बड़ा मामला: कोरोना की दवाई बेचकर किया लाखों रुपये का खेल, मिलीं थीं दस क्विंटल से अधिक दवाइयां
छापामारी के दौरान मिलीं दस क्विंटल से अधिक दवाइयों के मामले में कई बड़े खुलासे हुए हैं। इससे औषधि विभाग भी सकते में है।
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद के गांव शेरनगर में ग्राम प्रधान के भाई के घर से छापामारी के दौरान दस क्विंटल से अधिक दवाइयां मिलीं थीं। इनमें कोरोना के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाइयां भी बरामद हुईं थीं, जिन पर ‘दिल्ली गर्वनमेंट नॉट फॉर सेल’ लिखा मिलने से औषधि विभाग भी सकते में है। औषधि निरीक्षक की तहरीर पर दर्ज रिपोर्ट के बाद गिरफ्त में आए आरोपी से पूछताछ में महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा हुआ है।
नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के गांव शेरनगर में 12 जून को सिटी मजिस्ट्रेट अभिषेक सिंह, औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद व इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने ग्राम प्रधान इकराम के भाई इनाम के घर दबिश दी थी। मौके पर बड़े पैमाने पर एक्सपायर दवाइयां बरामद हुईं थीं। तीन जिलों की औषधि विभाग की टीमों ने तीन दिन तक लगातार बरामद दवाइयों की जांच-पड़ताल की थी, जिसके बाद औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने आरोपी इनाम के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान आरोपी के घर से कोरोना के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाई ‘एजी-थ्रोमाइसिन-500 एमजी’ भी बरामद हुई थी। इन दवाइयों के पत्तों पर ‘दिल्ली गर्वनमेंट नॉट फॉर सेल’ प्रिंट था, जिससे साफ था कि ये दवाइयां दिल्ली से यहां तक लाईं गईं, जिन्हें कोरोना काल में बेचकर लाखों के वारे-न्यारे किए गए।
इसके अलावा जो दूसरी सबसे महत्वपूर्ण दवाई आरोपी के घर से मिली, वह ‘पेंटॉवल-एलएस’ कैप्सूल है, जो एसिडिटी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस दवाई का जितना भी स्टॉक मिला है, वह सभी एक्सपायर है।
गांव शेरनगर में इनाम के घर से बरामद दवाइयों में मिली दिल्ली सरकार की कोरोना की दवाइयां मिलने से स्वास्थ्य महकमे में खलबली मच गई है। जिला औषधि विभाग ने यह दवाई आरोपी के घर तक कैसे पहुंची, विभाग इसकी जांच में जुटा है।
गांव शेरनगर निवासी इनाम के घर से छापा में बरामद एक्सपायर दवाइयों में शामिल दिल्ली सरकार की नॉट फॉर सेल वाली कोरोना की दवाइयां मिलने से हर कोई सकते में है। दरअसल, ये दवाइयां केवल सरकारी अस्पतालों में ही इस्तेमाल की जा सकती हैं और संबंधित कंपनी नॉट फॉर सेल लिखीं इन दवाइयों को खुले मार्केट में या डिस्ट्रीब्यूटर्स के यहां सप्लाई नहीं कर सकतीं। ऐसे में औषधि विभाग के समक्ष बड़ा सवाल यही है कि आखिर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों से कोरोना मरीज के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवाई आरोपी के घर तक कैसे पहुंचीं। इन्हें दिल्ली के अस्पतालों से चोरी कर यहां लाया गया या फिर दिल्ली सरकार का ही कोई कर्मचारी भी इन सरकारी दवाइयों की अवैध खरीद-फरोख्त में शामिल है।
इन्होंने कहा...
- जिला औषधि निरीक्षक लवकुश प्रसाद ने नई मंडी थाने में दर्ज कराई गई रिपोर्ट में बताया कि आरोपी इनाम के घर से दस क्विंटल से अधिक दवाइयां बरामद हुईं हैं। इनमें से 90 फीसदी दवाइयां एक्सपायर हैं। सभी दवाइयों को 95 बोरों में भरकर सील किया गया है।
- इंस्पेक्टर अनिल कपरवान ने बताया कि पूछताछ में आरोपी इनाम ने बताया कि एक्सपायर दवाइयां डिस्ट्रीब्यूटर्स से औने-पौने दाम में खरीदने की जानकारी दी है। इन दवाइयों की प्रिंटिंग एक केमिकल से मिटाने के बाद नई तिथि री-प्रिंट कर इन्हें देहात क्षेत्र में सप्लाई किया जा रहा था।
- जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. योगेंद्र त्रिखा ने बताया कि ‘एजी-थ्रोमाइसिन-500 एमजी’ दवाई कोरोना के मरीजों के इलाज में महत्वपूर्ण घटक के रूप में इस्तेमाल की जा रही है। यह एंटी-बायोटिक व एंटी-फीवर है, जिसकी कोरोना काल में काफी डिमांड रही है। एक्सपायर दवाइयां खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन ये किसी तरह का फायदा नहीं करतीं।