात सितंबर 2013 को हुई महापंचायतों में भड़काऊ भाषण देने, धार्मिक उन्माद फैलाने, निशेषज्ञा उल्लंघन आदि के आरोप में दर्ज किए गए दोनों मुकदमों में शुक्रवार को कोर्ट में तारीख थी।

किसी कारणवश इन मुकदमों में आरोपी बनाए गए सूबे के गन्ना विकास एवं चीनी मिल राज्यमंत्री सुरेश राणा, सरधना के बीजेपी विधायक संगीत सोम, बिजनौर सांसद भारतेंद्र सिंह, साध्वी प्राची आदि कोर्ट में पेश नहीं हो सके। जिनकी अदालत में हाजिरी माफी की अर्जी दी गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। 

हमने महापंचायत में जाने का अपराध किया : बालियान 
कोर्ट में वारंट रिकॉल कराने के बाद बाहर आए सांसद डॉ संजीव बालियान ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि कवाल कांड के बाद नंगला मंदौड़ की पंचायत में शामिल होने का हमने अपराध किया था। तब हालात ऐसे थे, जो हमें उचित लगा, हमने किया। इसी मामले में कोर्ट से वारंट जारी हुए थे। संसदीय कार्यवाही के कारण कोर्ट में पेश नहीं हो सके थे, हमने कोर्ट का सम्मान करते हुए आज वारंट रिकॉल कराए हैं। 

क्या था नंगला मंदौड़ का मामला 
2013 की 27 अगस्त को जानसठ थाना क्षेत्र के गांव कवाल में हुई मलिकपुरा के ममेरे-फुफेरे भाइयों सचिन और गौरव की हत्या के विरोध में हिंदू संगठनों ने नंगला मंदौड़ गांव में 31 अगस्त और फिर सात सितंबर 2013 को महापंचायत की थी। सात सितंबर की महापंचायत से लौटते लोगों पर हमला होने के बाद जिले में दंगा भड़क गया था।


दंगा होने पर सपा सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने सिखेड़ा थाने पर इन महापंचायतों में भाग लेने वाले थानाभवन के विधायक सुरेश राणा, सरधना के विधायक संगीत सोम, डॉ संजीव बालियान, भारतेंद्र सिंह, उमेश मलिक, साध्वी प्राची, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन, जयप्रकाश शास्त्री, राजेश्वर आर्य, मोनू, सचिन, सोनू, अंशुल आदि के खिलाफ पाबंदी के बावजूद पंचायत करना, भड़काऊ भाषण देने के आरोप में मुकदमे दर्ज कराए गए थे।
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