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मास्टर विजय सिंह को बेटियों की शादी के लिए बेचना पड़ा पुस्तैनी मकान 

Sat, 17 Feb 2018 12:03 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Sat, 17 Feb 2018 12:03 AM IST
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Master Vijay Singh Muzaffarnagar
धरनास्थ्ाल पर बेटियों की शादी के निमंत्रण लिखते विजय सिंह। - फोटो : अमर उजाला
पिता के हाथों में बेटियों का बचपन भले ही न खेला हो, मगर 22 साल से कलक्ट्रेट में भूमाफियाओं के खिलाफ धरने पर बैठे मास्टर विजय सिंह अब बेटियों के हाथ पीले करेंगे। विजय ने संघर्ष की जो राह चुनी, उस पथ की दुश्वारियों को उनकी गृहस्थी ने भी झेला है। कन्यादान का फर्ज निभाने के लिए विजय सिंह को गांव का अपना पुस्तैनी मकान भी बेचना पड़ा है। 
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कलक्ट्रेट में डीएम दफ्तर के सामने बरामदे में धरनारत मास्टर विजय सिंह न्याय की उम्मीद में जिंदगी के 22 साल गंवा चुके हैं। शामली के गांव चौसाना में 4578 बीघा सरकारी जमीन को दबंगों से मुक्त कराने के जुनून में उन्होंने 26 फरवरी 1996 को आंदोलन की आवाज बुलंद की थी।
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जिस समय वह अपनी अर्जी लेकर कलक्ट्रेट आए थे, उन्हें भी यह अहसास नहीं था कि न्याय की चौखट पर ही बूढ़ा हो जाना पड़ेगा। संघर्ष की डगर कितनी कठिन है, यह उनके परिवार से ज्यादा कौन जान सकता है। वर्ष 1994 में विजय ने जमीन से अवैध कब्जे हटवाने की लड़ाई शुरू की थी, उन्हें गांव में विरोध झेलना पड़ा।
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धमकियां मिली और जानलेवा हमला भी हुआ। उनके इरादों को देख गृहस्थी का ताना-बाना बिखरने लगा। कलक्ट्रेट में धरने पर बैठने के बाद उन्होंने कभी अपने गांव का रुख नहीं किया। मुश्किल घड़ी में पत्नी पुष्पा देवी और बच्चों को गांव छोड़ना पड़ा।

थानाभवन के भनेड़ा गांव में रिश्तेदारी में आसरा मिला। गांव में 23 बीघा जमीन की आमदनी से ही परिवार की गुजर-बसर थी। विजय सिंह के घर में दो बेटियां कल्पना और साक्षी हैं, जबकि एक बेटा गोपाल है। विपरीत हालात में बेटियों ने न सिर्फ मां को संभाला बल्कि ट्यूशन पढ़ाकर अपनी शिक्षा हासिल की। 

कल्पना ने बीए और साक्षी ने गणित से एमएससी पास की है। बेटा पढ़ाई के साथ प्राइवेट जॉब भी कर रहा है। आंदोलन को लेकर विजय सिंह और उनकी पत्नी पुष्पा में कई बार वैचारिक मतभेद हुए। गृहस्थ की जरूरतों की पूर्ति करने में असमर्थ विजय ने सालों तक परिवार से बात नहीं की।

बेटियां पिता से मिलने धरने पर आती रहीं। वक्त कैसे गुजर गया, किसी को पता नहीं चला। बेटियों के हाथ पीले करने की जिम्मेदारी निभाने की घड़ी आ गई। आंदोलन में जिंदगी खप गई। अब कन्यादान के लिए उन्हें चौसाना का पैतृक मकान बेचना पड़ा है।

21 फरवरी को दोनों बेटियों की बारात आएगी। भोपा रोड के पंजाबी बारातघर में विवाह संस्कार होगा। शादी के निमंत्रण पत्र बांटने में जुटे मास्टर विजय सिंह कहते हैं कि बेईमानी के खिलाफ लड़ाई में ईमानदारी नहीं छोड़ सकता था। बेटियों की खुशियों के लिए मकान कोई बड़ी बात नहीं है। बेटियों का भी संपत्ति में हक होता है। 

देश का सबसे लंबा धरना घोषित हुआ 
लंबी संघर्ष यात्रा का दर्द विजय सिंह की बातों में भी झलकता है। धरने के दौरान ही पिता ठाकुर भगत सिंह और मां चंदा देवी चल बसे। पत्नी ने ही सभी फर्ज निभाए। एमए बीएड करने के बाद उन्होंने गांव में ही अध्यापन कार्य किया।

विजय सिंह का यह धरना अहिंसावादी तरीके से चल रहा है। लिम्का बुक ऑफ रिकाड्र्स में वर्ष 2013 में उनका धरना देश का सबसे लंबा धरना घोषित हो चुका है। एशिया बुक ऑफ रिकार्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस ने उनके जज्बे को सलाम किया है। अखिलेश सरकार ने भूमि घपले की जांच बैठाई थी, लेकिन आज तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। 


भाई से मिलकर रोने लगी बहनें 
आठ साल बाद विजय सिंह की दो बहनें हरियाणा से कलक्ट्रेट पहुंचीं। शादी में शामिल होने आईं बड़ी बहन बाला और छोटी बहन अनीता ने भाई को देखा तो गले मिलकर रोने लगीं। मास्टर विजय का एक भाई कुंवरपाल सिंह गांव में ही खेतीबाड़ी करता है।
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