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पिता के हत्या के दिन बेटे का होगा अंतिम संस्कार  

Wed, 26 Apr 2017 12:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Wed, 26 Apr 2017 12:35 AM IST
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Manoj's father murdered on this day
शहीद मनोज का फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
शहीद मनोज कुमार की मां राजेश की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना मुमकिन नहीं है। परिवार पर कुदरत की मार देखिए कि छह वर्ष पूर्व जिस तारीख को पिता की हत्या हुई थी, उसी तारीख और उसी माह को बेटे का अंतिम संस्कार होगा। मनोज की शहादत का उसके भाई रमेश को जैसे ही फोन पर पता चला तो उसके पैरों तले से जमीन खिसक गई।
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काफी देर तक वह समझ ही नहीं पाया कि यह क्या हो गया। किसी तरह दिल और दिमाग को काबू कर घर के लोगों को उसने मामले की जानकारी दी। रात में ही मां और बहनों की चीत्कार से घर गूंजने लगा। मां राजेश देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद के परिवार के साथ कुदरत की मार देखिए 26 अप्रैल 2011 को उसके पिता कर्मचंद की गांव में ही दबंगों ने हत्या कर दी थी और 26 अप्रैल को ही शहीद का अंतिम संस्कार होना तय हुआ है।             
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पुलिस सुरक्षा में मनोज ने दिया था इम्तिहान                  
नक्सली हमले में शहीद हुए मनोज के पिता की छह वर्ष पूर्व मजदूरी के पैसों को लेकर हुए विवाद में गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इतना ही नहीं दबंगों ने शव को साइकिल पर रखकर गांव में घुमाया था और बाद में गंगनहर में फेंक दिया था। बीचबचाव को आए मनोज पर भी हमला कर उसे घायल कर दिया गया था। बसपा शासन के चलते मामले की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक गूंजी थी। अपनी भर्ती का इम्तिहान भी मनोज ने पुलिस सुरक्षा में दिया था।          
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भोपा के निरगाजनी में मजदूरी करने वाले शहीद मनोज के पिता कर्मचंद ने छह वर्ष दबंगों के गेहूं की फसल को एक-दो दिन में काटने के लिए कह दिया था। इस बात से नाराज होकर दबंगों ने गांव के बीच में ही उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। यही नहीं हत्यारोपियों ने साइकिल पर उसका शव रखकर पूरे गांव में घुमाया था।

बाद में शव को गंगनहर में फेंक दिया गया था। शहीद मनोज को भी दबंगों ने पीट-पीटकर घायल कर दिया था। बसपा शासन में दलित की जघन्य तरीके से की गई हत्या के चलते मामले की गूंज दिल्ली और लखनऊ तक गूंजी थी। राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने गांव का दौरा तक किया था। मामले में दर्जनभर लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी। पीड़ित परिवार के घर पर पुलिस का पहरा बैठाया था। शहीद ने रामपुर में पुलिस सुरक्षा में ही सीआरपीएफ का इम्तिहान दिया था। हत्या का मामला अभी भी कोर्ट में चल रहा है।                   

            
दस दिन पहले ही हुआ था प्रमोशन      
भोपा। शहीद मनोज का दस दिन पूर्व सीआरपीएफ में प्रमोशन हुआ था। उसे कांस्टेबल से हेड कांस्टेबल बनाया गया था। मनोज ने परिजनों को मामले की जानकारी देकर खुशी व्यक्त की थी।                   
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