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मीरापुर उपचुनाव : मुसलमानों के रुख पर होगी नजर, भाजपा से गठबंधन के बाद चुनाव में रालोद का कड़ा इम्तिहान
Tue, 29 Oct 2024 09:26 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Tue, 29 Oct 2024 09:26 PM IST
सार
इस सीट पर करीब सवा लाख मुस्लिम मतों पर सबकी निगाह है। सपा से सुम्बुल राना, बसपा से शाह नजर और आसपा से जाहिद हुसैन चुनाव मैदान में हैं। रालोद-भाजपा गठबंधन से मिथलेश पाल को टिकट मिला है।
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ईवीएम
- फोटो : adobe stock
विस्तार
मीरापुर उपचुनाव में मुस्लिमों का रुख नतीजे तय करेगा। मतदान प्रतिशत से लेकर मुस्लिमों के साथ प्लस के समीकरण पर चुनाव टिका है। जाट-मुस्लिम और दलित-मुस्लिम के फार्मूले का असर यहां चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर चुका है।
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मीरापुर क्षेत्र के कवाल गांव में ही करीब 11 साल पहले भड़की दंगे की चिंगारी से मुजफ्फरनगर जल उठा था। दंगे के बाद से नए सियासी समीकरण बने। साल 2022 में सपा-रालोद गठबंधन ने भाजपा को चित कर दिया था।
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लेकिन इस बार रालोद का गठबंधन भाजपा के साथ है। नए गठबंधन के साथ मिलकर उपचुनाव में रालोद की साख भी दांव पर लगी है। असल में इसी सीट वाली बिजनौर लोकसभा से रालोद के चंदन चौहान सांसद हैं। उनके सांसद बन जाने से ही मीरापुर सीट खाली हुई है। ऐसे में रालोद के सामने खुद को साबित करने का इम्तिहान है।
करीब 1.20 लाख मुस्लिम मतों की चाल पर सबकी निगाह है। सपा से सुम्बुल राना, बसपा से शाह नजर और आसपा से जाहिद हुसैन चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिमों का रुख क्या रहता है, मुस्लिम दूसरी किस बिरादरी के साथ मिलकर समीकरण बनाकर नतीजों पर असर डालते हैं, सपा का पीडीए फार्मूला यहां कितना कारगर रहता है।
मीरापुर में कितना नल चलाएंगे मुस्लिम
सपा से अलग हो जाने के बाद रालोद का यह पहला विधानसभा चुनाव है। देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिम समाज के मतदाता रालोद पर कितना भरोसा जताते हैं। यहीं से साल 2027 के समीकरण भी बनने शुरू हो जाएंगे।
सपा से अलग हो जाने के बाद रालोद का यह पहला विधानसभा चुनाव है। देखने वाली बात यह होगी कि मुस्लिम समाज के मतदाता रालोद पर कितना भरोसा जताते हैं। यहीं से साल 2027 के समीकरण भी बनने शुरू हो जाएंगे।
इस तरह रहे पिछले तीन चुनाव के नतीजे
2012 के चुनाव में बसपा के टिकट पर मौलाना जमील अनुसूचित जाति और मुस्लिम समीकरण से विधायक बन गए थे। 2017 में योगी लहर के बावजूद भाजपा के अवतार भड़ाना अपने विपक्षी सपा-कांग्रेस गठबंधन के लियाकत अली से सिर्फ 193 वोटों के अंतर से जीते थे। 2022 में मुस्लिम, जाट और गुर्जर मतों की बदौलत चंदन चौहान जीत गए थे।
2012 के चुनाव में बसपा के टिकट पर मौलाना जमील अनुसूचित जाति और मुस्लिम समीकरण से विधायक बन गए थे। 2017 में योगी लहर के बावजूद भाजपा के अवतार भड़ाना अपने विपक्षी सपा-कांग्रेस गठबंधन के लियाकत अली से सिर्फ 193 वोटों के अंतर से जीते थे। 2022 में मुस्लिम, जाट और गुर्जर मतों की बदौलत चंदन चौहान जीत गए थे।
मोरना-मीरापुर से कब कौन रहा विधायक
साल पार्टी विधायक
1967 कांग्रेस राजेंद्र दत्त त्यागी
1969 बीकेडी धर्मवीर त्यागी
1974 कांग्रेस नारायण सिंह
1977 जनता पार्टी नारायण सिंह
1980 जनता एस मेहंदी असगर
1985 कांग्रेस सईदुज्जमां
1989 जनता दल अमीर आलम
1991 भाजपा रामपाल सिंह
1993 भाजपा रामपाल सिंह
1996 सपा संजय सिंह
2002 बसपा राजपाल सैनी
2007 रालोद कादिर राना
2009 रालोद मिथलेश पाल
2012 बसपा मौलाना जमील
2017 भाजपा अवतार भड़ाना
2022 रालोद चंदन चौहान
साल पार्टी विधायक
1967 कांग्रेस राजेंद्र दत्त त्यागी
1969 बीकेडी धर्मवीर त्यागी
1974 कांग्रेस नारायण सिंह
1977 जनता पार्टी नारायण सिंह
1980 जनता एस मेहंदी असगर
1985 कांग्रेस सईदुज्जमां
1989 जनता दल अमीर आलम
1991 भाजपा रामपाल सिंह
1993 भाजपा रामपाल सिंह
1996 सपा संजय सिंह
2002 बसपा राजपाल सैनी
2007 रालोद कादिर राना
2009 रालोद मिथलेश पाल
2012 बसपा मौलाना जमील
2017 भाजपा अवतार भड़ाना
2022 रालोद चंदन चौहान