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मोहल्ले से विकास दूर, लोग मकान बेचने को मजबूर
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दक्षिणी खालापार में एक मकान की दीवार पर लिखा मकान बिकाऊ है का इस्तेहार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
मोहल्ले से विकास दूर, लोग मकान बेचने को मजबूर
मुजफ्फरनगर। नगर के दक्षिणी खालापार, मक्की नगर, इब्राहीम मस्जिद की गली, रऊफ परचूनिया की गली, गुलजार बिजली वालों की गली समेत अन्य कई गलियों में हर तीसरे-चौथे मकान की दीवारों पर मकान बिकाऊ है लिखा देखकर कोई भी ठिठकने को मजबूर हो जाएगा। दरअसल यहां के लोगों का अपना दर्द है। अच्छी सड़क और साफ-सफाई की चाह उन्हें मकान बेचने को मजबूर कर रही है। गुलजार बिजलीवालों की गली में गुलजार अहमद, खुशनुमा, शफी, शमशीदा अपने मकान बेचकर जा चुके हैं। यहां के निवासी दिलशाद बताते हैं कि उनकी गली की सड़क 20 साल से नहीं बनी। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। ऐसे माहौल में कौन रहना चाहेगा। मोहम्मद आलम, आजम और दिलशाद एक दिन भी यहां नहीं रहना चाहते। कहते हैं कि कोई खरीदार मिले तो तुरंत अपना मकान बेच दें। गुलजार बिजली वाले, सलीम अहमद, हसीन अहमद का कहना है कि मोहल्ले में सड़कें नहीं हैं। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। साफ-सफाई कभी होती है, ऐसे माहौल से तो अपने गांव लौट जाना बेहतर है। यहीं के रहने वाले नन्हे बताते हैं कि यहां पर बसे ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं। वर्षों से देख रहे हैं कि आसपास की किसी भी गली में कोई नई सड़क नहीं बनी। बारिश हो तो हर गली कीचड़ से भर जाती है। कब्रिस्तान तक भी कीचड़ से जाना पड़ता है। हालात इतने खराब हैं कि कोई भी व्यक्ति यहां रहना नहीं चाहता है।
इन्होंने कहा...
यह सही है कि दक्षिणी खालापार, मक्कीनगर और आसपास के बड़ी संख्या में लोग अपने मकान बेचना चाहते हैं। लोग विकास चाहते हैं। हमने यहां पर सड़कें, नालियां बनवाने के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन प्रस्ताव अधर में ही लटके रह गए - राहत, सभासद के पति।
दक्षिणी खालापार की कई सड़कें बनने लायक हैं। मैं 14वें वित्त से इन सड़कों का निर्माण कराना चाहती थी, लेकिन बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गई। मेरी कोशिश है कि सभी वार्डों में समान रूप से काम हो - अंजू अग्रवाल, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद।
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मुजफ्फरनगर। नगर के दक्षिणी खालापार, मक्की नगर, इब्राहीम मस्जिद की गली, रऊफ परचूनिया की गली, गुलजार बिजली वालों की गली समेत अन्य कई गलियों में हर तीसरे-चौथे मकान की दीवारों पर मकान बिकाऊ है लिखा देखकर कोई भी ठिठकने को मजबूर हो जाएगा। दरअसल यहां के लोगों का अपना दर्द है। अच्छी सड़क और साफ-सफाई की चाह उन्हें मकान बेचने को मजबूर कर रही है। गुलजार बिजलीवालों की गली में गुलजार अहमद, खुशनुमा, शफी, शमशीदा अपने मकान बेचकर जा चुके हैं। यहां के निवासी दिलशाद बताते हैं कि उनकी गली की सड़क 20 साल से नहीं बनी। जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। ऐसे माहौल में कौन रहना चाहेगा। मोहम्मद आलम, आजम और दिलशाद एक दिन भी यहां नहीं रहना चाहते। कहते हैं कि कोई खरीदार मिले तो तुरंत अपना मकान बेच दें। गुलजार बिजली वाले, सलीम अहमद, हसीन अहमद का कहना है कि मोहल्ले में सड़कें नहीं हैं। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। साफ-सफाई कभी होती है, ऐसे माहौल से तो अपने गांव लौट जाना बेहतर है। यहीं के रहने वाले नन्हे बताते हैं कि यहां पर बसे ज्यादातर लोग मजदूरी करते हैं। वर्षों से देख रहे हैं कि आसपास की किसी भी गली में कोई नई सड़क नहीं बनी। बारिश हो तो हर गली कीचड़ से भर जाती है। कब्रिस्तान तक भी कीचड़ से जाना पड़ता है। हालात इतने खराब हैं कि कोई भी व्यक्ति यहां रहना नहीं चाहता है।
इन्होंने कहा...
यह सही है कि दक्षिणी खालापार, मक्कीनगर और आसपास के बड़ी संख्या में लोग अपने मकान बेचना चाहते हैं। लोग विकास चाहते हैं। हमने यहां पर सड़कें, नालियां बनवाने के लिए खूब प्रयास किए, लेकिन प्रस्ताव अधर में ही लटके रह गए - राहत, सभासद के पति।
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दक्षिणी खालापार की कई सड़कें बनने लायक हैं। मैं 14वें वित्त से इन सड़कों का निर्माण कराना चाहती थी, लेकिन बैठक में इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी गई। मेरी कोशिश है कि सभी वार्डों में समान रूप से काम हो - अंजू अग्रवाल, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद।
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