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ग्रामीण अंचल में शिक्षा स्तर उच्च करने में जुटे है बलवाखेड़ी के शिक्षक

Tue, 08 Sep 2020 11:57 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 08 Sep 2020 11:57 PM IST
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Mayaram Sharma, raising awareness for education in villages
बलवाखेडी में बच्चों को पढ़ाते रिटायर शिक्षक मायाराम शर्मा - फोटो : MUZAFFARNAGAR
ग्रामीण अंचल में शिक्षा की अलख जगा रहे मायाराम शर्मा
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चरथावल। मास्टर मायाराम शर्मा क्षेत्र की ऐसी शख्सियत हैं, जो रिटायरमेंट के बाद से ग्रामीण अंचल के बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने में जुटें है। गांव की बेटियां पढ़ लिखकर गांव का गौरव बढ़ाएं, यहीं उनका सपना है। घर में उन्होंने ब्लैक बोर्ड लगा रखा है। अपने पसंदीदा विषय गणित में वह कक्षा 10 तक के बच्चों को दक्ष करने का कोई शुल्क नहीं लेते हैं।

चरथावल ब्लॉक का सहारनपुर की सीमा से सटा आखिरी गांव बलवाखेड़ी है। यहां के ख्यातिलब्ध वैद्य रहे रतीराम के पुत्र मायाराम शर्मा को परिषदीय स्कूल से रिटायर हुए 12 साल हो चुके हैं। वर्ष 1969 में 100 रुपये के मामूली वेतन पर परिषदीय स्कूल में नौकरी ज्वाइन की थी। 2008 में वह गुनियाजुड़ी के जूनियर हाईस्कूल से रिटायर हुए थे। बकौल उनके सरकार उन्हें पेंशन समाजसेवा के लिए देती है। शहर से दूर बसे गांव की बेटियां पढ़ें और नाम रोशन करे, इसी मकसद को लेकर उन्होंने घर पर सुबह और शाम निशुल्क पढ़ाना शुरू कर दिया। उस समय गांव के अलावा पिलखनी, बाढ़ और अलीपुरा की बेटियां पढ़ने आती थीं। बाद में बेटियों के साथ गांव के कक्षा छह से 10 तक के लड़के भी उनके घर आने लगे। उन्होंने उन्हें पढ़ाना सहर्ष स्वीकार कर लिया। कहते हैं कि गणित उनका प्रमुख विषय है. लेकिन संस्कृत और विज्ञान वह कक्षा आठ तक पढ़ाते हैं। गांव में ट्यूशन की व्यवस्था न होना, आर्थिक तंगी और बेटियों को शिक्षित करने का लक्ष्य है। परिवार के संस्कार उन्हें समाज की निस्वार्थ सेवा को प्रोत्साहित करते हैं। लॉकडाउन से पहले उनके पास करीब 30 बच्चे आते थे। कोविड के कारण अब कम बच्चे आते हैं। उनका मंतव्य है शिक्षा का दान महादान है। सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने निरक्षरों को साक्षर करने की ठानी थी, लेकिन शासन के निर्देशों के बाद शिक्षा विभाग ने 14 साल तक के किसी बच्चों को स्कूल में बिना नामांकन के नहीं छोड़ा है। आरएसएस के सह खंड संघचालक सुनील बताते हैं कि मायाराम शर्मा शिक्षा की ज्योति से समाज को नई दिशा दे रहे हैं। गांव के लिए यह गर्व की बात है।
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